NCW सदस्य निवेदिता सुब्रमणियन ने देहरादून जेल का निरीक्षण किया, महिला बंदियों के पुनर्वास पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की सदस्य निवेदिता सुब्रमणियन ने 1 नवंबर 2026 को उत्तराखंड के देहरादून स्थित जिला जेल का औचक निरीक्षण किया और महिला बंदियों की जीवन-दशाओं, सुरक्षा एवं पुनर्वास के अवसरों का प्रत्यक्ष आकलन किया। यह दौरा एनसीडब्ल्यू द्वारा शनिवार को आयोजित एक अखिल भारतीय परामर्श बैठक के ठीक अगले दिन हुआ, जिसमें 30 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जेल महानिदेशक और वरिष्ठ अधिकारी एकत्रित हुए थे।
निरीक्षण में क्या देखा गया
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, सुब्रमणियन ने जेल की भौतिक सुविधाओं का निरीक्षण करने के साथ-साथ महिला बंदियों से सीधी बातचीत की। इस दौरान उन्होंने उनकी सुरक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, स्वच्छता और गरिमापूर्ण जीवन स्थितियों से जुड़ी चिंताओं को समझने का प्रयास किया। उन्होंने कौशल विकास और सशक्तिकरण के अवसरों को प्रबल बनाने पर विशेष बल दिया।
अखिल भारतीय परामर्श बैठक का ब्यौरा
इस निरीक्षण से एक दिन पूर्व, 31 अक्टूबर 2026 को देहरादून में आयोजित बैठक की अध्यक्षता NCW अध्यक्ष विजया रहाटकर ने की। इसमें उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल भी उपस्थित रहीं। बैठक का मुख्य उद्देश्य, आधिकारिक बयान के अनुसार, पिछली परामर्श बैठकों में तैयार की गई सिफारिशों को केंद्र सरकार तक पहुँचाने और उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक कार्य योजना तैयार करना था।
तकनीकी सत्रों में कानूनी प्रावधानों, बुनियादी ढाँचे, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। मौजूदा व्यवस्था में खामियाँ चिह्नित की गईं और महिला बंदियों की विशिष्ट ज़रूरतों के अनुसार सुविधाएँ सुनिश्चित करने पर सहमति बनी।
स्वास्थ्य और गरिमा: केंद्रीय मुद्दे
बयान के अनुसार, बैठक में स्त्री रोग और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं, मानसिक स्वास्थ्य देखभाल, नियमित स्वास्थ्य जाँच और उपचार की निरंतरता को प्राथमिकता दी गई। इसके अलावा, मासिक धर्म स्वच्छता, उचित तलाशी प्रक्रिया और प्रशिक्षित महिला कर्मचारियों की पर्याप्त तैनाती के मुद्दे भी उठाए गए — जो जेलों में महिलाओं की गरिमा सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य माने जाते हैं।
जवाबदेही और शिकायत निवारण
वरिष्ठ जेल अधिकारियों के साथ हुई चर्चा में प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विकसित करने, अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार को रोकने हेतु आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने पर जोर दिया गया। भाग लेने वाले अधिकारियों ने अपने-अपने राज्यों की बेहतर प्रथाओं और सुधार पहलों को भी साझा किया।
आगे की राह
इस बैठक और निरीक्षण से उभरी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपी जाएँगी, जिनके आधार पर देशभर की जेलों में महिला बंदियों की दशाओं में सुधार की कार्य योजना बनाए जाने की उम्मीद है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब जेल सुधारों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज़ हो रही है।