30 जुलाई 2026
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नोएडा: रिटायर्ड वायु सैनिक से ₹2.23 करोड़ की साइबर ठगी, फर्जी ट्रेडिंग ऐप और व्हाट्सएप से बिछाया जाल

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नोएडा: रिटायर्ड वायु सैनिक से ₹2.23 करोड़ की साइबर ठगी, फर्जी ट्रेडिंग ऐप और व्हाट्सएप से बिछाया जाल

सारांश

नोएडा में साइबर ठगों ने 73 वर्षीय रिटायर्ड वायु सैनिक को व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी 'यूपी एस्प्रेसो ट्रेडिंग' ऐप के ज़रिए 36 दिनों में ₹2.23 करोड़ का चूना लगाया। तीन गुना मुनाफे का लालच, फर्जी मुंबई पता — और जब तक शक हुआ, रकम जा चुकी थी।

मुख्य बातें

73 वर्षीय सेवानिवृत्त वायु सैनिक सुनील कुमार आनंद , निवासी सेक्टर-21, नोएडा , से ₹2 करोड़ 23 लाख की साइबर ठगी।
ठगों ने व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी 'यूपी एस्प्रेसो ट्रेडिंग' ऐप के ज़रिए जाल बिछाया।
पीड़ित ने 36 दिनों में अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की; बाद में ₹62 लाख अतिरिक्त वसूले गए।
ठगों का दिया मुंबई का पता फर्जी निकला, जिसके बाद पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ।
साइबर क्राइम थाना पुलिस, नोएडा ने 30 जुलाई को FIR दर्ज कर डिजिटल साक्ष्यों की जाँच शुरू की।
पुलिस ने नागरिकों को साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संदिग्ध गतिविधि की सूचना देने की अपील की।

नोएडा के सेक्टर-21 निवासी 73 वर्षीय सेवानिवृत्त वायु सैनिक सुनील कुमार आनंद को शेयर बाज़ार में तीन गुना मुनाफे का झांसा देकर साइबर ठगों ने ₹2 करोड़ 23 लाख की चपत लगाई है। 30 जुलाई को पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम थाना पुलिस, नोएडा ने एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। यह मामला उस बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करता है जिसमें साइबर अपराधी सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों और वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बना रहे हैं।

कैसे बिछाया गया जाल

जाँच में सामने आया है कि ठगों ने सुनियोजित तरीके से व्हाट्सएप ग्रुप के ज़रिए सुनील कुमार आनंद को पहले अपने नेटवर्क में जोड़ा। इस ग्रुप में शेयर बाज़ार में निवेश कर कम समय में कई गुना मुनाफा कमाने के दावे किए जा रहे थे। कथित सफलता की कहानियाँ और लगातार आने वाले संदेशों के ज़रिए पीड़ित का विश्वास जीता गया।

इसके बाद जालसाज़ों ने उनके मोबाइल फोन में 'यूपी एस्प्रेसो ट्रेडिंग' नामक एक फर्जी ट्रेडिंग एप्लीकेशन इंस्टॉल कराई और इसी के माध्यम से निवेश करने के लिए प्रेरित किया। ऐप में लगातार बढ़ता मुनाफा दिखाया जाता रहा, जिससे पीड़ित को भरोसा हो गया कि उनका निवेश सुरक्षित है।

36 दिनों में ₹2.23 करोड़ ट्रांसफर

ठगों के निर्देश पर सुनील कुमार आनंद ने 36 दिनों के दौरान अलग-अलग बैंक खातों में कुल ₹2 करोड़ 23 लाख ट्रांसफर कर दिए। जब उन्होंने अपनी रकम और कथित मुनाफा निकालने की कोशिश की, तो जालसाज़ों ने विभिन्न शुल्क, टैक्स और प्रोसेसिंग फीस का हवाला देते हुए पहले ₹62 लाख और जमा करा लिए। इसके बाद भी रकम जारी नहीं की गई और अतिरिक्त ₹37 लाख की माँग की गई।

बार-बार पैसे माँगे जाने पर पीड़ित को संदेह हुआ। उन्होंने ठगों द्वारा दिए गए मुंबई के पते पर जाकर जाँच की, जहाँ पता चला कि वह पता सर्वथा फर्जी है। इसके बाद उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।

पुलिस की जाँच और डिजिटल साक्ष्य

साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बाद संबंधित बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी ट्रेडिंग एप्लीकेशन की जाँच शुरू कर दी है। ट्रांजैक्शन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को भी खंगाला जा रहा है, ताकि आरोपियों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जा सके।

पुलिस की जनता से अपील

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप या किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई भी ट्रेडिंग या निवेश एप्लीकेशन डाउनलोड न करें। अधिक मुनाफे के लालच में बिना सत्यापन के किसी भी खाते में धनराशि ट्रांसफर न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम साइबर क्राइम थाने से संपर्क करें।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश भर में फर्जी ट्रेडिंग ऐप के ज़रिए साइबर ठगी की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। जाँच एजेंसियाँ आरोपियों की पहचान के लिए डिजिटल फुटप्रिंट खंगाल रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि उनके पास जीवनभर की बचत होती है और डिजिटल साक्षरता अपेक्षाकृत कम। फर्जी ट्रेडिंग ऐप का मॉडल — जिसमें पहले मुनाफा दिखाओ, फिर 'टैक्स' और 'फीस' के नाम पर और रकम वसूलो — देश के दर्जनों शहरों में एक ही स्क्रिप्ट से चल रहा है। सवाल यह है कि 'यूपी एस्प्रेसो ट्रेडिंग' जैसे ऐप गूगल प्ले या एपीके के ज़रिए कितनी आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं, और नियामक तंत्र इन्हें रोकने में कहाँ चूक रहा है। साइबर हेल्पलाइन 1930 की अपील काफी नहीं — ज़रूरत है कि बैंक संदिग्ध ट्रांजैक्शन पैटर्न पर रियल-टाइम अलर्ट दें।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा में रिटायर्ड वायु सैनिक के साथ साइबर ठगी कैसे हुई?
साइबर ठगों ने 73 वर्षीय सुनील कुमार आनंद को एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़कर शेयर बाज़ार में तीन गुना मुनाफे का लालच दिया और फिर उनके फोन में 'यूपी एस्प्रेसो ट्रेडिंग' नामक फर्जी ऐप इंस्टॉल कराई। 36 दिनों में पीड़ित ने ₹2 करोड़ 23 लाख अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।
फर्जी ट्रेडिंग ऐप घोटाले में ठग किस तरकीब से पैसे वसूलते हैं?
ठग पहले ऐप में बढ़ता हुआ नकली मुनाफा दिखाते हैं ताकि पीड़ित का भरोसा बने। जब पीड़ित रकम निकालने की कोशिश करता है, तो टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क के नाम पर और पैसे माँगे जाते हैं — इस मामले में पहले ₹62 लाख, फिर ₹37 लाख की अतिरिक्त माँग की गई।
साइबर ठगी का शिकार होने पर क्या करें?
तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या निकटतम साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराएँ। जितनी जल्दी शिकायत होगी, संबंधित बैंक खातों को फ्रीज़ कर रकम वापसी की संभावना उतनी अधिक होगी।
नोएडा साइबर ठगी मामले में पुलिस क्या कर रही है?
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने 30 जुलाई को FIR दर्ज कर संबंधित बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप ग्रुप और फर्जी ट्रेडिंग ऐप की जाँच शुरू की है। ट्रांजैक्शन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है ताकि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जा सके।
साइबर निवेश घोटाले से कैसे बचें?
किसी भी व्हाट्सएप ग्रुप या अनजान व्यक्ति के कहने पर ट्रेडिंग ऐप डाउनलोड न करें और बिना सत्यापन के किसी भी खाते में पैसे ट्रांसफर न करें। SEBI-पंजीकृत प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करें और असाधारण मुनाफे के दावों को हमेशा संदेह की नज़र से देखें।
राष्ट्र प्रेस
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