तेलंगाना में आईआईएम नहीं: केंद्र सरकार ने लोकसभा में किया स्पष्ट, 604 प्रबंधन संस्थान पहले से मौजूद
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 21 जुलाई 2026 को लोकसभा में स्पष्ट किया कि तेलंगाना में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) स्थापित करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। सरकार का तर्क है कि राज्य में पहले से ही उच्च शिक्षा और प्रबंधन के पर्याप्त संस्थान उपलब्ध हैं। यह जानकारी केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने एक संसदीय प्रश्न के उत्तर में दी।
संसद में क्या कहा सरकार ने
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने कांग्रेस सांसद मल्लू रवि के प्रश्न के जवाब में बताया कि हैदराबाद में आईआईएम स्थापित करने का अनुरोध केंद्र सरकार को प्राप्त हुआ है, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस योजना अभी नहीं बनाई गई है।
मंत्री ने कहा कि भारत सरकार क्षेत्रीय संतुलन और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखते हुए नए राष्ट्रीय महत्व के संस्थान स्थापित करती है। वर्तमान में देश के 21 राज्यों में 22 आईआईएम संचालित हो रहे हैं।
किन राज्यों में नहीं है आईआईएम
मजूमदार ने बताया कि तेलंगाना के अलावा गोवा, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम — ये सात राज्य ऐसे हैं जहाँ अभी तक कोई आईआईएम नहीं है। इस प्रकार तेलंगाना अकेला नहीं है जो इस सूची में है।
तेलंगाना में उच्च शिक्षा का मौजूदा ढाँचा
अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण 2023-24 का हवाला देते हुए मंत्री ने बताया कि तेलंगाना में 2,070 उच्च शिक्षण संस्थान हैं। इनमें से 604 संस्थानों में प्रबंधन से जुड़े पाठ्यक्रम चलाए जाते हैं — जिनमें 20 विश्वविद्यालय, 570 कॉलेज और 14 स्वतंत्र संस्थान शामिल हैं।
राज्य में हैदराबाद विश्वविद्यालय, आईआईटी हैदराबाद, एनआईटी वारंगल, इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेज यूनिवर्सिटी और मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित केंद्रीय संस्थान पहले से कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त वर्ष 2023 में मुलुगु में सम्मक्का सरक्का केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना भी की जा चुकी है।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की माँग और राज्य का पक्ष
गौरतलब है कि पिछले महीने तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान हैदराबाद में आईआईएम स्थापित करने का आग्रह किया था। मुख्यमंत्री ने कहा था कि राज्य सरकार इसके लिए 200 एकड़ भूमि उपलब्ध कराने को तैयार है।
रेवंत रेड्डी ने यह भी तर्क दिया था कि तेलंगाना पहले से आईआईटी, आईआईआईटी, नालसर और टीआईएफआर जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों का केंद्र है, और आईआईएम की स्थापना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को पूरा करने में सहायक होगी।
आगे क्या होगा
केंद्र सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद तेलंगाना में आईआईएम की माँग फिलहाल अधर में लटकती दिख रही है। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिणी राज्य केंद्रीय शिक्षा संस्थानों के वितरण को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। क्षेत्रीय संतुलन की नीति के तहत भविष्य में किसी नए आईआईएम की स्थापना की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन निकट भविष्य में इसकी कोई घोषणा अपेक्षित नहीं है।