NHRC का स्वत: संज्ञान: वाराणसी स्कूल में 5 साल के बच्चे को गर्म चाकू से दागने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 29 जुलाई 2026 को उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के एक निजी स्कूल में पाँच वर्षीय बच्चे के साथ कथित अमानवीय व्यवहार और प्रताड़ना के मामले में स्वत: संज्ञान लिया है। मीडिया रिपोर्टों में लगाए गए आरोपों के अनुसार, एक शिक्षक ने बच्चे के निजी अंग को गर्म चाकू से दागा — एक घटना जिसे आयोग ने मानवाधिकारों का गंभीर संभावित उल्लंघन करार दिया है।
मामले का घटनाक्रम
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वाराणसी के उक्त निजी स्कूल में कक्षा के दौरान पाँच साल के बच्चे ने कथित तौर पर अपनी पैंट में पेशाब कर दिया। इससे नाराज होकर आरोपी शिक्षक उसे स्कूल की रसोई में ले गया, जहाँ उसने कथित तौर पर गर्म चाकू से बच्चे के निजी अंग को दाग दिया। इस घटना से बच्चे को गंभीर शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी।
घटना तब सामने आई जब बच्चा स्कूल से घर लौटा और उसने अपने माता-पिता को पूरी बात बताई। बच्चे ने यह भी बताया कि शिक्षक ने उसे धमकी दी थी कि दोबारा ऐसी गलती पर उसे इससे भी कड़ी सजा दी जाएगी।
NHRC की कार्रवाई
आयोग ने इस घटना को अत्यंत गंभीर मानते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और वाराणसी के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया है। दोनों अधिकारियों से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट माँगी गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट में पीड़ित बच्चे की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति और उसके इलाज से जुड़ी जानकारी भी शामिल होनी चाहिए।
आयोग ने कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्ट में किए गए दावे सही पाए जाते हैं, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला बनता है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बच्चों के विरुद्ध स्कूली हिंसा की घटनाओं को लेकर चिंता बढ़ रही है।
आम जनता और बच्चे पर असर
पीड़ित बच्चा गंभीर रूप से भयभीत है और उसे शारीरिक व मानसिक दोनों स्तरों पर पीड़ा झेलनी पड़ी है। बाल अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि इस उम्र में इस तरह की हिंसा बच्चे के दीर्घकालिक मनोवैज्ञानिक विकास पर गहरा प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। परिवार ने घटना की जानकारी अधिकारियों को दी है।
क्या होगा आगे
संबंधित अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर आयोग को रिपोर्ट सौंपनी है। आयोग की जाँच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय होगी। यह मामला उत्तर प्रदेश में निजी स्कूलों की जवाबदेही और बाल संरक्षण तंत्र की प्रभावशीलता पर नए सवाल खड़े करता है।