एनएचआरसी ने पंजाब सरकार से माँगी रिपोर्ट: सीमावर्ती स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस समारोह न होने पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने पंजाब के ग्रामीण, दूरदराज और सीमावर्ती इलाकों के सरकारी स्कूलों में 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित न किए जाने की शिकायत पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली एनएचआरसी बेंच ने यह जानना चाहा है कि क्या इन क्षेत्रों के बच्चों को केवल स्कूलों की भौगोलिक स्थिति के कारण राष्ट्रीय पर्व से जुड़े समान अवसरों से वंचित रहना पड़ा।
मुख्य घटनाक्रम
एनएचआरसी ने पंजाब सरकार से राज्यवार, जिलावार और स्कूलवार विवरण माँगा है, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि 15 अगस्त 2026 को कितने सरकारी स्कूलों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया, राष्ट्रगान हुआ और छात्रों ने समारोह में भाग लिया। बेंच ने उन स्कूलों की पहचान करने का भी निर्देश दिया है जहाँ निर्धारित गतिविधियाँ आयोजित नहीं की गईं, तथा इसके कारणों की जानकारी भी माँगी गई है।
आयोग ने पंजाब के मुख्य सचिव को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई एवं अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय और गृह मंत्रालय को भी मामले से अवगत कराया गया है।
बच्चों के अधिकारों पर आयोग का रुख
एनएचआरसी बेंच ने अपने आदेश में कहा कि स्वतंत्रता दिवस बच्चों को देश के स्वतंत्रता संग्राम, संविधान, राष्ट्रीय प्रतीकों, नागरिक कर्तव्यों, राष्ट्रीय एकता और लोकतांत्रिक मूल्यों से परिचित कराने का महत्वपूर्ण अवसर है। आयोग के अनुसार, किसी भी क्षेत्र के बच्चों को इन अवसरों से वंचित किया जाना गंभीरता से जाँचे जाने की ज़रूरत है।
शिकायत में आशंका जताई गई है कि सीमावर्ती और दूरदराज के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे स्वतंत्रता दिवस पर होने वाली शैक्षिक, सांस्कृतिक और नागरिक गतिविधियों में भाग लेने से वंचित रह गए होंगे। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब सीमावर्ती क्षेत्रों में राष्ट्रीय एकता की भावना को मज़बूत करना नीतिगत प्राथमिकता मानी जाती है।
आयोग की जाँच का दायरा
एनएचआरसी ने विशेष रूप से यह जाँचने को कहा है कि ग्रामीण, दूरदराज और सीमावर्ती इलाकों के बच्चों और राज्य के अन्य हिस्सों में पढ़ने वाले बच्चों के बीच राष्ट्रीय पर्व मनाने के अवसरों में कोई असमानता तो नहीं रही। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब किसी राज्य के दूरदराज इलाकों में राष्ट्रीय पर्वों के आयोजन को लेकर मानवाधिकार निकायों ने हस्तक्षेप किया हो।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह
अभी तक पंजाब सरकार की ओर से इस नोटिस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। एनएचआरसी की रिपोर्ट के ज़रिए यह स्पष्ट होगा कि सीमावर्ती और दूरदराज इलाकों के सरकारी स्कूलों में स्वतंत्रता दिवस समारोहों के आयोजन में वास्तव में कोई कमी रही या नहीं, और यदि रही तो उसके लिए ज़िम्मेदार परिस्थितियाँ क्या थीं। चार सप्ताह की समय-सीमा के भीतर दाखिल रिपोर्ट के आधार पर आयोग आगे की कार्रवाई तय करेगा।