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नेपाल बाढ़: 166 भारतीय नागरिक सुरक्षित निकाले, 410 कैलाश मानसरोवर यात्री चीन से लौटे

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नेपाल बाढ़: 166 भारतीय नागरिक सुरक्षित निकाले, 410 कैलाश मानसरोवर यात्री चीन से लौटे

सारांश

नेपाल में ग्लेशियर टूटने से आई फ्लैश फ्लड ने 1,114 लोगों की जान ली और 3,916 लापता हैं। भारत ने 166 नागरिकों को बचाया, 74 टन राहत भेजी और सुरंग में 100 मीटर तक पहुँचा। यह संकट हिमालयी जलवायु खतरों की गहराती चुनौती को उजागर करता है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय के अनुसार अब तक 166 भारतीय नागरिकों को नेपाल बाढ़ से सुरक्षित निकाला जा चुका है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 410 भारतीय नागरिक बुधवार को चीन से रवाना हुए।
भारत ने राहत सामग्री की पाँचवीं खेप भेजी — कुल 74 टन सामग्री नेपाल पहुँची।
11 सदस्यीय विशेष बचाव दल और 6 टन आधुनिक उपकरण भी भेजे गए।
बाढ़ में 1,114 लोगों के शव बरामद; 3,916 अभी भी लापता।
भारतीय सुरंग दल चिलीमे सुरंग में 100 मीटर तक पहुँचा; गुरुवार से नेपाली सेना के साथ संयुक्त अभियान।

नेपाल में 26 अगस्त को तिब्बत में ग्लेशियर ध्वस्त होने के बाद आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के मद्देनज़र भारत का राहत एवं बचाव अभियान 2 सितंबर को भी पूरी गति से जारी रहा। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें बुधवार को रेस्क्यू किए गए तीन लोग भी शामिल हैं। इसके साथ ही, कैलाश मानसरोवर यात्रा और अन्य प्रयोजनों से तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र गए 410 भारतीय नागरिक बुधवार को चीन से रवाना हो गए।

राहत सामग्री की पाँचवीं खेप काठमांडू पहुँची

भारत ने बुधवार को नेपाल को राहत सामग्री की पाँचवीं खेप भेजी। भारतीय वायुसेना का एक विमान काठमांडू पहुँचा, जिसमें करीब 5.5 टन चिकित्सा सामग्री थी — इसमें एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक दवाएँ, सर्जिकल उपकरण और अन्य आवश्यक औषधियाँ शामिल थीं। विमान में 11 सदस्यीय विशेष बचाव दल और 6 टन से अधिक आधुनिक रेस्क्यू उपकरण भी भेजे गए। इस प्रकार भारत अब तक नेपाल को कुल 74 टन से अधिक राहत सामग्री उपलब्ध करा चुका है।

नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने यह राहत सामग्री नेपाल सरकार को औपचारिक रूप से सौंपी। यह सहायता उन इलाकों में राहत कार्यों को गति देने के लिए है जो भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई भीषण बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

सुरंग बचाव अभियान में प्रगति

भारतीय सुरंग बचाव दल ने अपना बेस त्रिशूली से स्याब्रुबेसी स्थानांतरित कर दिया है, ताकि चिलीमे सुरंग तक पहुँचने में लगने वाला समय कम किया जा सके। नेपाली सेना के साथ संयुक्त अभियान के दौरान दल ने कीचड़ और मलबे से भरी सुरंग में लगभग 100 मीटर तक आगे बढ़ने में सफलता हासिल की।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारी मशीनरी सुरंग तक पहुँचाने के लिए अस्थायी सड़क बनाने की संभावना भी तलाशी जा रही है। बुधवार को भारत से पहुँचे 11 विशेषज्ञ त्रिशूली बाज़ार के पास तैनात हो चुके हैं और गुरुवार से नेपाली सेना के साथ अभियान में शामिल होंगे।

डीएनए पहचान में भी भारत का सहयोग

भारतीय फॉरेंसिक टीम काठमांडू की दो प्रयोगशालाओं में नेपाली विशेषज्ञों के साथ मिलकर डीएनए नमूनों की जाँच और पहचान का कार्य कर रही है। यह सहयोग उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके प्रियजन बाढ़ में लापता हो गए हैं।

नेपाल में तबाही का आँकड़ा

नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बुधवार सुबह तक बाढ़ में बहकर गए 1,114 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 3,916 लोग अभी भी लापता हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने संसद में कहा कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से बढ़ते खतरों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गंभीरता से ध्यान देना होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा के पास लेंगदे खोला पर हिमस्खलन से प्राकृतिक बाँध बन गया था। बाद में यह बाँध टूटने से भोटेकोशी नदी में भीषण बाढ़ आई, जिसने त्रिशूली नदी तक के इलाकों में भारी तबाही मचाई। यह ऐसे समय में आया है जब हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर पिघलने की दर पहले से कहीं अधिक तेज़ हो चुकी है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि भारत-नेपाल के बीच आपदा प्रबंधन सहयोग की यह कड़ी पिछले कई वर्षों से मज़बूत होती रही है, लेकिन इस बार की आपदा का पैमाना असाधारण है। अभियान में तेज़ी लाने के लिए सुरंग तक सड़क निर्माण और अतिरिक्त विशेषज्ञ दलों की तैनाती अगले कुछ दिनों में निर्णायक साबित होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 3,916 लापता लोगों की खोज में सुरंग तक सड़क न होने की देरी कितनी जानें और ले सकती है। गौरतलब है कि भोटेकोशी और त्रिशूली घाटियाँ पहले भी इसी तरह की ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) से तबाह हो चुकी हैं, फिर भी पूर्व-चेतावनी तंत्र की कमी स्पष्ट दिखती है। नेपाल के प्रधानमंत्री का जलवायु परिवर्तन पर बयान सही दिशा में है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय वित्त पोषण के बिना हिमालयी देशों की आपदा तैयारी एक खोखला वादा बनकर रह जाती है।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेपाल बाढ़ में अब तक कितने भारतीय नागरिकों को बचाया गया है?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, 2 सितंबर तक कुल 166 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें बुधवार को बचाए गए तीन लोग भी शामिल हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्री चीन से क्यों लौटे?
तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में कैलाश मानसरोवर यात्रा और अन्य गतिविधियों के लिए गए 410 भारतीय नागरिक बुधवार को चीन से रवाना हुए। नेपाल में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए उनकी वापसी सुनिश्चित की गई।
नेपाल में यह बाढ़ कैसे आई?
विशेषज्ञों के अनुसार, 26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा के पास लेंगदे खोला पर हिमस्खलन से प्राकृतिक बाँध बना और बाद में उसके टूटने से भोटेकोशी नदी में भीषण फ्लैश फ्लड आई, जिसने त्रिशूली नदी तक के क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई।
भारत ने नेपाल को अब तक कितनी राहत सामग्री भेजी है?
भारत अब तक नेपाल को कुल लगभग 74 टन राहत सामग्री भेज चुका है। इसमें चिकित्सा उपकरण, एंटीबायोटिक्स, सर्जिकल सामग्री और आधुनिक रेस्क्यू उपकरण शामिल हैं।
नेपाल बाढ़ में कुल कितने लोग प्रभावित हुए हैं?
नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, बुधवार सुबह तक 1,114 लोगों के शव बरामद हो चुके हैं और 3,916 लोग अभी भी लापता हैं।
राष्ट्र प्रेस
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