नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कार्गो संचालन शुरू, चेन्नई से पहली मालवाहक उड़ान ने रचा इतिहास
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) ने 17 जून 2026 को घरेलू कार्गो संचालन की औपचारिक शुरुआत कर उत्तर प्रदेश के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ा। चेन्नई से रवाना हुई पहली मालवाहक उड़ान के जेवर एयरपोर्ट पर उतरते ही वाटर कैनन सैल्यूट से उसका भव्य स्वागत किया गया, जो इस उपलब्धि के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम उत्तर प्रदेश को एक प्रमुख कार्गो और निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक साबित हो सकता है।
पहली उड़ान और कार्गो का विवरण
अफकॉम होल्डिंग्स द्वारा संचालित बोइंग 737-800 एफ विमान चेन्नई से लगभग 20 टन मिश्रित कार्गो लेकर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुँचा। इस खेप में मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद, ऑटो कंपोनेंट्स, खाद्य पदार्थ और कंसोलिडेशन शिपमेंट शामिल थे।
कार्गो की अनलोडिंग के तुरंत बाद आपूर्ति और लॉजिस्टिक गतिविधियाँ प्रारंभ हो गईं। उड़ान सामान उतारने के बाद वापस चेन्नई लौट गई। साथ ही, पठानकोट से आई लीची के अलावा मेडिकल उपकरण और ई-कॉमर्स से जुड़े मोबाइल उत्पादों को बेंगलुरु और हैदराबाद के लिए रवाना किया जा रहा है।
कार्गो टर्मिनल और संचालन ढाँचा
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (NIAL) के नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि 87 एकड़ में विकसित अत्याधुनिक कार्गो टर्मिनल का संचालन एआईएसएटीएस (AISATS) द्वारा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नोएडा एयरपोर्ट न केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे उत्तरी भारत के लिए गेम चेंजर साबित होगा।
भाटिया के अनुसार, देश के लगभग 55 प्रतिशत मोबाइल फोन का निर्माण नोएडा में होता है। ऐसे में यह कार्गो हब इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को वैश्विक बाज़ार तक पहुँचाने में बड़ी सहूलियत देगा। यह एयरपोर्ट देश का पहला ऐसा हवाई अड्डा बताया जा रहा है जहाँ इन-बाउंड (आयात) और आउट-बाउंड (निर्यात) सुविधाओं को एकीकृत किया गया है, जिससे सीमलेस कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी।
मल्टी-मॉडल हब और भविष्य की योजना
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को मल्टी-मॉडल कार्गो हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो सड़क, रेल और हवाई संपर्क से जुड़ा होगा। भविष्य में यह देश का एकमात्र ऐसा कार्गो हब बनेगा जो रेलवे नेटवर्क से सीधे जुड़ा होगा।
अधिकारियों के अनुसार, अगले छह महीनों में अंतरराष्ट्रीय कार्गो उड़ानें भी शुरू होने की संभावना है। एयरपोर्ट के आसपास 10 मिनट की दूरी के भीतर इलेक्ट्रॉनिक सिटी, एमएसएमई पार्क, हैंडीक्राफ्ट पार्क, टॉय पार्क, अपैरल क्लस्टर, मेडिकल और सेमीकंडक्टर पार्क विकसित किए जा रहे हैं।
करीब ₹39,000 करोड़ के निवेश वाली इस परियोजना के पहले चरण में एक रनवे संचालित हो रहा है, जबकि दूसरा रनवे निर्माणाधीन है। भविष्य में यहाँ पाँच रनवे विकसित किए जाएँगे और एयरपोर्ट की क्षमता 22.5 करोड़ यात्री प्रतिवर्ष तक पहुँच जाएगी। प्रारंभिक चरण में इसकी क्षमता 7 करोड़ यात्री प्रतिवर्ष की होगी।
आर्थिक प्रभाव और ओडीओपी योजना
विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) योजना के तहत खुर्जा की पॉटरी, अलीगढ़ के ताले, नोएडा के टेक्सटाइल और अन्य उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में पहचान दिलाने में यह हब सहायक होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार निर्यात और औद्योगिक विस्तार को प्राथमिकता दे रही है। लॉजिस्टिक समय और लागत में कमी आने से फार्मा, कृषि और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों के निर्यातकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय कार्गो उड़ानों की शुरुआत इस हब की क्षमता को और विस्तार देगी।