11 अगस्त 2026
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ऑपरेशन टाइगर पर कांग्रेस एमएलसी भाई जगताप का हमला: पार्टियाँ तोड़ना लोकतंत्र के लिए घातक

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ऑपरेशन टाइगर पर कांग्रेस एमएलसी भाई जगताप का हमला: पार्टियाँ तोड़ना लोकतंत्र के लिए घातक

सारांश

महाराष्ट्र के कथित 'ऑपरेशन टाइगर' पर कांग्रेस एमएलसी भाई जगताप का सीधा हमला — पार्टियाँ तोड़ने के लिए डराने-धमकाने और जाँच एजेंसियों के दुरुपयोग को उन्होंने लोकतंत्र के लिए घातक बताया। NEET पेपर लीक पर भी परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की माँग उठाई।

मुख्य बातें

कांग्रेस एमएलसी भाई जगताप ने 18 जून 2026 को मुंबई में कथित 'ऑपरेशन टाइगर' पर प्रतिक्रिया दी।
जगताप ने आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधियों को डराने-धमकाने और आर्थिक व राजनीतिक दबाव से प्रभावित करने की कोशिशें हो रही हैं।
मीडिया रिपोर्टों में कथित अग्रिम भुगतान की चर्चाओं का उल्लेख किया, लेकिन इसे अपना व्यक्तिगत दावा नहीं बताया।
UP उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के समाजवादी पार्टी में टूट संबंधी बयान पर सीधी टिप्पणी से परहेज किया।
NEET परीक्षा में गड़बड़ी के लिए केवल टेलीग्राम को जिम्मेदार ठहराने को अपर्याप्त बताया; पूरी परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की माँग की।

कांग्रेस एमएलसी भाई जगताप ने 18 जून 2026 को मुंबई में महाराष्ट्र के कथित 'ऑपरेशन टाइगर' पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि देश में राजनीतिक दलों को जानबूझकर कमज़ोर करने और तोड़ने की कोशिशें लोकतांत्रिक व्यवस्था की जड़ों पर प्रहार हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न दलों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाने, उन्हें डराने-धमकाने तथा राजनीतिक प्रभाव के दुरुपयोग की जो खबरें सामने आ रही हैं, वे गहरी चिंता का विषय हैं।

ऑपरेशन टाइगर पर क्या बोले जगताप

जगताप ने स्वीकार किया कि उन्हें ऑपरेशन टाइगर की विस्तृत जानकारी नहीं है, लेकिन उन्होंने कहा कि कुछ सांसदों को कथित तौर पर प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है — यह कोई छिपी बात नहीं है। उनके अनुसार, चर्चाएँ हैं कि कुछ जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाया गया, उन्हें डराया-धमकाया गया और आर्थिक व राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल कर उनके फैसलों को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।

उन्होंने कहा, 'अगर किसी राजनीतिक दल को तोड़ने या खत्म करने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है।' जगताप ने यह भी कहा कि मीडिया रिपोर्टों में कथित तौर पर अग्रिम भुगतान किए जाने की बातें सामने आई हैं — हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनका व्यक्तिगत दावा नहीं, बल्कि मीडिया में आई चर्चाओं का हवाला है।

जाँच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ पुराने मामले उठाना, केंद्रीय जाँच एजेंसियों के जरिए दबाव बनाना और अन्य तरीकों से भय का माहौल तैयार करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। उन्होंने कहा कि यदि लोगों को पुराने मामलों में फँसाने की धमकी देकर राजनीतिक रूप से प्रभावित किया जा रहा है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति पहले से ही दलबदल और गठबंधन की उठापटक से गुज़र रही है। जगताप ने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में दबाव और भय के माहौल में राजनीति करना स्वस्थ लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति पर सतर्क टिप्पणी

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के उस बयान पर — जिसमें समाजवादी पार्टी में संभावित टूट का संकेत दिया गया था — जगताप ने कहा कि उन्हें पूरे मामले की जानकारी नहीं है, इसलिए सीधी टिप्पणी उचित नहीं होगी। हालाँकि उन्होंने यह ज़रूर कहा कि यदि महाराष्ट्र में ऐसी गतिविधियों की चर्चा हो रही है, तो अन्य राज्यों में भी ऐसी परिस्थितियाँ उभर सकती हैं।

NEET और परीक्षा प्रणाली पर सवाल

NEET परीक्षा के पुनः आयोजन के बीच टेलीग्राम पर लगाए गए प्रतिबंध पर भी जगताप ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी समस्याओं के लिए किसी एक एप्लिकेशन को जिम्मेदार ठहराना स्थायी समाधान नहीं है। उनके अनुसार, असली सवाल उस पूरी परीक्षा व्यवस्था का है जिसमें पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।

जगताप ने कहा कि देशभर में लाखों छात्र और उनके परिवार भारी आर्थिक व मानसिक दबाव में परीक्षाओं की तैयारी करते हैं — कई परिवार कर्ज लेते हैं या ज़मीन-जायदाद बेचते हैं। उन्होंने माँग की कि सरकार परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि मेहनती छात्रों और उनके अभिभावकों का विश्वास बहाल हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी परतें उघाड़ें तो यह महाराष्ट्र की उस राजनीतिक संस्कृति पर टिप्पणी है जहाँ 2022 में शिवसेना और 2023 में NCP की टूट पहले ही हो चुकी है। जगताप ने सावधानी से 'मीडिया रिपोर्टों' की आड़ ली — यह राजनीतिक बयानबाज़ी की एक चतुर शैली है जो आरोप लगाती है पर जिम्मेदारी नहीं लेती। NEET मुद्दे को इसी बयान में जोड़ना रणनीतिक है — यह संदेश देता है कि सत्ता का दुरुपयोग केवल राजनीति तक सीमित नहीं, बल्कि संस्थाओं तक फैला है। असली सवाल यह है कि 'ऑपरेशन टाइगर' के आरोपों की स्वतंत्र जाँच की माँग विपक्ष कब और कैसे उठाएगा।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कथित 'ऑपरेशन टाइगर' क्या है?
महाराष्ट्र में कथित 'ऑपरेशन टाइगर' वह चर्चित राजनीतिक अभियान है जिसके तहत आरोप लगाए जा रहे हैं कि विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधियों को दबाव, धमकी और आर्थिक प्रलोभन देकर प्रभावित किया जा रहा है। कांग्रेस एमएलसी भाई जगताप सहित कई विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया है।
भाई जगताप ने जाँच एजेंसियों के बारे में क्या आरोप लगाए?
जगताप ने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ पुराने मामले उठाकर और केंद्रीय जाँच एजेंसियों के जरिए दबाव बनाकर राजनीतिक फैसलों को प्रभावित करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया।
केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर जगताप ने क्या कहा?
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के समाजवादी पार्टी में संभावित टूट संबंधी बयान पर जगताप ने सीधी टिप्पणी से परहेज किया। उन्होंने कहा कि उन्हें पूरे मामले की जानकारी नहीं है, लेकिन महाराष्ट्र जैसी परिस्थितियाँ अन्य राज्यों में भी उभर सकती हैं।
NEET परीक्षा और टेलीग्राम प्रतिबंध पर जगताप का क्या रुख है?
जगताप ने कहा कि NEET में पेपर लीक जैसी समस्याओं के लिए केवल टेलीग्राम को जिम्मेदार ठहराना स्थायी समाधान नहीं है। उनके अनुसार, पूरी परीक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और सुरक्षित बनाना ज़रूरी है ताकि मेहनती छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे।
पार्टियाँ तोड़ने की राजनीति लोकतंत्र के लिए कैसे घातक है?
जगताप के अनुसार, जब जनप्रतिनिधियों को भय, दबाव या आर्थिक प्रलोभन से प्रभावित किया जाता है, तो जनता की इच्छाशक्ति का प्रतिनिधित्व कमज़ोर होता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में ऐसी घटनाएँ लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं।
राष्ट्र प्रेस
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