18 अगस्त 2026
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लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने पुंछ की अग्रिम चौकियों का दौरा किया, ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा

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लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने पुंछ की अग्रिम चौकियों का दौरा किया, ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा

सारांश

नॉर्दर्न कमांड प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने पुंछ की अग्रिम चौकियों का दौरा कर सुरक्षा हालात की समीक्षा की। उन्होंने जवानों से संवाद किया और सतर्कता, आपसी तालमेल व नवीन रणनीतियों पर जोर दिया — यह दौरा जम्मू-कश्मीर में बढ़ती सुरक्षा चौकसी का संकेत है।

मुख्य बातें

लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने 17 अगस्त को पुंछ की अग्रिम चौकियों का दौरा किया।
उन्हें मौजूदा सुरक्षा हालात, ऑपरेशनल तैयारी और ऊबड़-खाबड़ इलाकों में तैनाती की चुनौतियों पर ब्रीफिंग दी गई।
आर्मी कमांडर ने सतर्कता, सिनर्जी और नवीन रणनीतियाँ अपनाने पर बल दिया।
नॉर्दर्न कमांड के अंतर्गत 14 कोर (लेह) , 15 कोर (श्रीनगर) और 16 कोर (नगरोटा) कार्यरत हैं।
राष्ट्रीय राइफल्स (RR) AFSPA 1990 के तहत जम्मू-कश्मीर में आंतरिक सुरक्षा संभालती है।

नॉर्दर्न कमांड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने सोमवार, 17 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में अग्रिम सैन्य ठिकानों का दौरा किया और वहाँ की ऑपरेशनल तैयारियों की व्यापक समीक्षा की। उधमपुर स्थित नॉर्दर्न कमांड मुख्यालय के इस शीर्ष अधिकारी का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की चौकसी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

दौरे का विवरण और ब्रीफिंग

नॉर्दर्न कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक पोस्ट में बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा को दौरे के दौरान 'मौजूदा सुरक्षा हालात, ऑपरेशनल तैयारी और ऊबड़-खाबड़ इलाकों में तैनाती की चुनौतियों' के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने अग्रिम इलाकों में तैनात जवानों से सीधे संवाद किया और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों तथा विषम मौसम के बावजूद मिशन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की।

आर्मी कमांडर के निर्देश

आर्मी कमांडर ने इस अवसर पर तीन प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया — सतर्कता बनाए रखना, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल (सिनर्जी) को मजबूत करना, और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए नवीन रणनीतियाँ अपनाना। यह निर्देश क्षेत्र में बदलती सुरक्षा स्थिति के मद्देनज़र महत्त्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

नॉर्दर्न कमांड की भूमिका और जिम्मेदारियाँ

भारतीय सेना की नॉर्दर्न कमांड देश की उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा की केंद्रीय जिम्मेदारी निभाती है। इसके अंतर्गत पाकिस्तान के साथ लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) और चीन के साथ लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर ऑपरेशनल तैनाती शामिल है। कमांड की घुसपैठ-रोधी जिम्मेदारियों में सीमा पार से आतंकवादियों की घुसपैठ की कोशिशों को विफल करना और जम्मू-कश्मीर के भीतर उग्रवाद-विरोधी अभियान चलाना शामिल है। सियाचिन ग्लेशियर जैसे अत्यंत दुर्गम इलाकों में भी यह कमांड वर्षभर ऑपरेशनल तैयारी और लॉजिस्टिक्स बनाए रखती है।

कमांड की प्रमुख टुकड़ियाँ

नॉर्दर्न कमांड के अंतर्गत तीन प्रमुख कोर कार्यरत हैं। लेह स्थित 14 कोर (फायर एंड फ्यूरी कोर) लद्दाख और चीन के साथ LAC की निगरानी करती है। श्रीनगर स्थित 15 कोर (चिनार कोर) कश्मीर घाटी में आतंकवाद-विरोधी अभियानों के लिए जिम्मेदार है। नगरोटा स्थित 16 कोर (व्हाइट नाइट कोर) पीर पंजाल रेंज तक जम्मू क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय राइफल्स (RR) की टुकड़ियाँ भी इस कमांड का हिस्सा हैं। 1990 में जम्मू-कश्मीर में आंतरिक सुरक्षा के लिए गठित यह विशेष बल आर्म्ड फोर्सेज (जम्मू एंड कश्मीर) स्पेशल पावर्स एक्ट, 1990 (AFSPA) के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखती है।

आगे भी इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों की सतर्कता और परिचालन क्षमता को और सुदृढ़ किए जाने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिनमें सैनिक हताहत भी हुए। 'सिनर्जी' और 'नवीन रणनीतियों' पर दिया गया जोर यह दर्शाता है कि सेना पारंपरिक तरीकों की सीमाओं को स्वीकार कर रही है। असली सवाल यह है कि क्या यह दौरा महज़ मनोबल-वर्धन है या क्षेत्र में किसी ठोस रणनीतिक बदलाव की पूर्वपीठिका।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने पुंछ का दौरा क्यों किया?
लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने पुंछ की अग्रिम चौकियों पर ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा करने और जवानों का मनोबल बढ़ाने के लिए यह दौरा किया। उन्हें मौजूदा सुरक्षा हालात और तैनाती की चुनौतियों पर विस्तृत ब्रीफिंग दी गई।
नॉर्दर्न कमांड की मुख्य जिम्मेदारियाँ क्या हैं?
नॉर्दर्न कमांड भारत की उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा करती है — इसमें पाकिस्तान के साथ LoC और चीन के साथ LAC पर तैनाती, घुसपैठ रोकना और जम्मू-कश्मीर में उग्रवाद-विरोधी अभियान शामिल हैं। सियाचिन ग्लेशियर जैसे दुर्गम इलाकों में भी यह वर्षभर ऑपरेशनल तैयारी बनाए रखती है।
नॉर्दर्न कमांड के अंतर्गत कौन-कौन सी कोर आती हैं?
नॉर्दर्न कमांड के अंतर्गत तीन प्रमुख कोर हैं — लेह स्थित 14 कोर (फायर एंड फ्यूरी कोर) जो LAC की निगरानी करती है, श्रीनगर स्थित 15 कोर (चिनार कोर) जो कश्मीर घाटी में आतंकवाद-विरोधी अभियान चलाती है, और नगरोटा स्थित 16 कोर (व्हाइट नाइट कोर) जो जम्मू क्षेत्र की सुरक्षा करती है।
राष्ट्रीय राइफल्स (RR) क्या है और इसकी भूमिका क्या है?
राष्ट्रीय राइफल्स 1990 में जम्मू-कश्मीर में आंतरिक सुरक्षा के लिए गठित भारत का विशेष आतंकवाद-विरोधी बल है। यह AFSPA 1990 के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए सेना से डेपुटेशन पर आए जवानों के साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखता है।
पुंछ क्षेत्र सुरक्षा के नजरिए से क्यों महत्त्वपूर्ण है?
पुंछ जम्मू-कश्मीर का एक संवेदनशील सीमावर्ती जिला है जो LoC के नजदीक स्थित है। यह क्षेत्र पाकिस्तान से होने वाली घुसपैठ के प्रमुख मार्गों में से एक रहा है और यहाँ की ऊबड़-खाबड़ भौगोलिक स्थिति सुरक्षा तैनाती को विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण बनाती है।
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