ऑपरेशन टाइगर पर कांग्रेस एमएलसी भाई जगताप का हमला: पार्टियाँ तोड़ना लोकतंत्र के लिए घातक
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस एमएलसी भाई जगताप ने 18 जून 2026 को मुंबई में महाराष्ट्र के कथित 'ऑपरेशन टाइगर' पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि देश में राजनीतिक दलों को जानबूझकर कमज़ोर करने और तोड़ने की कोशिशें लोकतांत्रिक व्यवस्था की जड़ों पर प्रहार हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न दलों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाने, उन्हें डराने-धमकाने तथा राजनीतिक प्रभाव के दुरुपयोग की जो खबरें सामने आ रही हैं, वे गहरी चिंता का विषय हैं।
ऑपरेशन टाइगर पर क्या बोले जगताप
जगताप ने स्वीकार किया कि उन्हें ऑपरेशन टाइगर की विस्तृत जानकारी नहीं है, लेकिन उन्होंने कहा कि कुछ सांसदों को कथित तौर पर प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है — यह कोई छिपी बात नहीं है। उनके अनुसार, चर्चाएँ हैं कि कुछ जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाया गया, उन्हें डराया-धमकाया गया और आर्थिक व राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल कर उनके फैसलों को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।
उन्होंने कहा, 'अगर किसी राजनीतिक दल को तोड़ने या खत्म करने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है।' जगताप ने यह भी कहा कि मीडिया रिपोर्टों में कथित तौर पर अग्रिम भुगतान किए जाने की बातें सामने आई हैं — हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत दावा नहीं, बल्कि मीडिया में आई चर्चाओं का हवाला है।
जाँच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ पुराने मामले उठाना, केंद्रीय जाँच एजेंसियों के जरिए दबाव बनाना और अन्य तरीकों से भय का माहौल तैयार करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यदि लोगों को पुराने मामलों में फँसाने की धमकी देकर राजनीतिक रूप से प्रभावित किया जा रहा है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति पहले से ही दलबदल और गठबंधन की उठापटक से गुज़र रही है। जगताप ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में दबाव और भय के माहौल में राजनीति करना स्वस्थ लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति पर सतर्क टिप्पणी
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के उस बयान पर — जिसमें समाजवादी पार्टी में संभावित टूट का संकेत दिया गया था — जगताप ने कहा कि उन्हें पूरे मामले की जानकारी नहीं है, इसलिए सीधी टिप्पणी उचित नहीं होगी। हालाँकि उन्होंने यह ज़रूर कहा कि यदि महाराष्ट्र में ऐसी गतिविधियों की चर्चा हो रही है, तो अन्य राज्यों में भी ऐसी परिस्थितियाँ उभर सकती हैं।
NEET और परीक्षा प्रणाली पर सवाल
NEET परीक्षा के पुनः आयोजन के बीच टेलीग्राम पर लगाए गए प्रतिबंध पर भी जगताप ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी समस्याओं के लिए किसी एक एप्लिकेशन को जिम्मेदार ठहराना स्थायी समाधान नहीं है। उनके अनुसार, असली सवाल उस पूरी परीक्षा व्यवस्था का है जिसमें पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।
जगताप ने कहा कि देशभर में लाखों छात्र और उनके परिवार भारी आर्थिक व मानसिक दबाव में परीक्षाओं की तैयारी करते हैं — कई परिवार कर्ज लेते हैं या ज़मीन-जायदाद बेचते हैं। उन्होंने माँग की कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि मेहनती छात्रों और उनके अभिभावकों का विश्वास बहाल हो सके।