नीति आयोग का स्कूली शिक्षा रोडमैप: 13 सिफारिशें, 14.71 लाख स्कूल और 24.69 करोड़ विद्यार्थियों का भविष्य
सारांश
मुख्य बातें
नीति आयोग की मुख्य कार्यकारी अधिकारी निधि छिब्बर ने 7 मई 2026 को नई दिल्ली में भारत की स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर एक व्यापक पॉलिसी रिपोर्ट जारी की, जिसमें पिछले एक दशक के आँकड़ों का विश्लेषण करते हुए 13 प्रमुख सिफारिशें और 33 कार्यान्वयन मार्ग प्रस्तुत किए गए हैं। 'स्कूल एजुकेशन सिस्टम इन इंडिया: टेम्पोरल एनालिसिस एंड पॉलिसी रोडमैप फॉर क्वालिटी एन्हांसमेंट' शीर्षक वाली यह रिपोर्ट उस व्यवस्था को संबोधित करती है जो 14.71 लाख स्कूलों और 24.69 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी स्कूली शिक्षा व्यवस्था है।
रिपोर्ट का आधार और डेटा स्रोत
यह रिपोर्ट कई विश्वसनीय राष्ट्रीय स्रोतों पर आधारित है। इनमें यूडीआईएसई+ 2024-25, परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024, एनएएस 2017 और 2021, तथा असर 2024 के द्वितीयक आँकड़े शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, फरवरी 2025 में नीति आयोग द्वारा आयोजित 'गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा' पर राष्ट्रीय कार्यशाला में 150 से अधिक प्रतिभागियों के सुझाव भी इसमें समाहित किए गए हैं। रिपोर्ट में देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पहुँच, बुनियादी ढाँचा, समानता, समावेशन, डिजिटल एकीकरण और सीखने के परिणामों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
8 व्यवस्थागत सिफारिशें: ढाँचागत बदलाव पर जोर
रिपोर्ट में दी गई 8 व्यवस्थागत सिफारिशें स्कूल संरचना में सुधार से लेकर शिक्षकों के पेशेवर विकास तक फैली हुई हैं। इनमें संयुक्त स्कूलों और साक्ष्य-आधारित तर्कसंगत व्यवस्था के ज़रिए स्कूल संरचना में सुधार, स्कूल बुनियादी ढाँचे को मज़बूत करना, प्रशासनिक सुधार और क्षमता निर्माण, तथा राज्य और ज़िला स्तरीय टास्क फोर्स का गठन शामिल है। इसके अलावा, स्कूल प्रबंधन समितियों को सशक्त बनाना, शिक्षकों की नियुक्ति और पेशेवर विकास को बढ़ावा देना, डिजिटल और प्रसारण-आधारित शिक्षा का विस्तार, तथा समानता और समावेशन को प्रोत्साहित करना भी इन सिफारिशों का हिस्सा है।
5 शैक्षणिक सिफारिशें: एआई और कौशल विकास पर नज़र
नीति आयोग के बयान के अनुसार, 5 शैक्षणिक सिफारिशें शिक्षण की गुणवत्ता और प्रासंगिकता को केंद्र में रखती हैं। इनमें शिक्षण पद्धति, मूल्यांकन और बुनियादी शिक्षा में बदलाव, समग्र शिक्षा और विद्यार्थियों के कल्याण पर जोर, व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास को नए रूप में लागू करना, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा को मज़बूत करना, तथा शिक्षण में नवाचार के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को शामिल करना प्रमुख हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन को लेकर राज्य स्तर पर असमान प्रगति की रिपोर्टें सामने आ रही हैं।
बुनियादी ढाँचे में सुधार और समावेशन की तस्वीर
रिपोर्ट में हीट मैप और दृश्य ग्राफिक्स के माध्यम से दिखाया गया है कि स्कूलों में बिजली, कार्यशील शौचालय और समावेशी बुनियादी ढाँचे जैसी सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी और स्मार्ट क्लासरूम तक पहुँच बढ़ने से डिजिटल शिक्षा का भी तेज़ी से विस्तार हुआ है। बयान के अनुसार, लड़कियों की भागीदारी और अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के नामांकन में विभिन्न शैक्षणिक स्तरों पर सकारात्मक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
कार्यान्वयन का रोडमैप: तीन चरण, तीन स्तर
रिपोर्ट में 33 कार्यान्वयन मार्ग दिए गए हैं, जिन्हें अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक चरणों में विभाजित किया गया है। केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर जिम्मेदार एजेंसियों की भी स्पष्ट पहचान की गई है, जो इसे पिछली नीतिगत रिपोर्टों की तुलना में अधिक क्रियान्वयन-उन्मुख बनाती है। यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकारें इन सिफारिशों को अपनी ज़मीनी वास्तविकताओं के अनुसार किस गति से अपनाती हैं।