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केदारनाथ में 'ऑपरेशन कालनेमि': फर्जी बाबाओं पर शिकंजा, 15 को चालान; आधार-सत्यापन अनिवार्य

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केदारनाथ में 'ऑपरेशन कालनेमि': फर्जी बाबाओं पर शिकंजा, 15 को चालान; आधार-सत्यापन अनिवार्य

सारांश

केदारनाथ धाम में 'ऑपरेशन कालनेमि' का शिकंजा कसा — साधु वेश में ठगी करने वाले 15 फर्जी बाबाओं को चालान, बिना आधार या पुलिस सत्यापन वालों को गौरीकुंड वापस भेजा गया। चार धाम यात्रा के चरम सीजन में उत्तराखंड प्रशासन की यह कार्रवाई तीर्थयात्रियों की सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

उत्तराखंड पुलिस ने 19 जुलाई 2025 को ' ऑपरेशन कालनेमि ' के तहत केदारनाथ धाम में विशेष निरीक्षण चलाया।
बिना पुलिस सत्यापन या वैध आधार कार्ड के रह रहे 15 व्यक्तियों को चालान जारी किए गए।
वैध पहचान पत्र न होने पर संबंधितों को केदारनाथ से गौरीकुंड वापस भेजा गया।
' ऑपरेशन कालनेमि ' जुलाई 2025 में शुरू हुआ राज्यव्यापी अभियान है, जो हिंदू साधुओं का वेश धारण कर धोखाधड़ी करने वालों को लक्षित करता है।
पुलिस ने स्पष्ट किया कि चार धाम यात्रा के दौरान भविष्य में भी अचानक निरीक्षण जारी रहेंगे।

केदारनाथ धाम में उत्तराखंड पुलिस ने 19 जुलाई 2025 को 'ऑपरेशन कालनेमि' के तहत विशेष निरीक्षण अभियान चलाया, जिसमें बिना पुलिस सत्यापन या वैध पहचान दस्तावेजों के रह रहे 15 व्यक्तियों को चालान जारी किए गए। साधु-संत का वेश धारण कर श्रद्धालुओं को ठगने वाले फर्जी बाबाओं की पहचान कर उन्हें गौरीकुंड वापस भेजा गया।

अभियान की पृष्ठभूमि

'ऑपरेशन कालनेमि' उत्तराखंड राज्य सरकार द्वारा जुलाई 2025 में शुरू किया गया एक व्यापक राज्यव्यापी अभियान है। इसका मुख्य उद्देश्य हिंदू साधुओं का रूप धारण कर धोखाधड़ी करने, अवैध गतिविधियों में लिप्त होने और तीर्थयात्रियों का शोषण करने वाले व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करना है। गौरतलब है कि अप्रैल 2025 में खुले केदारनाथ धाम में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं, जिससे भीड़ और उसके साथ ठगी की आशंका दोनों बढ़ी हैं।

निरीक्षण में क्या मिला

केदारनाथ पुलिस चौकी ने यात्रा मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में धाम क्षेत्र में रह रहे साधुओं के पहचान पत्र और पुलिस सत्यापन दस्तावेजों की जाँच की। निरीक्षण में पाया गया कि कई व्यक्ति बिना पुलिस सत्यापन के वहाँ निवास कर रहे थे, जबकि कुछ के पास वैध आधार कार्ड भी नहीं था। सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर पुलिस अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की गई और कुल 15 लोगों को चालान जारी किए गए।

दंडात्मक कार्रवाई और वापसी

वैध पहचान पत्र न रखने वाले व्यक्तियों को तत्काल प्रभाव से केदारनाथ धाम से गौरीकुंड वापस भेज दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि चार धाम यात्रा के दौरान उचित सत्यापन और पहचान दस्तावेजों के बिना किसी भी व्यक्ति को धाम परिसर में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह कार्रवाई तीर्थयात्रा की पवित्रता और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है।

आगे की रणनीति

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में भी इस तरह के अचानक निरीक्षण अभियान जारी रहेंगे। राज्य प्रशासन और पुलिस का संयुक्त दल धाम क्षेत्र में निरंतर सतर्कता बनाए रखेगा। यह ऐसे समय में आया है जब चार धाम यात्रा अपने चरम पर है और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन व्यवस्थित कार्रवाई कम ही होती है। 15 चालान एक शुरुआत हैं, पर असली परीक्षा यह है कि क्या यह अभियान सीजन खत्म होने के बाद भी जारी रहता है या महज़ एक मौसमी कवायद बनकर रह जाता है। स्थायी सत्यापन तंत्र और डिजिटल रजिस्ट्री के बिना हर साल यही चक्र दोहराया जाता रहेगा।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'ऑपरेशन कालनेमि' क्या है?
'ऑपरेशन कालनेमि' उत्तराखंड राज्य सरकार द्वारा जुलाई 2025 में शुरू किया गया राज्यव्यापी अभियान है, जिसका उद्देश्य हिंदू साधुओं का रूप धारण कर तीर्थयात्रियों को ठगने और अवैध गतिविधियों में लिप्त व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करना है।
केदारनाथ में किन लोगों पर कार्रवाई की गई?
निरीक्षण में पाया गया कि कई व्यक्ति बिना पुलिस सत्यापन के और कुछ बिना वैध आधार कार्ड के केदारनाथ धाम में रह रहे थे। ऐसे 15 लोगों को पुलिस अधिनियम के तहत चालान जारी किए गए और वैध दस्तावेज़ न होने वालों को गौरीकुंड वापस भेज दिया गया।
क्या केदारनाथ में रहने के लिए पुलिस सत्यापन अनिवार्य है?
हाँ, पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि चार धाम यात्रा के दौरान उचित पुलिस सत्यापन और वैध पहचान दस्तावेजों के बिना किसी भी व्यक्ति को धाम परिसर में रहने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
क्या भविष्य में भी इस तरह की कार्रवाई होगी?
पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि केदारनाथ धाम में तीर्थयात्रा की पवित्रता और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने के लिए भविष्य में भी अचानक निरीक्षण अभियान जारी रहेंगे।
केदारनाथ धाम इस वर्ष कब खुला और कितनी भीड़ आ रही है?
केदारनाथ धाम अप्रैल 2025 में श्रद्धालुओं के लिए खोला गया। तब से प्रतिदिन हजारों तीर्थयात्री भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं, जिससे भारी भीड़ उमड़ रही है और सुरक्षा व्यवस्था की चुनौती भी बढ़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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