एनआईए का राजनीतिक दुरुपयोग न हो, निष्पक्ष जांच ज़रूरी: आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी
सारांश
मुख्य बातें
इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने 31 जुलाई को कोलकाता में पश्चिम बंगाल के पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) पुलिस स्टेशन के उद्घाटन, बारुईपुर मुठभेड़ विवाद, तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम और नई शिक्षा नीति (NEP) सहित कई अहम मुद्दों पर बेबाक बयान दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि NIA जैसी शीर्ष जांच एजेंसी का उपयोग किसी भी राजनीतिक एजेंडे के लिए नहीं होना चाहिए।
एनआईए थाने पर सिद्दीकी का रुख
पश्चिम बंगाल के न्यू टाउन में राज्य का पहला NIA पुलिस स्टेशन खुलने के बाद देशभर में ऐसे थानों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है। सिद्दीकी ने कहा कि इस नए थाने से घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि NIA देश की सबसे महत्वपूर्ण जांच एजेंसियों में से एक है। हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि यदि यह एजेंसी राजनीतिक प्रेरणा से काम करेगी तो उसकी विश्वसनीयता खतरे में पड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि CBI और ED जैसी एजेंसियों पर पहले भी दुरुपयोग के आरोप लगते रहे हैं, जिससे उनकी साख और सफलता दर दोनों प्रभावित हुई हैं।
तृणमूल विवाद और 'असली TMC' प्रकरण
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग को पत्र लिखकर 'असली TMC' से जुड़े मामले की जांच शीघ्र पूरी करने की मांग के संदर्भ में सिद्दीकी ने कहा कि जो नेता कभी ममता बनर्जी की तस्वीर और उनके नाम के सहारे चुनाव जीतकर आए, वही आज उनके विरुद्ध बयानबाज़ी कर रहे हैं। उनके अनुसार, पार्टी छोड़कर इधर-उधर जाने वाले कई नेता कथित तौर पर भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोपों से बचने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे ममता बनर्जी की नीतियों की आलोचना करते रहे हैं और आगे भी करेंगे, लेकिन इस मामले में जनता सब जानती है।
बारुईपुर मुठभेड़ और पुलिस सुधार
कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा बारुईपुर मुठभेड़ मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए हलफनामा और रिपोर्ट तलब किए जाने पर सिद्दीकी ने कहा कि यदि अदालत ने घटना के पुनर्निर्माण और पुलिस कार्रवाई पर प्रश्न उठाए हैं, तो जांच होनी ही चाहिए। उनका दल कानून-व्यवस्था का सम्मान करता है, लेकिन पश्चिम बंगाल को 'पुलिस स्टेट' बनाने की किसी भी कोशिश का विरोध करेगा।
सिद्दीकी ने बताया कि राज्य में बड़ी संख्या में पुलिस पद रिक्त हैं जिन्हें तत्काल भरा जाना चाहिए। उन्होंने 14 से 16 घंटे की ड्यूटी, महिला पुलिसकर्मियों के लिए बैरक और आवासीय सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दे भी उठाए। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल पुलिस के पास आधुनिक हथियारों की लगभग 71 प्रतिशत कमी है।
अभिषेक बनर्जी को अंतरिम सुरक्षा पर प्रतिक्रिया
TMC सांसद अभिषेक बनर्जी को तीन मामलों में मिली अंतरिम सुरक्षा पर सिद्दीकी ने कहा कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला नया नहीं है। चुनाव के बाद फर्जी हस्ताक्षरों और CID जांच जैसे मुद्दे उठाए गए, लेकिन बाद में उन पर चर्चा बंद हो गई। विपक्ष द्वारा अभिषेक बनर्जी की गिरफ्तारी के बार-बार किए गए दावों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि लगातार गिरफ्तारी की बातें कही गईं, लेकिन अब तक ऐसा कुछ नहीं हुआ।
नई शिक्षा नीति पर ISF का रुख
नई शिक्षा नीति (NEP) पर आधारित पाठ्यक्रम परिवर्तनों को लेकर सिद्दीकी ने कहा कि उनकी पार्टी NEP के कई प्रावधानों का पहले से विरोध करती रही है। उनके अनुसार, केवल NEP लागू करने की घोषणा से शिक्षा व्यवस्था में बदलाव नहीं आएगा। इसके लिए पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति, शिक्षक-छात्र अनुपात में सुधार, स्कूलों का बुनियादी ढांचा विकास, डिजिटल क्लासरूम और छात्रों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक ज़िम्मेदारी होनी चाहिए। इन तैयारियों के बिना NEP को प्रभावी ढंग से लागू करना संभव नहीं है।
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में केंद्रीय एजेंसियों की बढ़ती सक्रियता और राज्य सरकार के बीच तनाव चरम पर है। सिद्दीकी के बयान आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति पर गहरा असर डाल सकते हैं।