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कोलकाता गोदाम हादसा: NHRC ने लिया स्वतः संज्ञान, पुलिस व म्युनिसिपल कमिश्नर को 2 हफ्ते में रिपोर्ट देने का नोटिस

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कोलकाता गोदाम हादसा: NHRC ने लिया स्वतः संज्ञान, पुलिस व म्युनिसिपल कमिश्नर को 2 हफ्ते में रिपोर्ट देने का नोटिस

सारांश

कोलकाता के तारातला में 24 जून को गोदाम ढहने से 16 मजदूरों की जान गई — और अब NHRC ने राज्य प्रशासन से सीधे जवाब माँगा है। दोषपूर्ण बिल्डिंग प्लान के आरोप, एक OSD की गिरफ्तारी और दो सरकारों के मुआवजे के बीच यह मामला निर्माण स्थलों पर जवाबदेही की बड़ी लड़ाई बन गया है।

मुख्य बातें

NHRC ने कोलकाता के तारातला गोदाम हादसे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव , कोलकाता पुलिस कमिश्नर और म्युनिसिपल कमिश्नर को नोटिस जारी किया।
24 जून को हुए इस हादसे में 16 मजदूरों की मौत और 20 अन्य घायल हुए; करीब 40 मजदूर मलबे में दबे थे।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार स्वीकृत बिल्डिंग प्लान दोषपूर्ण था — पुलिस इसकी जाँच कर रही है।
कोलकाता नगर निगम ने एक OSD को निलंबित किया, जो 72 घंटे से अधिक पुलिस हिरासत में रहे।
पश्चिम बंगाल सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख और घायलों को ₹1 लाख ; प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 देने की घोषणा।
NHRC ने दो सप्ताह के भीतर जाँच की स्थिति और मुआवजे का विवरण माँगा है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कोलकाता के तारातला इलाके में 24 जून को निर्माणाधीन गोदाम ढहने से 16 मजदूरों की मौत और 20 अन्य के घायल होने की मीडिया रिपोर्टों पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला मानते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, कोलकाता पुलिस कमिश्नर और म्युनिसिपल कमिश्नर को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

हादसे का घटनाक्रम

24 जून को तारातला में निर्माणाधीन वेयरहाउस के लोहे के ढाँचे की कंक्रीट कास्टिंग अचानक भरभराकर ढह गई। रिपोर्टों के अनुसार उस समय निर्माण स्थल पर काम कर रहे करीब 40 मजदूर मलबे में दब गए, जिनमें से 16 की मौत हो गई और 20 घायल हुए। NHRC ने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक स्वीकृत बिल्डिंग प्लान दोषपूर्ण था, जो इस त्रासदी की एक प्रमुख वजह बताई जा रही है।

जाँच और कार्रवाई

पुलिस बिल्डिंग प्लान की मंजूरी में कथित गड़बड़ी के आरोपों की जाँच कर रही है। कोलकाता नगर निगम ने एक 'ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी' (OSD) को निलंबित कर दिया है, जिन्हें इस मामले में गिरफ्तार किया गया था और वे 72 घंटे से अधिक समय तक पुलिस हिरासत में रहे। यह ऐसे समय में आया है जब निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर देशभर में सवाल उठ रहे हैं।

NHRC की माँग

आयोग ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट में जाँच की मौजूदा स्थिति के साथ-साथ मृतकों और घायलों के परिजनों को दिए गए मुआवजे का पूरा विवरण शामिल होना चाहिए। गौरतलब है कि NHRC ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान तब लेता है जब उसे लगता है कि राज्य की निष्क्रियता या लापरवाही से नागरिकों के मूलभूत अधिकार खतरे में पड़े हों।

मुआवजे की घोषणाएँ

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने राज्य कोष से मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख और प्रत्येक घायल को ₹1 लाख की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री कार्यालय ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और प्रत्येक घायल को ₹50,000 की सहायता राशि देने की घोषणा की है।

आगे क्या होगा

दो सप्ताह की समय-सीमा समाप्त होने के बाद NHRC प्राप्त रिपोर्ट की समीक्षा करेगा और यदि जवाब असंतोषजनक पाया गया तो आगे की कार्रवाई की जा सकती है। इस मामले में बिल्डिंग प्लान स्वीकृति प्रक्रिया की पारदर्शिता और निर्माण स्थलों पर श्रमिक सुरक्षा के व्यापक सवाल अब केंद्र में आ गए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि दोषपूर्ण बिल्डिंग प्लान को मंजूरी कैसे मिली — और किसने दी। OSD की गिरफ्तारी एक निचले स्तर की जवाबदेही है; जब तक स्वीकृति श्रृंखला के ऊपरी स्तर की जाँच नहीं होती, यह कार्रवाई अधूरी रहेगी। भारत में निर्माण स्थल हादसों का एक दुखद पैटर्न है — मुआवजे की घोषणाएँ होती हैं, कुछ गिरफ्तारियाँ होती हैं, और फिर मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। NHRC की रिपोर्ट माँग तभी सार्थक होगी जब उसके आधार पर संरचनात्मक सुधार — न कि सिर्फ व्यक्तिगत दंड — सुनिश्चित किए जाएँ।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोलकाता तारातला गोदाम हादसा क्या है?
24 जून को कोलकाता के तारातला इलाके में निर्माणाधीन एक वेयरहाउस का लोहे का ढाँचा अचानक ढह गया, जिसमें काम कर रहे करीब 40 मजदूर मलबे में दब गए। इस हादसे में 16 मजदूरों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हुए।
NHRC ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, कोलकाता पुलिस कमिश्नर और म्युनिसिपल कमिश्नर को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर जाँच की स्थिति और मुआवजे का विवरण देने को कहा है।
हादसे के पीड़ितों को कितना मुआवजा मिलेगा?
पश्चिम बंगाल सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख और प्रत्येक घायल को ₹1 लाख देने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को अतिरिक्त ₹2 लाख और प्रत्येक घायल को ₹50,000 देने की भी घोषणा की गई है।
इस हादसे में अब तक किस पर कार्रवाई हुई है?
कोलकाता नगर निगम ने एक 'ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी' (OSD) को निलंबित किया है, जिन्हें पहले गिरफ्तार किया गया था और जो 72 घंटे से अधिक पुलिस हिरासत में रहे। पुलिस बिल्डिंग प्लान की मंजूरी में कथित गड़बड़ी के आरोपों की जाँच कर रही है।
हादसे की वजह क्या बताई जा रही है?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार स्वीकृत बिल्डिंग प्लान दोषपूर्ण था, जो इस हादसे की प्रमुख वजह मानी जा रही है। पुलिस इस पहलू की जाँच कर रही है और NHRC ने भी अपनी रिपोर्ट माँग में इसका उल्लेख किया है।
राष्ट्र प्रेस
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