ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर गर्व: पूर्व डीजीपी संजीव कालरा बोले — पंजाब को हर पल सतर्क रहना होगा
सारांश
ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर पंजाब के पूर्व डीजीपी संजीव कालरा ने साफ कहा — यह सफलता सिर्फ सेना की नहीं, पूरे सिस्टम की एकजुटता की थी। लेकिन उनकी असली चेतावनी आगे के लिए है: ड्रोन युद्ध, मिसाइल खतरे और सीमावर्ती पंजाब की संवेदनशीलता — सतर्कता अब विकल्प नहीं, ज़रूरत है।
मुख्य बातें
पंजाब के पूर्व डीजीपी संजीव कालरा ने 7 मई 2026 को ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर देश की सुरक्षा तैयारियों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पहली बार बड़े स्तर पर ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल देखा गया, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को नई तैयारी के लिए मजबूर किया।
जालंधर और अमृतसर में हाल के धमाकों के संदर्भ में कालरा ने कहा कि पंजाब की भौगोलिक स्थिति इसे हमेशा संवेदनशील बनाती है।
कालरा ने फिरोजपुर में बिताए बचपन और 1971 के भारत-पाक युद्ध की व्यक्तिगत यादें साझा कीं।
उन्होंने आम नागरिकों से संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत प्रशासन को देने की अपील की।
पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) संजीव कालरा ने 7 मई 2026 को ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के अवसर पर देश की सुरक्षा तैयारियों, बदलती युद्ध तकनीकों और आम नागरिकों की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एक भारतीय होने के नाते उन्हें इस अभियान की सफलता पर गर्व है और यह देश की सामूहिक तैयारी, अंतर-एजेंसी समन्वय और जन-जागरूकता का परिणाम था।
ऑपरेशन सिंदूर: एकजुटता और तत्परता की मिसाल
पूर्व डीजीपी कालरा ने बताया कि उन्होंने स्वयं देखा कि किस प्रकार विभिन्न विभागों ने मिलकर इस अभियान में भूमिका निभाई। उनके अनुसार, अलग-अलग एजेंसियों और सुरक्षा बलों को पहले से सतर्क किया गया, तैयार किया गया और समन्वय के साथ काम किया गया। उन्होंने कहा,
संपादकीय दृष्टिकोण
लेकिन असली सवाल यह है कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता से मिले सबक को संस्थागत रूप कब और कैसे दिया जाएगा। जालंधर और अमृतसर के हालिया धमाके बताते हैं कि पंजाब में खतरा अभी टला नहीं है। ड्रोन तकनीक के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पारंपरिक सुरक्षा ढाँचा अब पर्याप्त नहीं — नागरिक जागरूकता को नीतिगत प्राथमिकता बनाना अब अनिवार्य है, न कि केवल एक अपील।
RashtraPress
10 मई 2026
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ऑपरेशन सिंदूर क्या था और इसकी पहली वर्षगांठ क्यों महत्वपूर्ण है?
ऑपरेशन सिंदूर भारत का एक महत्वपूर्ण सुरक्षा अभियान था जिसमें कई एजेंसियों और सुरक्षा बलों ने समन्वय के साथ भाग लिया। 7 मई 2026 को इसकी पहली वर्षगांठ पर वरिष्ठ सुरक्षा विशेषज्ञों ने इससे मिले सबक और भविष्य की तैयारियों पर चर्चा की।
पूर्व डीजीपी संजीव कालरा ने ड्रोन तकनीक को लेकर क्या कहा?
कालरा ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पहली बार बड़े स्तर पर ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल देखा गया, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को नई तरह की तैयारी के लिए मजबूर किया। उन्होंने चेताया कि भविष्य में लंबी दूरी की मिसाइलें और उन्नत हवाई प्रणालियाँ और बड़ी चुनौती बन सकती हैं।
जालंधर और अमृतसर के धमाकों पर कालरा की क्या प्रतिक्रिया थी?
कालरा ने कहा कि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है और इसकी भौगोलिक स्थिति इसे हमेशा संवेदनशील बनाती है। उन्होंने भरोसा जताया कि पंजाब पुलिस हर चुनौती का सामना पेशेवर तरीके से करती रहेगी।
आम नागरिकों की भूमिका को लेकर कालरा ने क्या कहा?
कालरा ने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल सेना या पुलिस नहीं लड़ती — आम नागरिकों की जागरूकता और सहयोग उतना ही ज़रूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत प्रशासन तक पहुँचाएँ।
संजीव कालरा का फिरोजपुर और 1971 के युद्ध से क्या संबंध है?
कालरा फिरोजपुर के रहने वाले हैं और उन्होंने बताया कि बचपन में 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान सायरनों की आवाज़ और सतर्कता के दृश्य उनकी स्मृतियों में आज भी ताज़ा हैं। इस अनुभव ने उनकी सुरक्षा के प्रति सोच को गहराई से प्रभावित किया है।