मुंबई क्षेत्र को स्थिर बिजली आपूर्ति देने के लिए 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन का उद्घाटन

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मुंबई क्षेत्र को स्थिर बिजली आपूर्ति देने के लिए 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन का उद्घाटन

सारांश

महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी ने बभलेश्वर-कुडस 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन को चालू किया, जिससे मुंबई महानगरीय क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति में सुधार होगा। यह प्रोजेक्ट कई वर्षो की देरी के बाद अब पूरा होने की ओर अग्रसर है।

Key Takeaways

  • बभलेश्वर-कुडस 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन का उद्घाटन
  • बिजली की आपूर्ति में स्थिरता और विश्वसनीयता में वृद्धि
  • 3000 मेगावाट की अतिरिक्त बिजली ट्रांसफर क्षमता
  • 228 केएम लंबी ट्रांसमिशन लाइन
  • 715 ट्रांसमिशन टावर का निर्माण

मुंबई, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (महाट्रांसको) ने गुरुवार को बभलेश्वर-कुडस 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन को सफलतापूर्वक चालू किया, जिससे मुंबई महानगरीय क्षेत्र (एमएमआर) में बिजली के बुनियादी ढांचे में सुधार होगा।

इस नयी लाइन से मुंबई, ठाणे, पालघर और अहिल्यानगर जिलों में बिजली की आपूर्ति की स्थिरता और विश्वसनीयता में वृद्धि की उम्मीद है। महाट्रांसको ने एक बयान में कहा कि इस प्रोजेक्ट से ट्रांसमिशन में होने वाला नुकसान लगभग 5 मेगावाट तक कम होगा और पूरे क्षेत्र में वोल्टेज का स्तर बेहतर होगा।

विशेष बात यह है कि यह डबल-सर्किट ट्रांसमिशन लाइन 3000 मेगावाट तक की अतिरिक्त बिजली ट्रांसफर करने की क्षमता प्रदान करेगी, जिससे तेजी से बढ़ते मुंबई क्षेत्र की बिजली की बढ़ती मांग को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया जा सकेगा।

यह प्रोजेक्ट मूल रूप से 2010 में मंजूर हुआ था और इसे 2013 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों के कारण इसमें कई बार देरी हुई। हालांकि, विभिन्न सरकारी एजेंसियों के सामूहिक प्रयासों और तेज प्रशासन की सहायता से, यह प्रोजेक्ट अंततः मार्च 2026 में पूरा हो जाएगा।

इस प्रोजेक्ट में लगभग 228 केएम लंबी लाइन पर 715 ट्रांसमिशन टावर स्थापित किए गए हैं। इनमें से 485 टावर और 304 सर्किट केएम का काम नासिक डिवीजन के तहत पूरा हुआ, जबकि 230 टावर और 152 सर्किट केएम का काम वाशी डिवीजन के तहत संपन्न हुआ।

इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में कई चुनौतियाँ आईं, जिसमें पुणेजायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (जीएमआरटी) के पास से गुजरने के लिए विशेष अनुमतियाँ लेना शामिल था। इसके अलावा, जमीन के मुआवजे से जुड़े मुद्दे, वन विभाग से मंजूरी, राइट-ऑफ-वे से जुड़ी रुकावटें और सामान पहुँचाने में आने वाली लॉजिस्टिक चुनौतियाँ भी सामने आईं। बयान में कहा गया है कि जंगली इलाकों में सामान को हाथों से पहुँचाना पड़ा, जबकि कुछ हिस्सों में कार्य पूरा करने के लिए आधुनिक हॉटलाइन स्ट्रिंगिंग तकनीकों का उपयोग किया गया।

इस लाइन के चालू होने से मौजूदा पाडघे-बभलेश्वर ट्रांसमिशन लाइनों पर पड़ने वाला बोझ कम होगा और पूरे ग्रिड की विश्वसनीयता में काफी सुधार होगा। साथ ही, इससे कुडूस सबस्टेशन को बिजली का एक अतिरिक्त स्रोत भी मिलेगा, जिससे मुंबई क्षेत्र में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने में सहायता मिलेगी।

महाट्रांसको ने इस प्रोजेक्ट की सफलता का श्रेय स्थानीय जन प्रतिनिधियों, राजस्व अधिकारियों, पुलिस और वन विभाग के सहयोग एवं समर्थन को दिया।

Point of View

जो कि एक सकारात्मक कदम है।
NationPress
10/04/2026

Frequently Asked Questions

इस ट्रांसमिशन लाइन का उद्घाटन कब हुआ?
इस ट्रांसमिशन लाइन का उद्घाटन 9 अप्रैल को हुआ।
इस प्रोजेक्ट से क्या लाभ होगा?
इस प्रोजेक्ट से बिजली की आपूर्ति में स्थिरता, विश्वसनीयता और कुशलता में वृद्धि होगी।
इस ट्रांसमिशन लाइन की लंबाई कितनी है?
इस ट्रांसमिशन लाइन की लंबाई लगभग 228 केएम है।
इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में कितनी देरी हुई?
इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में कई बार देरी हुई, मुख्यतः तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों के कारण।
इस प्रोजेक्ट के तहत कितने ट्रांसमिशन टावर लगाए गए हैं?
इस प्रोजेक्ट के तहत 715 ट्रांसमिशन टावर लगाए गए हैं।
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