पश्चिमी एशिया के हालात पर पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की महत्वपूर्ण बैठक
सारांश
Key Takeaways
- पश्चिमी एशिया में संघर्ष की स्थिति गंभीर है।
- 67,000 भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी हुई है।
- प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा समिति की बैठक हुई।
- बैठक में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर जोर दिया गया।
- सरकार कूटनीति और बातचीत पर जोर दे रही है।
नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिमी एशिया में बढ़ते संघर्ष के चलते नई दिल्ली में सोमवार को एक महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल और सीडीएस अनिल चौहान के साथ बैठक की। कुछ समय बाद प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह भी बैठक में शामिल हुए।
इससे पहले, विदेश मंत्री ने संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में पश्चिमी एशिया के हालातों पर अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पश्चिम एशिया में बदलते हालात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। गल्फ देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक निवास करते हैं। ताजा स्थिति को देखते हुए भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत लाने के लिए ऑपरेशन तेजी से किया जा रहा है।
जयशंकर ने कहा, "सरकार इस समय भारतीय नागरिकों की सहायता करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। लगभग 67,000 नागरिकों की सुरक्षित वापसी हो चुकी है। आगे भी पश्चिमी एशिया से लोगों को वापस लाने के प्रयास जारी रहेंगे।"
उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक कार्यरत हैं, इसलिए यह संघर्ष भारत के लिए विशेष चिंता का विषय है। उन्होंने बताया, "स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 1 मार्च को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट सुरक्षा समिति (सीसीएस) की बैठक हुई। इसमें ईरान में हुए एयर्स्ट्राइक और उसके बाद कई खाड़ी देशों में हुए हमलों के बारे में विचार-विमर्श हुआ। सीसीएस इस क्षेत्र में भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंतित थी।"
विदेश मंत्री ने कहा, "संघर्ष लगातार बढ़ रहा है और क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति बहुत खराब हो गई है। हमने देखा है कि यह संघर्ष अन्य देशों में भी फैल चुका है और तबाही और मृत्यु दर में वृद्धि हो रही है। इस स्थिति के कारण पूरे क्षेत्र में सामान्य जीवन और आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इसलिए हमने 3 मार्च को बातचीत और कूटनीति का आवाहन किया और संघर्ष को जल्द समाप्त करने का आग्रह किया। मुझे विश्वास है कि पूरा सदन भी जन और माल के नुकसान पर सहानुभूति व्यक्त करने में मेरे साथ है।"