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नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू करने पर विपक्ष का हमला, 'परिसीमन की शर्त हटाओ'

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नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू करने पर विपक्ष का हमला, 'परिसीमन की शर्त हटाओ'

सारांश

नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू करने पर 'सक्रिय विचार' के सरकारी संकेत के बाद विपक्ष एकजुट हो गया है। सवाल एक है — परिसीमन की शर्त क्यों? विपक्ष का कहना है कि मौजूदा 543 सीटों पर अभी आरक्षण दिया जा सकता है, और यह पूरा ड्रामा चुनावी है।

मुख्य बातें

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू करने पर सक्रिय विचार हो रहा है।
विपक्ष ने माँग की कि आरक्षण मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर बिना परिसीमन की शर्त के लागू हो।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने PM मोदी को पत्र लिखकर संसद के विशेष सत्र की संभावना पर स्पष्टीकरण माँगा।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत और सांसद पप्पू यादव ने BJP पर 'चुनावी ड्रामा' का आरोप लगाया।
CPI नेता एनी राजा ने कहा कि जनगणना और परिसीमन की दोहरी शर्त आरक्षण को अनिश्चित काल के लिए टालने का ज़रिया है।

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के इस बयान के बाद कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने पर 'सक्रिय रूप से विचार' किया जा रहा है, विपक्षी दलों ने शुक्रवार, 28 अगस्त को केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया। विपक्ष ने इस कदम को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले का 'राजनीतिक ड्रामा' करार दिया और माँग की कि आरक्षण मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर ही लागू हो, जनगणना या परिसीमन की शर्त के बिना।

विवाद की पृष्ठभूमि

संविधान (106वाँ संशोधन) अधिनियम, 2023 — जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम कहा जाता है — 2023 में संसद से पारित हुआ था। उस समय सभी प्रमुख विपक्षी दलों ने इसका समर्थन किया था। हालाँकि, इस कानून में एक शर्त जोड़ी गई है कि महिला आरक्षण तभी लागू होगा जब जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो जाए। आलोचकों का कहना है कि यह शर्त आरक्षण को अनिश्चित काल के लिए टालने का रास्ता है।

यह विवाद उस समय और तेज हो गया जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर पूछा कि क्या सरकार प्रस्तावित परिसीमन विधेयक पारित करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की योजना बना रही है। खड़गे ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह माँग इसलिए दोहराई क्योंकि संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने एक टीवी साक्षात्कार में विशेष सत्र बुलाए जाने के संकेत दिए थे।

विपक्ष की मुख्य आपत्तियाँ

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'महिला आरक्षण विधेयक कब पारित हुआ था? 2023 में। आज जेनजी ऐसे झूठों के खिलाफ खड़ी हो गई है। अब महिलाएं भी सच्चाई समझ चुकी हैं। भाजपा झूठ के सहारे खड़ी है।' सावंत ने यह भी तर्क दिया कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देना चाहती है, तो वह मौजूदा 543 सीटों के आधार पर अभी दे सकती है।

पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि सरकार की सोच महिलाओं और गरीबों के प्रति 'विकृत' है। उन्होंने कहा, 'वे नहीं चाहते कि गरीब, पिछड़ी और मध्यम वर्ग की महिलाएं राजनीति में आगे बढ़ें। उन्हें बाबा साहेब आंबेडकर के संविधान पर विश्वास नहीं है और न ही विपक्ष की सहमति की कोई परवाह है। उनकी चिंता सिर्फ 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर है।'

कांग्रेस और वामपंथी दलों की प्रतिक्रिया

ओडिशा कांग्रेस के नेता अरविंद दास ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पहले ही संसद से पारित हो चुका है, लेकिन लागू नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया, 'सरकार इसे परिसीमन से जोड़ना चाहती है। जो काम वह पिछले सत्र में नहीं कर सकी, उसे अब विशेष सत्र बुलाकर करना चाहती है। सरकार हमेशा संवैधानिक परंपराओं को दरकिनार करने की कोशिश करती है।'

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की नेता एनी राजा ने कहा कि कानून को इस तरह बनाया गया है कि जब तक जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी नहीं होगी, महिला आरक्षण लागू नहीं किया जा सकेगा। उनके अनुसार, 'महिलाओं को दो शर्तें जोड़कर गुमराह किया जा रहा है — जनगणना और परिसीमन।'

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह पूरा विवाद ऐसे समय में उभरा है जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नज़दीक बताए जा रहे हैं और संसद का विशेष सत्र बुलाए जाने की अटकलें तेज हैं। विपक्ष की एकजुट माँग है कि परिसीमन की शर्त हटाकर आरक्षण तत्काल लागू किया जाए, जबकि सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस समयसीमा नहीं दी गई है। अब यह देखना होगा कि केंद्र सरकार विशेष सत्र बुलाती है या नहीं और यदि बुलाती है तो किस एजेंडे के साथ।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राजनीतिक रूप से यह एक ऐसा पेंच है जिसे सरकार ने खुद कसा है। यदि सरकार वाकई महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देती, तो मौजूदा 543 सीटों पर आरक्षण लागू करने का रास्ता संसदीय संशोधन से निकाला जा सकता था। विशेष सत्र की अटकलें और चुनावी कैलेंडर का मेल बताता है कि यह मुद्दा नीतिगत कम, चुनावी अधिक है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि 2023 में इसी कानून को पारित करते समय परिसीमन की शर्त पर किसी दल ने गंभीर आपत्ति क्यों नहीं जताई — विपक्ष की मौजूदा आक्रामकता उस चूक को भी उजागर करती है।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नारी शक्ति वंदन अधिनियम क्या है और यह अभी तक लागू क्यों नहीं हुआ?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम संविधान का 106वाँ संशोधन है, जो 2023 में संसद से पारित हुआ और लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान करता है। यह इसलिए लागू नहीं हो सका क्योंकि कानून में शर्त है कि आरक्षण तभी प्रभावी होगा जब जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो जाए।
विपक्ष परिसीमन की शर्त का विरोध क्यों कर रहा है?
विपक्ष का तर्क है कि जनगणना और परिसीमन में वर्षों लग सकते हैं, जिससे महिला आरक्षण अनिश्चित काल के लिए टल जाएगा। विपक्षी नेताओं का कहना है कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर अभी आरक्षण लागू किया जा सकता है, और इसके लिए परिसीमन की कोई ज़रूरत नहीं है।
कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने PM मोदी को पत्र क्यों लिखा?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने PM मोदी को पत्र लिखकर यह जानना चाहा कि क्या सरकार परिसीमन विधेयक पारित करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की योजना बना रही है। यह पत्र संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू के उस टीवी साक्षात्कार के बाद आया, जिसमें उन्होंने विशेष सत्र के संकेत दिए थे।
क्या सरकार अभी महिला आरक्षण लागू कर सकती है?
विपक्षी नेताओं के अनुसार, सरकार संसदीय संशोधन के ज़रिए परिसीमन की शर्त हटाकर मौजूदा 543 सीटों पर आरक्षण लागू कर सकती है। हालाँकि सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस समयसीमा या वैकल्पिक रास्ता नहीं बताया गया है।
इस विवाद का उत्तर प्रदेश चुनाव से क्या संबंध है?
कई विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि यह पूरा मुद्दा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले महिला मतदाताओं को लुभाने की कोशिश है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने सीधे कहा कि यूपी चुनाव से पहले 'ड्रामा' किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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