पटियाला का AQI 221 'खराब' श्रेणी में, दिल्ली में GRAP-3 लागू; प्रदूषण संकट गहराया
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब के पटियाला में वायु प्रदूषण शनिवार को भी राहत देने का नाम नहीं ले रहा। 7 नवंबर 2026 को सुबह 11:05 बजे IST तक अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 221 दर्ज किया गया, जो केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वर्गीकरण के अनुसार 'खराब' श्रेणी में आता है। यह स्तर स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा बुजुर्गों, बच्चों और श्वसन रोगियों के लिए विशेष रूप से हानिकारक माना जाता है।
पिछले चार दिनों का उतार-चढ़ाव
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) के मॉडल टाउन, पटियाला स्थित निगरानी केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, शहर की वायु गुणवत्ता में पिछले चार दिनों में उल्लेखनीय उतार-चढ़ाव दर्ज हुआ है। 4 नवंबर को AQI 191, 5 नवंबर को 240, 6 नवंबर को 201 और 7 नवंबर को यह फिर बढ़कर 221 पर पहुंच गया। गौरतलब है कि 200 से ऊपर का AQI 'खराब' श्रेणी में आता है, जहाँ लंबे समय तक संपर्क में रहने पर अधिकांश लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
स्वास्थ्य चेतावनी — किसे है सबसे ज़्यादा खतरा
जारी स्वास्थ्य सलाह के अनुसार, 221 AQI के स्तर पर बाहरी गतिविधियाँ घटाने और मास्क पहनने की सिफारिश की गई है। विशेष रूप से बुजुर्गों, छोटे बच्चों तथा सांस और हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों को घर के भीतर रहने और अनावश्यक बाहर निकलने से बचने की सलाह दी जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर भारत के अधिकांश मैदानी इलाकों में पराली जलाने और सर्दियों की धुंध के मिलेजुले प्रभाव से वायु गुणवत्ता तेज़ी से बिगड़ रही है।
दिल्ली में स्थिति और भी गंभीर, GRAP-3 लागू
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की स्थिति पटियाला से भी अधिक चिंताजनक है। दिल्ली सरकार के वायु गुणवत्ता निगरानी डेटा के अनुसार, 7 नवंबर को 24 घंटे का औसत AQI 365 रहा, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। इससे एक दिन पहले, शुक्रवार शाम दिल्ली का AQI 382 था। लगातार बिगड़ती स्थिति को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने शुक्रवार को दीपावली से पहले एहतियातन दिल्ली-NCR में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का चरण-3 लागू कर दिया।
GRAP-3 का मतलब क्या है
GRAP चरण-3 लागू होने पर दिल्ली-NCR में निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध, डीज़ल जनरेटर के उपयोग पर रोक और प्रदूषणकारी उद्योगों की निगरानी बढ़ाई जाती है। यह Nवीं बार है जब सर्दियों के मौसम में राजधानी को इस स्तर के आपात उपायों का सहारा लेना पड़ा है, जो दर्शाता है कि दीर्घकालिक प्रदूषण नियंत्रण नीतियाँ अभी पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाई हैं।
आगे क्या उम्मीद
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत में तेज़ हवाओं की अनुपस्थिति और तापमान में गिरावट के कारण आने वाले दिनों में प्रदूषण के स्तर में और वृद्धि की आशंका है। पटियाला के निवासियों को PPCB के रियल-टाइम डेटा पर नज़र रखने और स्वास्थ्य एजेंसियों की सलाह का पालन करने की ज़रूरत है।