लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने पुंछ की अग्रिम चौकियों का दौरा किया, ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा
सारांश
मुख्य बातें
नॉर्दर्न कमांड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने सोमवार, 17 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में अग्रिम सैन्य ठिकानों का दौरा किया और वहाँ की ऑपरेशनल तैयारियों की व्यापक समीक्षा की। उधमपुर स्थित नॉर्दर्न कमांड मुख्यालय के इस शीर्ष अधिकारी का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों की चौकसी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
दौरे का विवरण और ब्रीफिंग
नॉर्दर्न कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक पोस्ट में बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल शर्मा को दौरे के दौरान 'मौजूदा सुरक्षा हालात, ऑपरेशनल तैयारी और ऊबड़-खाबड़ इलाकों में तैनाती की चुनौतियों' के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने अग्रिम इलाकों में तैनात जवानों से सीधे संवाद किया और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों तथा विषम मौसम के बावजूद मिशन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की।
आर्मी कमांडर के निर्देश
आर्मी कमांडर ने इस अवसर पर तीन प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया — सतर्कता बनाए रखना, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल (सिनर्जी) को मजबूत करना, और उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए नवीन रणनीतियाँ अपनाना। यह निर्देश क्षेत्र में बदलती सुरक्षा स्थिति के मद्देनज़र महत्त्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
नॉर्दर्न कमांड की भूमिका और जिम्मेदारियाँ
भारतीय सेना की नॉर्दर्न कमांड देश की उत्तरी सीमाओं की सुरक्षा की केंद्रीय जिम्मेदारी निभाती है। इसके अंतर्गत पाकिस्तान के साथ लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) और चीन के साथ लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर ऑपरेशनल तैनाती शामिल है। कमांड की घुसपैठ-रोधी जिम्मेदारियों में सीमा पार से आतंकवादियों की घुसपैठ की कोशिशों को विफल करना और जम्मू-कश्मीर के भीतर उग्रवाद-विरोधी अभियान चलाना शामिल है। सियाचिन ग्लेशियर जैसे अत्यंत दुर्गम इलाकों में भी यह कमांड वर्षभर ऑपरेशनल तैयारी और लॉजिस्टिक्स बनाए रखती है।
कमांड की प्रमुख टुकड़ियाँ
नॉर्दर्न कमांड के अंतर्गत तीन प्रमुख कोर कार्यरत हैं। लेह स्थित 14 कोर (फायर एंड फ्यूरी कोर) लद्दाख और चीन के साथ LAC की निगरानी करती है। श्रीनगर स्थित 15 कोर (चिनार कोर) कश्मीर घाटी में आतंकवाद-विरोधी अभियानों के लिए जिम्मेदार है। नगरोटा स्थित 16 कोर (व्हाइट नाइट कोर) पीर पंजाल रेंज तक जम्मू क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय राइफल्स (RR) की टुकड़ियाँ भी इस कमांड का हिस्सा हैं। 1990 में जम्मू-कश्मीर में आंतरिक सुरक्षा के लिए गठित यह विशेष बल आर्म्ड फोर्सेज (जम्मू एंड कश्मीर) स्पेशल पावर्स एक्ट, 1990 (AFSPA) के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखती है।
आगे भी इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों की सतर्कता और परिचालन क्षमता को और सुदृढ़ किए जाने की उम्मीद है।