राजस्थान स्कूल में छात्राओं से कपड़े उतरवाने पर एनएचआरसी का स्वतः संज्ञान, मुख्य सचिव को नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के एक सरकारी स्कूल में छात्राओं के साथ कथित मारपीट और उन्हें कपड़े उतारने पर मजबूर किए जाने की खबरों पर 20 जुलाई को स्वतः संज्ञान लिया। आयोग ने राजस्थान के मुख्य सचिव को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना सवाई माधोपुर जिले के लिवली गांव के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हुई। एक शिक्षक द्वारा ₹1,000 गायब होने की सूचना देने के बाद, 9वीं और 11वीं कक्षा की छात्राओं की तलाशी ली गई और उन्हें कथित तौर पर कपड़े उतारने के लिए बाध्य किया गया। रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि तलाशी के दौरान दो शिक्षकों ने छात्राओं के साथ मारपीट की — हालाँकि किसी के पास से कोई रकम बरामद नहीं हुई।
घर लौटने पर छात्राओं ने अपने माता-पिता को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद अगले दिन बड़ी संख्या में अभिभावक विरोध जताने के लिए स्कूल पहुँचे।
एनएचआरसी की प्रतिक्रिया
आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि ये आरोप सत्य सिद्ध होते हैं, तो यह पीड़ित छात्राओं के मानवाधिकारों का अत्यंत गंभीर उल्लंघन होगा। मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत स्थापित एनएचआरसी एक स्वायत्त वैधानिक संस्था है, जिसका दायित्व जीवन, स्वतंत्रता, समानता, निजता और सम्मान से जुड़े संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है।
विभागीय कार्रवाई
राजस्थान स्कूल शिक्षा विभाग ने चीफ ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर (सीबीईओ) की रिपोर्ट के आधार पर सीनियर शिक्षक सरस्वती मीणा को घटना के सिलसिले में निलंबित कर दिया। इसके अतिरिक्त, स्कूल की वोकेशनल एजुकेशन इंस्ट्रक्टर वंदना शर्मा को उनके कार्यभार से हटाकर सेवा प्रदाता एजेंसी के पास वापस भेज दिया गया।
सरकार का रुख
राजस्थान स्कूल शिक्षा विभाग ने कहा है कि वह छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों पर निगरानी रख रहा है और अधिकारियों को राज्यभर के शिक्षण संस्थानों में निगरानी तंत्र मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो रही है।
आगे क्या होगा
एनएचआरसी ने मुख्य सचिव से दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट के आधार पर आयोग आगे की कार्रवाई तय करेगा। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब एनएचआरसी ने स्कूलों में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार के मामलों में स्वतः संज्ञान लिया हो — आयोग की यह सक्रियता राज्य सरकारों पर जवाबदेही का दबाव बनाने में अहम भूमिका निभाती है।