म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग का JNPA दौरा, 67 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने देखा भारत का नंबर 1 बंदरगाह
सारांश
मुख्य बातें
म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने 2 जून को मंगलवार को मुंबई स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) का दौरा किया, जहाँ उन्होंने 67 सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत के सबसे बड़े कंटेनर बंदरगाह के बुनियादी ढाँचे, परिचालन क्षमता और भविष्य की विस्तार योजनाओं का जायजा लिया। यह दौरा भारत और म्यांमार के बीच समुद्री सहयोग और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
स्वागत और प्रजेंटेशन
JNPA पहुँचने पर चेयरपर्सन गौरव दयाल (IAS) और बंदरगाह के विभिन्न विभागीय प्रमुखों ने प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रतिनिधिमंडल को बंदरगाह के पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑपरेशनल कैपेबिलिटी, क्षमता विस्तार के प्रयासों, रणनीतिक विकास योजनाओं, सस्टेनेबिलिटी पहलों और भविष्य के ग्रोथ रोडमैप पर एक विस्तृत प्रजेंटेशन दिया गया।
वधवन पोर्ट परियोजना पर ज़ोर
प्रजेंटेशन में विशेष रूप से वधवन पोर्ट प्रोजेक्ट पर ज़ोर दिया गया, जिसे भारत के सबसे बड़े डीप-ड्राफ्ट बंदरगाहों में से एक माना जा रहा है और जो इस क्षेत्र में समुद्री व्यापार वृद्धि का प्रमुख चालक बनने की क्षमता रखता है। गौरतलब है कि वधवन परियोजना को केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष मंज़ूरी दी थी और यह भारत की मेगा पोर्ट महत्वाकांक्षा का केंद्रीय हिस्सा है।
म्यांमार के राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया
राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग ने कहा कि JNPA का भारत का नंबर 1 बंदरगाह बनना इसकी ऑपरेशनल एक्सीलेंस और मज़बूत सेवा क्षमताओं को दर्शाता है। उन्होंने बंदरगाह के विकास प्रयासों को आगे बढ़ाने में म्यांमार की दिलचस्पी जताई और कहा कि उनका प्रतिनिधिमंडल इस क्षेत्र को बेहतर समझने, JNPA के अनुभव से सीखने और नॉलेज एक्सचेंज तथा सहयोग के अवसर तलाशने में गहरी रुचि रखता है।
JNPA चेयरपर्सन का बयान
चेयरपर्सन गौरव दयाल ने कहा, ‘म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग और उनके जाने-माने प्रतिनिधिमंडल का JNPA में स्वागत करना हमारे लिए खुशी की बात थी। इस दौरे से भारत की समुद्री क्षमताओं, JNPA की ऑपरेशनल एक्सीलेंस, और वधवन पोर्ट प्रोजेक्ट सहित भविष्योन्मुखी विकास कार्यों को दिखाने का शानदार अवसर मिला।’ उन्होंने आगे जोड़ा कि भारत और म्यांमार के बीच समुद्री एवं व्यापार सहयोग को मज़बूत करना और बेहतर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी तलाशना दोनों देशों के लिए लाभकारी होगा।
क्षेत्र भ्रमण और आगे की राह
प्रतिनिधिमंडल ने बंदरगाह परिसर का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने कार्गो हैंडलिंग ऑपरेशन और एकीकृत लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत अपनी ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के तहत पड़ोसी देशों के साथ समुद्री और बुनियादी ढाँचा सहयोग को प्राथमिकता दे रहा है। आने वाले महीनों में दोनों पक्षों के बीच तकनीकी सहयोग और संभावित संयुक्त पहलों पर आगे की बातचीत की उम्मीद है।