13 जुलाई 2026
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26/11 को 'हिंदू आतंकवाद' बताने की थी तैयारी, कसाब की गिरफ्तारी ने बचाया: सुधांशु त्रिवेदी

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26/11 को 'हिंदू आतंकवाद' बताने की थी तैयारी, कसाब की गिरफ्तारी ने बचाया: सुधांशु त्रिवेदी

सारांश

BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी का बड़ा आरोप — 26/11 हमले को 'हिंदू आतंकवाद' बताने की पूरी तैयारी थी, और केवल तुकाराम ओंबले के बलिदान से कसाब जीवित पकड़ा गया। मुंबई ट्रेन धमाकों के 20 साल पूरे होने पर कांग्रेस-काल की सुरक्षा नीतियों पर तीखे सवाल।

मुख्य बातें

BJP सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने 13 जुलाई 2026 को आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार 26/11 हमले को 'हिंदू आतंकवाद' का रंग देने की तैयारी में थी।
गृह मंत्रालय के तत्कालीन उपसचिव आरवीएस मणि के हालिया साक्षात्कार के हवाले से यह दावा किया गया कि कसाब की जीवित गिरफ्तारी ने इस कथित साजिश को विफल किया।
सभी 26/11 आतंकवादियों के पास फर्जी हिंदू पहचान पत्र थे और हाथों में कलावा बंधा था — शहीद तुकाराम ओंबले के बलिदान ने कसाब को जीवित पकड़वाया।
तत्कालीन गृह मंत्री पी.
चिदंबरम ने 11 दिसंबर 2008 को संसद में माना था कि नौसेना को संदिग्ध गतिविधियाँ मिली थीं पर उन्हें 'फॉलो न करने' का निर्णय लिया गया।
इशरत जहां शपथपत्र बदलने की फाइल कथित तौर पर गायब पाई गई; ओबामा की किताब का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय सेना पाकिस्तान पर कार्रवाई को तैयार थी पर सरकार ने रोका।
वायनाड संकट में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की अनुपस्थिति पर भी त्रिवेदी ने तीखा हमला बोला।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने सोमवार, 13 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार मुंबई 26/11 आतंकी हमले को 'हिंदू आतंकवाद' का रंग देने की तैयारी में थी। उन्होंने कहा कि यदि महाराष्ट्र पुलिस के शहीद तुकाराम ओंबले ने अपने प्राणों की आहुति देकर आतंकी अजमल आमिर कसाब को जीवित नहीं पकड़ा होता, तो यह साजिश सफल हो जाती।

मणि के इंटरव्यू से उठे सवाल

त्रिवेदी ने कहा कि हाल ही में एक साक्षात्कार में गृह मंत्रालय के तत्कालीन उपसचिव आरवीएस मणि ने खुलासा किया कि यदि कसाब जीवित नहीं पकड़ा जाता, तो 'हिंदू आतंकवाद' की थ्योरी को चस्पा करने की पूरी तैयारी हो चुकी थी। उन्होंने यह भी बताया कि 26/11 के सभी आतंकवादियों ने फर्जी हिंदू पहचान पत्र बना रखे थे और अपने हाथों में कलावा बांध रखा था — जो कि एक सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा प्रतीत होता है।

गौरतलब है कि शहीद तुकाराम ओंबले ने गोलियाँ खाते हुए भी कसाब को जकड़े रखा, जिससे उसे जीवित पकड़ा जा सका। इस बलिदान ने न केवल एक आतंकी को कटघरे में खड़ा किया, बल्कि कथित तौर पर एक बड़े दुष्प्रचार को भी विफल कर दिया।

दिग्विजय सिंह और गोपनीय सूचनाओं पर सवाल

त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने तथाकथित हिंदू आतंकवाद के मामलों से जुड़ी गुप्तचर सूचनाएँ हासिल कीं, जबकि वे सरकार का हिस्सा नहीं थे। उन्होंने सवाल उठाया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी गैर-सरकारी व्यक्ति को कैसे और क्यों दी गई। उन्होंने यह भी कहा कि दिग्विजय सिंह ने दावा किया था कि शहीद हेमंत करकरे ने उन्हें कुछ जानकारी दी थी — त्रिवेदी ने इसे संवेदनशील सुरक्षा सूचना का अनुचित साझाकरण बताया।

चिदंबरम के संसदीय बयान पर निशाना

भाजपा सांसद ने याद दिलाया कि 11 दिसंबर 2008 को तत्कालीन गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने संसद में स्वीकार किया था कि नौसेना को कुछ संदिग्ध गतिविधियाँ मिली थीं, लेकिन उन्हें 'फॉलो न करने' का निर्णय लिया गया। त्रिवेदी ने इसे एक गंभीर चूक बताते हुए कहा कि यह सवाल आज भी अनुत्तरित है।

उन्होंने डेविड कोलमैन हेडली के मामले में भी सवाल उठाए — कि तत्कालीन सरकार ने उसे भारत में इंटरोगेट करने की बजाय केवल अमेरिका जाकर साक्षात्कार लेने पर क्यों संतोष किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब पाकिस्तान में बैठे आरोपी आरिफ ने खुद फंडिंग की बात स्वीकार की थी, तब भी पाकिस्तानी आरोपियों को बरी कर मामले को 'हिंदू आतंकवाद' की दिशा में मोड़ा गया।

इशरत जहां शपथपत्र और ओबामा की किताब का संदर्भ

त्रिवेदी ने दावा किया कि इशरत जहां मामले में शपथपत्र बदला गया था, और जब उनकी सरकार सत्ता में आई तो संबंधित फाइल गायब थी। उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की किताब का हवाला देते हुए कहा कि ओबामा ने लिखा है कि 26/11 के बाद भारतीय सेना पाकिस्तान पर बड़ी कार्रवाई के लिए तैयार थी, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार ने ऐसा नहीं किया। त्रिवेदी ने सीधा सवाल दागा कि क्या ISI और कांग्रेस (INC) के बीच कोई 'मैच फिक्सिंग' थी।

वायनाड भूस्खलन पर गांधी परिवार को घेरा

त्रिवेदी ने इसी प्रेस वार्ता में वायनाड भूस्खलन के संदर्भ में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की अनुपस्थिति पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने 2019 में अपनी पारंपरिक सीट गंवाने के बाद वायनाड से लोकसभा में प्रवेश किया और बाद में यह सीट प्रियंका गांधी वाड्रा को सौंप दी, यह वादा करते हुए कि वायनाड को 'दो-दो सांसद' मिलेंगे। त्रिवेदी ने कहा कि संकट की इस घड़ी में दोनों सांसद वायनाड में 'जमीन पर' नजर नहीं आ रहे, जो केरल की जनता के साथ अन्याय है और गांधी परिवार को माफी माँगनी चाहिए।

यह बयान ऐसे समय आया है जब 11 जुलाई 2006 के मुंबई सीरियल ट्रेन धमाकों के 20 साल पूरे हो रहे हैं — एक ऐसी त्रासदी जिसमें 200 से अधिक लोगों की जान गई थी। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद में भी तीखी बहस की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। असली सवाल यह है कि इतने वर्षों बाद ये दावे अदालत में क्यों नहीं गए — और क्या किसी भी पक्ष ने इन आरोपों की विधिवत जाँच की माँग की है। वायनाड भूस्खलन को 26/11 की बहस से जोड़ना एक राजनीतिक रणनीति है जो गंभीर सुरक्षा प्रश्नों को चुनावी आरोप-प्रत्यारोप में बदल देती है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुधांशु त्रिवेदी ने 26/11 और 'हिंदू आतंकवाद' को लेकर क्या आरोप लगाए?
त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार 26/11 मुंबई हमले को 'हिंदू आतंकवाद' का रंग देने की तैयारी में थी। उन्होंने गृह मंत्रालय के पूर्व उपसचिव आरवीएस मणि के हालिया साक्षात्कार का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि कसाब की जीवित गिरफ्तारी न होती तो यह कथित साजिश सफल हो जाती।
शहीद तुकाराम ओंबले की भूमिका इस संदर्भ में क्यों महत्वपूर्ण बताई गई?
त्रिवेदी के अनुसार, महाराष्ट्र पुलिस के शहीद तुकाराम ओंबले ने गोलियाँ खाते हुए भी कसाब को जीवित पकड़ा, जिससे उसकी असली पहचान और पाकिस्तानी संलिप्तता उजागर हुई। यदि कसाब जीवित नहीं पकड़ा जाता, तो आतंकवादियों के हाथ में बंधे कलावे और फर्जी हिंदू पहचान पत्रों के आधार पर हमले को 'हिंदू आतंकवाद' बताया जा सकता था।
दिग्विजय सिंह पर क्या आरोप लगाए गए?
त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने सरकार का हिस्सा न होते हुए भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गोपनीय गुप्तचर सूचनाएँ हासिल कीं। उन्होंने यह भी कहा कि दिग्विजय सिंह ने दावा किया था कि शहीद हेमंत करकरे ने उन्हें जानकारी दी थी, जो त्रिवेदी के अनुसार सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन है।
वायनाड भूस्खलन से इस प्रेस वार्ता का क्या संबंध था?
त्रिवेदी ने वायनाड भूस्खलन संकट में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की अनुपस्थिति पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दोनों ने वायनाड से राजनीतिक लाभ लिया, लेकिन संकट की घड़ी में वे वहाँ मौजूद नहीं हैं और गांधी परिवार को केरल की जनता से माफी माँगनी चाहिए।
11 जुलाई 2006 के मुंबई ट्रेन धमाकों का इस बयान में क्या संदर्भ था?
11 जुलाई 2006 के मुंबई सीरियल ट्रेन धमाकों के 20 साल पूरे होने के अवसर पर त्रिवेदी ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार की सुरक्षा नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे 26/11 के संदर्भ में कांग्रेस काल की कथित सुरक्षा चूकों की एक व्यापक श्रृंखला के रूप में प्रस्तुत किया।
राष्ट्र प्रेस
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