पुरी रथ यात्रा में 2 श्रद्धालुओं की मौत, ओडिशा CM माझी ने परिजनों को ₹10-10 लाख देने का ऐलान किया
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 20 जुलाई को पुरी रथ यात्रा के दौरान 16 जुलाई को जान गंवाने वाले दो श्रद्धालुओं के परिजनों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष (CMRF) से ₹10-10 लाख की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। मृतकों की पहचान कटक के अनिल दास और मुंबई के अशोक सुबारे रायकर के रूप में हुई है।
मुख्यमंत्री की घोषणा और शोक संवेदना
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के आधिकारिक एक्स हैंडल पर की गई पोस्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री माझी ने दोनों श्रद्धालुओं के असामयिक निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। दोनों श्रद्धालु 16 जुलाई को पुरी में रथ यात्रा के दौरान अचानक बीमार पड़ गए थे और अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
मौतों की परिस्थितियाँ — सरकारी पक्ष
राज्य सरकार ने दोनों मौतों की पुष्टि की, किंतु किसी भी भगदड़ की घटना से इनकार किया। सरकारी बयान के अनुसार, त्योहार के दौरान सात श्रद्धालु अस्वस्थ हुए, जिन्हें तैनात कर्मियों ने तत्काल अस्पताल पहुँचाया। इनमें से 60 वर्ष से अधिक आयु के एक पुरुष श्रद्धालु की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। एक अलग घटना में 35 वर्ष से अधिक आयु के एक अन्य श्रद्धालु को हृदयाघात हुआ और तत्काल चिकित्सा सहायता के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। लगातार बारिश के कारण बीमार पड़े अन्य श्रद्धालुओं को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
विपक्ष के आरोप और भगदड़ का दावा
मुख्य विपक्षी दल बीजू जनता दल (BJD) ने सरकारी बयान को चुनौती देते हुए दावा किया कि 16 जुलाई को पुरी के ग्रैंड रोड (बड़ा डंडा) पर मरीचिकोटे चौक के पास भगदड़ की घटना हुई, जिसमें गंभीर रूप से घायल चार श्रद्धालुओं को पुरी जिला मुख्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया था। BJD ने यह भी आरोप लगाया कि पुरी के मुख्य जिला चिकित्सा अधिकारी (CDMO) ने उनमें से तीन को मृत घोषित किया और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से कथित तौर पर यह संकेत मिलता है कि उनकी मृत्यु भगदड़ के कारण हुई। विपक्षी नेताओं ने राज्य सरकार पर भीड़ प्रबंधन में गंभीर लापरवाही का आरोप भी लगाया है।
आम जनता और श्रद्धालुओं पर असर
यह घटना ऐसे समय में आई है जब पुरी रथ यात्रा देश की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक है और लाखों श्रद्धालु हर वर्ष इसमें भाग लेते हैं। भगदड़ के आरोपों और सरकार के खंडन के बीच भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतकों के परिजनों को ₹10-10 लाख की सहायता राशि से तात्कालिक आर्थिक सहारा मिलेगा, लेकिन मौतों की वास्तविक परिस्थितियों की स्वतंत्र जाँच की माँग अभी भी बनी हुई है।
आगे क्या होगा
BJD के आरोपों और सरकार के खंडन के बीच यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है। विपक्ष की माँग है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और भगदड़ की घटना की स्वतंत्र जाँच कराई जाए। अनुग्रह राशि वितरण की प्रक्रिया और मृत्यु के कारणों पर अंतिम स्पष्टता आने वाले दिनों में अपेक्षित है।