कर्नाटक: मुजराई मंदिरों की हुंडी के पास लगेंगे सीसीटीवी, सीएम शिवकुमार का बड़ा फैसला
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 9 जुलाई 2026 को घोषणा की कि राज्य सरकार मुजराई विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी मंदिरों में हुंडी (दान पेटी) के समक्ष सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से लगाएगी। यह फैसला राम मंदिर में चढ़ावा प्रबंधन में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद श्रद्धालुओं के दान की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री ने बेलगावी के सुवर्ण विधान सौधा में आयोजित बेलगावी डिवीजन प्रोग्रेस रिव्यू मीटिंग के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। शिवकुमार ने कहा, 'राम मंदिर से जुड़े मामलों में सामने आई अनियमितताओं ने श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाई है। लोगों ने आस्था के साथ दान दिया, लेकिन कथित तौर पर धर्म के नाम पर उस धन का गलत इस्तेमाल किया गया।'
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निगरानी व्यवस्था केवल हुंडी तक सीमित नहीं रहेगी — दान एकत्र करने, खोलने और गिनती करने के स्थानों पर भी कैमरे लगाए जाएंगे।
निगरानी ढाँचा और जवाबदेही
शिवकुमार ने बताया कि हुंडी, नकदी संग्रह और गिनती केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज को सीधे पुलिस अधीक्षक और उपायुक्त कार्यालयों से जोड़ा जाएगा। इससे मंदिर प्रशासन पर दोहरी निगरानी सुनिश्चित होगी — विभागीय और जिला प्रशासनिक, दोनों स्तरों पर।
गौरतलब है कि कर्नाटक में मुजराई विभाग राज्य सरकार के अधीन हिंदू धार्मिक संस्थाओं और धर्मार्थ बंदोबस्तों का प्रबंधन करता है, और इसके दायरे में बड़ी संख्या में मंदिर आते हैं।
गारंटी योजनाओं पर सीएजी रिपोर्ट और सरकार का रुख
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में कल्याणकारी योजनाओं के लाभ के कथित दुरुपयोग की बात सामने आने के बावजूद राज्य की प्रमुख गारंटी योजनाएं बंद नहीं होंगी। उन्होंने कहा, 'आरोप है कि सैकड़ों करोड़ रुपए मृत लोगों के नाम पर भी जारी किए गए।'
इससे निपटने के लिए सरकार गृह लक्ष्मी और गृह ज्योति योजनाओं के लाभार्थियों का दोबारा सत्यापन कर रही है। शिवकुमार ने जोर देकर कहा, 'यह सत्यापन केवल फर्जी लाभार्थियों को हटाने के लिए है और वास्तविक लाभार्थियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। सिद्दारमैया सरकार के दौरान मंजूर की गई किसी भी योजना को बंद नहीं किया जाएगा।'
मतदाता सूची और नागरिक अधिकार
विशेष गहन पुनरीक्षण के संदर्भ में शिवकुमार ने बताया कि सरकार ने योग्य नागरिकों के मतदान अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि जहाँ आवश्यकता होगी, वहाँ 10 वर्षों से निवासरत लोगों को निवास प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। इसके अलावा नागरिकों को 4.50 करोड़ जाति प्रमाण पत्र डाउनलोड करने की सुविधा भी दी गई है।
प्रत्येक मतदान केंद्र पर सहायता केंद्र स्थापित करने की भी घोषणा की गई, ताकि नागरिक आवश्यक प्रक्रियाएं आसानी से पूरी कर सकें।
आगे क्या
सीसीटीवी स्थापना की समयसीमा और लागत का ब्यौरा अभी सरकार की ओर से सार्वजनिक नहीं किया गया है। इस घोषणा के बाद राज्य में राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है, क्योंकि मंदिर प्रशासन और सरकारी नियंत्रण का मुद्दा कर्नाटक में संवेदनशील रहा है। आने वाले दिनों में मुजराई विभाग द्वारा क्रियान्वयन की विस्तृत रूपरेखा जारी किए जाने की उम्मीद है।