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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में दान प्रबंधन पारदर्शी, प्रतिदिन ₹15-20 लाख की आमदनी: पुजारी

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ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में दान प्रबंधन पारदर्शी, प्रतिदिन ₹15-20 लाख की आमदनी: पुजारी

सारांश

देशभर में मंदिर दान विवादों के बीच ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के पुजारियों ने पारदर्शिता का दावा किया। प्रतिदिन ₹15-20 लाख की आमदनी में से अधिकांश ऑनलाइन — सीसीटीवी निगरानी, ऑडिट और सीधे बैंक जमा से घोटाले की गुंजाइश कम बताई जा रही है।

मुख्य बातें

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर को प्रतिदिन ₹15 से ₹20 लाख की दान आमदनी होती है।
इसमें से ₹12 से ₹15 लाख ऑनलाइन दान के रूप में सीधे बैंक खाते में जमा होते हैं।
सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और मंदिर ट्रस्ट अधिकारियों की उपस्थिति में दान की गिनती होती है।
मंदिर परिसर में क्यूआर कोड और दान पेटियाँ — दोनों माध्यमों से दान स्वीकार किया जाता है।
पुजारी पंडित नीलेश दुबे ने राम मंदिर दान विवाद को 'दुखद और शर्मनाक' बताया, एसआईटी रिपोर्ट का इंतज़ार कहा।

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के पुजारियों ने 23 जून को दावा किया कि मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित इस प्रतिष्ठित मंदिर में दान का संपूर्ण प्रबंधन पूरी तरह पारदर्शी है। पुजारियों के अनुसार, सीसीटीवी कैमरों की सतत निगरानी में और मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों की उपस्थिति में दान की गिनती की जाती है, तथा नियमित ऑडिट के ज़रिए पूरी प्रक्रिया की जाँच होती है।

दान प्रबंधन की व्यवस्था

मंदिर के पुजारी पंडित नीलेश दुबे ने बताया कि दान दो माध्यमों — ऑनलाइन और ऑफलाइन — से प्राप्त होता है। उन्होंने कहा, 'ओंकारेश्वर मंदिर में अब तक दान चोरी की कोई घटना नहीं हुई है। दान पेटी सबके सामने खुली होती है और ऑनलाइन दान सीधे बैंक खाते में जमा होता है।' ऑफलाइन दान की रसीद ट्रस्ट के पास और एक प्रति भक्त को दी जाती है। मंदिर परिसर के विभिन्न हिस्सों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं, जिन्हें स्कैन कर भक्त ऑनलाइन दान जमा कर सकते हैं।

प्रतिदिन ₹15-20 लाख की आमदनी

पंडित नीलेश दुबे के अनुसार, मंदिर को प्रतिदिन ₹15 से ₹20 लाख की आमदनी होती है, जिसमें से ₹12 से ₹15 लाख ऑनलाइन दान के रूप में प्राप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी राशि में अधिकांश हिस्सा ऑनलाइन होने से किसी भी प्रकार के घोटाले की गुंजाइश बहुत कम है। दान की गिनती के बाद राशि सीधे बैंक में जमा कर दी जाती है।

मंदिर ट्रस्ट का व्यय कहाँ होता है

पुजारियों ने बताया कि मंदिर ट्रस्ट का धन मुख्यतः सामाजिक कार्यों में उपयोग किया जाता है — जिसमें कर्मचारियों का वेतन, बिजली बिल, प्रसादालय में भक्तों को भोजन, गरीबों के इलाज और नगर के अन्य सामाजिक कार्य शामिल हैं। यह व्यवस्था मंदिर की सामाजिक भूमिका को रेखांकित करती है।

राम मंदिर दान विवाद पर प्रतिक्रिया

हाल ही में चर्चा में आए राम मंदिर दान विवाद के संदर्भ में पंडित नीलेश दुबे ने कहा कि वह घटना 'बहुत दुखद और शर्मनाक' है और इस तरह की घटनाएँ कहीं भी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एसआईटी रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब देशभर के मंदिरों में दान प्रबंधन की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

आगे की दिशा

गौरतलब है कि ओंकारेश्वर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहाँ वार्षिक लाखों श्रद्धालु आते हैं। मंदिर प्रशासन का कहना है कि वर्तमान डिजिटल और सीसीटीवी-आधारित व्यवस्था भविष्य में और अधिक मज़बूत की जाएगी, ताकि भक्तों का विश्वास बना रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इसे महज़ एक स्थानीय दावे से अधिक बनाता है — यह एक प्रतिक्रियात्मक पारदर्शिता-अभियान है। सीसीटीवी और ऑनलाइन दान जैसे तंत्र सराहनीय हैं, लेकिन स्वयं पुजारियों द्वारा पारदर्शिता का दावा करना और स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करना — दोनों अलग बातें हैं। जब तक ट्रस्ट के ऑडिट रिकॉर्ड और व्यय का विवरण सार्वजनिक डोमेन में नहीं आता, यह दावा केवल आश्वासन है, सत्यापन नहीं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओंकारेश्वर मंदिर में दान का प्रबंधन कैसे होता है?
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में दान ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से लिया जाता है। सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और ट्रस्ट अधिकारियों की उपस्थिति में दान की गिनती होती है, जिसके बाद राशि सीधे बैंक में जमा कर दी जाती है।
ओंकारेश्वर मंदिर को प्रतिदिन कितना दान मिलता है?
पुजारी पंडित नीलेश दुबे के अनुसार, मंदिर को प्रतिदिन ₹15 से ₹20 लाख की आमदनी होती है। इसमें से ₹12 से ₹15 लाख ऑनलाइन दान के रूप में सीधे बैंक खाते में आते हैं।
क्या ओंकारेश्वर मंदिर में दान चोरी या घोटाले की कोई घटना हुई है?
पुजारियों ने दावा किया है कि अब तक मंदिर में दान चोरी की कोई घटना नहीं हुई है। हालाँकि यह मंदिर प्रशासन का अपना बयान है; कोई स्वतंत्र सत्यापन रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
राम मंदिर दान विवाद पर ओंकारेश्वर के पुजारियों ने क्या कहा?
पंडित नीलेश दुबे ने राम मंदिर दान विवाद को 'बहुत दुखद और शर्मनाक' बताया और कहा कि इस तरह की घटनाएँ कहीं भी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने एसआईटी रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होने की बात कही।
ओंकारेश्वर मंदिर ट्रस्ट का पैसा किन कार्यों पर खर्च होता है?
मंदिर ट्रस्ट का धन मुख्यतः कर्मचारियों के वेतन, बिजली बिल, प्रसादालय में भक्तों को भोजन, गरीबों के इलाज और नगर के अन्य सामाजिक कार्यों पर खर्च किया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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