नोएडा: रिटायर्ड वायु सैनिक से ₹2.23 करोड़ की साइबर ठगी, फर्जी ट्रेडिंग ऐप और व्हाट्सएप से बिछाया जाल
सारांश
मुख्य बातें
नोएडा के सेक्टर-21 निवासी 73 वर्षीय सेवानिवृत्त वायु सैनिक सुनील कुमार आनंद को शेयर बाज़ार में तीन गुना मुनाफे का झांसा देकर साइबर ठगों ने ₹2 करोड़ 23 लाख की चपत लगाई है। 30 जुलाई को पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना पुलिस, नोएडा ने एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। यह मामला उस बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करता है जिसमें साइबर अपराधी सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों और वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बना रहे हैं।
कैसे बिछाया गया जाल
जाँच में सामने आया है कि ठगों ने सुनियोजित तरीके से व्हाट्सएप ग्रुप के ज़रिए सुनील कुमार आनंद को पहले अपने नेटवर्क में जोड़ा। इस ग्रुप में शेयर बाज़ार में निवेश कर कम समय में कई गुना मुनाफा कमाने के दावे किए जा रहे थे। कथित सफलता की कहानियाँ और लगातार आने वाले संदेशों के ज़रिए पीड़ित का विश्वास जीता गया।
इसके बाद जालसाज़ों ने उनके मोबाइल फोन में 'यूपी एस्प्रेसो ट्रेडिंग' नामक एक फर्जी ट्रेडिंग एप्लीकेशन इंस्टॉल कराई और इसी के माध्यम से निवेश करने के लिए प्रेरित किया। ऐप में लगातार बढ़ता मुनाफा दिखाया जाता रहा, जिससे पीड़ित को भरोसा हो गया कि उनका निवेश सुरक्षित है।
36 दिनों में ₹2.23 करोड़ ट्रांसफर
ठगों के निर्देश पर सुनील कुमार आनंद ने 36 दिनों के दौरान अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹2 करोड़ 23 लाख ट्रांसफर कर दिए। जब उन्होंने अपनी रकम और कथित मुनाफा निकालने की कोशिश की, तो जालसाज़ों ने विभिन्न शुल्क, टैक्स और प्रोसेसिंग फीस का हवाला देते हुए पहले ₹62 लाख और जमा करा लिए। इसके बाद भी रकम जारी नहीं की गई और अतिरिक्त ₹37 लाख की माँग की गई।
बार-बार पैसे माँगे जाने पर पीड़ित को संदेह हुआ। उन्होंने ठगों द्वारा दिए गए मुंबई के पते पर जाकर जाँच की, जहाँ पता चला कि वह पता सर्वथा फर्जी है। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।
पुलिस की जाँच और डिजिटल साक्ष्य
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बाद संबंधित बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी ट्रेडिंग एप्लीकेशन की जाँच शुरू कर दी है। ट्रांजैक्शन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को भी खंगाला जा रहा है, ताकि आरोपियों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जा सके।
पुलिस की जनता से अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप या किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई भी ट्रेडिंग या निवेश एप्लीकेशन डाउनलोड न करें। अधिक मुनाफे के लालच में बिना सत्यापन के किसी भी खाते में धनराशि ट्रांसफर न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम साइबर क्राइम थाने से संपर्क करें।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश भर में फर्जी ट्रेडिंग ऐप के ज़रिए साइबर ठगी की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। जाँच एजेंसियाँ आरोपियों की पहचान के लिए डिजिटल फुटप्रिंट खंगाल रही हैं।