ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में दान प्रबंधन पारदर्शी, प्रतिदिन ₹15-20 लाख की आमदनी: पुजारी
सारांश
मुख्य बातें
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के पुजारियों ने 23 जून को दावा किया कि मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित इस प्रतिष्ठित मंदिर में दान का संपूर्ण प्रबंधन पूरी तरह पारदर्शी है। पुजारियों के अनुसार, सीसीटीवी कैमरों की सतत निगरानी में और मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों की उपस्थिति में दान की गिनती की जाती है, तथा नियमित ऑडिट के ज़रिए पूरी प्रक्रिया की जाँच होती है।
दान प्रबंधन की व्यवस्था
मंदिर के पुजारी पंडित नीलेश दुबे ने बताया कि दान दो माध्यमों — ऑनलाइन और ऑफलाइन — से प्राप्त होता है। उन्होंने कहा, 'ओंकारेश्वर मंदिर में अब तक दान चोरी की कोई घटना नहीं हुई है। दान पेटी सबके सामने खुली होती है और ऑनलाइन दान सीधे बैंक खाते में जमा होता है।' ऑफलाइन दान की रसीद ट्रस्ट के पास और एक प्रति भक्त को दी जाती है। मंदिर परिसर के विभिन्न हिस्सों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं, जिन्हें स्कैन कर भक्त ऑनलाइन दान जमा कर सकते हैं।
प्रतिदिन ₹15-20 लाख की आमदनी
पंडित नीलेश दुबे के अनुसार, मंदिर को प्रतिदिन ₹15 से ₹20 लाख की आमदनी होती है, जिसमें से ₹12 से ₹15 लाख ऑनलाइन दान के रूप में प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी राशि में अधिकांश हिस्सा ऑनलाइन होने से किसी भी प्रकार के घोटाले की गुंजाइश बहुत कम है। दान की गिनती के बाद राशि सीधे बैंक में जमा कर दी जाती है।
मंदिर ट्रस्ट का व्यय कहाँ होता है
पुजारियों ने बताया कि मंदिर ट्रस्ट का धन मुख्यतः सामाजिक कार्यों में उपयोग किया जाता है — जिसमें कर्मचारियों का वेतन, बिजली बिल, प्रसादालय में भक्तों को भोजन, गरीबों के इलाज और नगर के अन्य सामाजिक कार्य शामिल हैं। यह व्यवस्था मंदिर की सामाजिक भूमिका को रेखांकित करती है।
राम मंदिर दान विवाद पर प्रतिक्रिया
हाल ही में चर्चा में आए राम मंदिर दान विवाद के संदर्भ में पंडित नीलेश दुबे ने कहा कि वह घटना 'बहुत दुखद और शर्मनाक' है और इस तरह की घटनाएँ कहीं भी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एसआईटी रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देशभर के मंदिरों में दान प्रबंधन की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
आगे की दिशा
गौरतलब है कि ओंकारेश्वर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहाँ वार्षिक लाखों श्रद्धालु आते हैं। मंदिर प्रशासन का कहना है कि वर्तमान डिजिटल और सीसीटीवी-आधारित व्यवस्था भविष्य में और अधिक मज़बूत की जाएगी, ताकि भक्तों का विश्वास बना रहे।