ओम बिरला का सांसदों से आह्वान: असहमति को लोकतंत्र की ताकत मानें, संविधान है भारत की आत्मा
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 2 नवंबर 2026 को पंचकूला में आयोजित हरियाणा विधानसभा के 'जनप्रतिनिधि सम्मेलन' के उद्घाटन सत्र में कहा कि एक स्वस्थ और जीवंत लोकतंत्र में सहमति और असहमति एक ही सिक्के के दो पहलू होते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि असहमति को कमज़ोरी नहीं, बल्कि शासन को बेहतर बनाने वाली ताकत के रूप में देखा जाना चाहिए।
असहमति: लोकतंत्र का उत्प्रेरक
बिरला ने कहा कि असहमति नए दृष्टिकोण लाने, प्रशासनिक खामियों को उजागर करने और बेहतर नीति-निर्माण को प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने जन प्रतिनिधियों से अपील की कि राजनीतिक, दलीय या वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता राज्य और राष्ट्र की निरंतर प्रगति होनी चाहिए।
संविधान: भारत की राष्ट्रीय चेतना का प्रतिबिंब
अध्यक्ष ने भारत के संवैधानिक ढाँचे की गहरी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा, 'हमारा संविधान केवल सरकार चलाने का ढाँचा नहीं है; यह भारत की आत्मा है, जो हमारी राष्ट्रीय चेतना और करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करती है।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत की विविधतापूर्ण संघीय शासन प्रणाली का वैश्विक स्तर पर टिके रहना, इसकी लोकतांत्रिक दृढ़ता का प्रमाण है।
बिरला ने संविधान सभा की समावेशी प्रकृति की सराहना करते हुए कहा कि मसौदा समिति के अध्यक्ष बाबासाहेब डॉ. बी. आर. अंबेडकर के मार्गदर्शन में और हरियाणा व पंजाब सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित नेताओं की भागीदारी से, भाषाई, सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता के बीच एक एकजुट संसदीय लोकतंत्र की नींव रखी गई।
हरियाणा की विकास-यात्रा को सराहा
हरियाणा विधानसभा के वर्तमान और पूर्व सदस्यों तथा पूर्व मंत्रियों को संबोधित करते हुए बिरला ने हरियाणा के छह दशकों की सामाजिक-आर्थिक यात्रा की सराहना की। उन्होंने कहा कि अनेक ऐतिहासिक और प्रशासनिक चुनौतियों के बावजूद हरियाणा राष्ट्रीय प्रगति में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है।
लोकसभा अध्यक्ष ने देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा की रक्षा में अनुकरणीय शौर्य प्रदर्शित करने वाले हरियाणा के युवा सैनिकों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। साथ ही, वैश्विक खेल मंचों पर भारत की प्रतिष्ठा को ऊँचा उठाने वाले हरियाणा के खिलाड़ियों की उपलब्धियों को भी सराहा।
जनप्रतिनिधि सम्मेलन का महत्व
यह सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ है जब देशभर में संसदीय व्यवहार और विधायी उत्पादकता पर बहस तेज़ है। गौरतलब है कि हाल के संसद सत्रों में व्यवधान और शोरगुल की बढ़ती घटनाओं के बीच बिरला का यह संदेश जन प्रतिनिधियों के लिए एक महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सम्मेलन विधायकों में संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक होते हैं।
आने वाले समय में इस सम्मेलन के अन्य सत्रों में विधायी प्रक्रियाओं, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और शासन-सुधार पर विस्तृत चर्चा अपेक्षित है।