14 अगस्त 2026
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एनआईए ने नालागढ़ पुलिस स्टेशन आईईडी ब्लास्ट में तीन आरोपी गिरफ्तार किए, बड़े नेटवर्क की तलाश जारी

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एनआईए ने नालागढ़ पुलिस स्टेशन आईईडी ब्लास्ट में तीन आरोपी गिरफ्तार किए, बड़े नेटवर्क की तलाश जारी

सारांश

हिमाचल प्रदेश के नालागढ़ पुलिस स्टेशन के पास 1 जनवरी को हुए आईईडी विस्फोट मामले में एनआईए ने पहली बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। बीएनएस, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और यूएपीए के तहत दर्ज इस मामले में बड़े आतंकी नेटवर्क की तलाश जारी है।

मुख्य बातें

एनआईए ने 14 अगस्त 2026 को नालागढ़ पुलिस स्टेशन आईईडी ब्लास्ट मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपी हैं — महावीर कुमार उर्फ काका , अजय मेहरा और मनप्रीत सिंह उर्फ मणि ।
विस्फोट 1 जनवरी को हुआ था; आवाज़ 400-500 मीटर दूर तक सुनी गई, 40 मीटर दूर आर्मी कैंटीन की खिड़कियाँ टूटीं।
एनआईए ने 8 मई 2026 को बीएनएस , विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया।
महावीर कुमार और अजय मेहरा को 8 दिन की पुलिस हिरासत; मनप्रीत सिंह न्यायिक हिरासत में।
बड़े आतंकी नेटवर्क की पहचान के लिए जांच जारी, और गिरफ्तारियाँ संभव।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 को हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के नालागढ़ पुलिस स्टेशन परिसर के निकट 1 जनवरी को हुए आईईडी विस्फोट मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान महावीर कुमार उर्फ काका, अजय मेहरा और मनप्रीत सिंह उर्फ मणि के रूप में हुई है। एनआईए के अनुसार, यह मामला अपने हाथ में लेने के बाद की ये पहली तीन गिरफ्तारियाँ हैं।

विस्फोट का घटनाक्रम

एनआईए के मुताबिक, 1 जनवरी को हुआ यह विस्फोट पुलिस स्टेशन परिसर के अंदर जांच अधिकारी के कमरे से सटी बाहरी दीवार के पास हुआ था। विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास की इमारतों की खिड़कियाँ टूट गईं — जिनमें 40 मीटर दूर स्थित आर्मी कैंटीन भी शामिल थी। विस्फोट की आवाज़ 400 से 500 मीटर की दूरी तक सुनी गई। प्रारंभ में नालागढ़ पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

एनआईए ने कैसे अपने हाथ में ली जांच

बाद में यह जांच एनआईए को सौंपी गई और एजेंसी ने 8 मई 2026 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की संबंधित धाराओं के तहत मामला नए सिरे से दर्ज किया। गौरतलब है कि यूएपीए के तहत दर्ज होने से यह मामला आतंकवाद से जुड़ी जांच की श्रेणी में आता है, जिससे एजेंसी को व्यापक अधिकार मिलते हैं।

आरोपियों की न्यायिक स्थिति

तीनों आरोपियों को शिमला स्थित विशेष एनआईए न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। न्यायालय ने महावीर कुमार और अजय मेहरा को आठ दिन की पुलिस हिरासत में भेजा, जबकि मनप्रीत सिंह को न्यायिक हिरासत में रखा गया। दोनों हिरासत के बीच यह अंतर जांच की प्राथमिकता और साक्ष्य संग्रह की ज़रूरतों को दर्शाता है।

बड़े नेटवर्क की तलाश

एनआईए ने स्पष्ट किया है कि इस आतंकी हमले के पीछे की व्यापक साजिश का पर्दाफाश करने के लिए जांच जारी है। अधिकारियों के अनुसार, आईईडी विस्फोट की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में शामिल अन्य संदिग्धों की भूमिका का पता लगाने की कोशिशें भी चल रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सुरक्षा एजेंसियाँ उत्तर भारत के राज्यों में आतंकी गतिविधियों पर कड़ी नज़र रखे हुए हैं। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित संदेश था। यूएपीए के तहत दर्ज होने और एनआईए की जांच से यह साफ है कि एजेंसियाँ इसे किसी स्थानीय अपराध नहीं, बल्कि व्यापक आतंकी साजिश का हिस्सा मान रही हैं। हिमाचल प्रदेश, जो अब तक आतंकवाद के मामले में अपेक्षाकृत शांत रहा है, इस घटना से एक नई चुनौती की ओर संकेत करता है। असली सवाल यह है कि क्या तीन गिरफ्तारियाँ उस नेटवर्क की जड़ तक पहुँचती हैं, या यह सिर्फ हिमशैल का सिरा है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नालागढ़ पुलिस स्टेशन आईईडी ब्लास्ट मामला क्या है?
यह हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में 1 जनवरी को नालागढ़ पुलिस स्टेशन परिसर के पास हुए आईईडी विस्फोट का मामला है। विस्फोट इतना तीव्र था कि 40 मीटर दूर आर्मी कैंटीन की खिड़कियाँ टूट गईं और आवाज़ 400-500 मीटर तक सुनी गई।
एनआईए ने इस मामले में किन्हें गिरफ्तार किया है?
एनआईए ने महावीर कुमार उर्फ काका, अजय मेहरा और मनप्रीत सिंह उर्फ मणि को गिरफ्तार किया है। ये एजेंसी द्वारा जांच अपने हाथ में लेने के बाद की पहली तीन गिरफ्तारियाँ हैं।
आरोपियों पर कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
एनआईए ने 8 मई 2026 को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और गैर-कानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। यूएपीए का प्रयोग इसे आतंकवाद से जुड़ी जांच की श्रेणी में रखता है।
आरोपियों को कितनी हिरासत में भेजा गया है?
शिमला की विशेष एनआईए अदालत ने महावीर कुमार और अजय मेहरा को 8 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा है, जबकि मनप्रीत सिंह को न्यायिक हिरासत में रखा गया है।
क्या इस मामले में और गिरफ्तारियाँ होंगी?
एनआईए ने पुष्टि की है कि साजिश में शामिल अन्य लोगों की पहचान और गिरफ्तारी तथा हमले के पीछे के बड़े नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच जारी है। अधिकारियों के अनुसार, आगे और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।
राष्ट्र प्रेस
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