आईएनएक्स मीडिया मामले में पी चिदंबरम के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति आदेश अदालत में प्रस्तुत
सारांश
Key Takeaways
- आईएनएक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग मामला
- पी चिदंबरम के खिलाफ ईडी की कार्रवाई
- कुल अपराध आय लगभग 65.88 करोड़ रुपये
- सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
- अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया में तेजी
नई दिल्ली, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आईएनएक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम के खिलाफ सक्षम प्राधिकारी द्वारा प्राप्त अभियोजन स्वीकृति आदेश को राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश कर दिया है।
ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत मामला दर्ज कर जांच आरंभ की। यह कार्रवाई सीबीआई द्वारा 15 मई 2017 को दायर की गई एफआईआर पर आधारित है, जिसमें आईएनएक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड, आईएनएक्स न्यूज प्राइवेट लिमिटेड, कार्ति पी चिदंबरम और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 120-बी तथा 420 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं के तहत अपराध दर्ज किए गए थे।
जांच में खुलासा हुआ कि जब पी चिदंबरम वित्त मंत्री थे, तब आईएनएक्स मीडिया प्राइवेट लिमिटेड को विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एपीआईपीबी) की स्वीकृति दी गई। आरोप है कि इस स्वीकृति के लिए अवैध धन की मांग की गई और उसे प्राप्त किया गया।
जांच एजेंसी के अनुसार, यह अवैध धन उन कंपनियों के माध्यम से प्राप्त किया गया, जो कार्ति पी चिदंबरम के नियंत्रण में थीं।
ईडी के मुताबिक, इन धनराशियों को शेल कंपनियों के माध्यम से विभिन्न लेन-देन के जरिए परतदार किया गया और बाद में इनका निवेश मेसर्स वासन हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड तथा मेसर्स एजीएस हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड के शेयरों में किया गया। आगे जाकर इन शेयरों की बिक्री और विदेशी निवेश से इन निधियों को बढ़ाया गया।
जांच में यह भी पाया गया कि कार्ति पी चिदंबरम और उनके करीबी सहयोगियों ने कथित तौर पर पी. चिदंबरम के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हुए आईएनएक्स मीडिया से जुड़े व्यक्तियों के साथ संपर्क किया और अवैध आय एकत्र की।
इन निधियों को विभिन्न न्यायिक क्षेत्रों में जटिल वित्तीय लेन-देन के माध्यम से छिपाया गया, जिनका कोई वास्तविक व्यावसायिक उद्देश्य नहीं था। धन के स्रोत को छिपाने के लिए संरचित लेन-देन किए गए और बाद में इन राशियों का उपयोग भारत और विदेश में संपत्तियों में निवेश के लिए किया गया।
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में कुल अपराध आय को लगभग 65.88 करोड़ रुपये आंका है। इसमें से 53.93 करोड़ रुपये और 11.04 करोड़ रुपये को पीएमएलए के तहत अस्थायी रूप से संलग्न किया गया है।
ईडी ने 1 जून 2020 को पीएमएलए की धाराओं 44 और 45 के तहत राऊज एवेन्यू कोर्ट में अभियोजन शिकायत दायर की, जिसके बाद 24 मार्च 2021 को अदालत ने पी चिदंबरम, कार्ति पी चिदंबरम सहित अन्य 8 व्यक्तियों/संस्थाओं को आरोपी बनाया। 16 दिसंबर 2024 को पूरक अभियोजन शिकायत भी दायर की गई। प्रवर्तन निदेशालय मामले की सुनवाई को शीघ्र गति देने के लिए प्रयासरत है।
6 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय बनाम विभु प्रसाद आचार्य मामले में निर्णय दिया और कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197(1) के तहत अभियोजन स्वीकृति की आवश्यकता पीएमएलए, 2002 की धारा 44(1)(बी) पर भी लागू होती है।
इस निर्णय के पश्चात कई मामलों में आरोपियों ने न्यायिक मंचों पर कार्यवाही को चुनौती दी, जिससे मुकदमों में देरी हुई। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में ईडी ने लोक सेवकों से संबंधित मामलों में अभियोजन स्वीकृति की प्रक्रिया को तेज किया है।
इसी क्रम में इस मामले में पी. चिदंबरम के खिलाफ 10 फरवरी 2026 को अभियोजन स्वीकृति प्राप्त की गई। प्रवर्तन निदेशालय ने यह आदेश राऊज एवेन्यू के समक्ष पेश कर दिया है ताकि सुनवाई में तेजी लाई जा सके।