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पौड़ी पलायन पर हरक सिंह रावत का सरकार पर हमला: 'मंडल मुख्यालय में अधिकारी ही नहीं'

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पौड़ी पलायन पर हरक सिंह रावत का सरकार पर हमला: 'मंडल मुख्यालय में अधिकारी ही नहीं'

सारांश

उत्तराखंड आंदोलन की धुरी रहे पौड़ी गढ़वाल को राज्य गठन के बाद सबसे ज़्यादा उपेक्षा मिली — यही कहना है हरक सिंह रावत का। मंडल मुख्यालय में अधिकारियों की गैरमौजूदगी और देहरादून-केंद्रित प्रशासन को पलायन की जड़ बताते हुए कांग्रेस ने आंदोलन की चेतावनी दी है।

मुख्य बातें

पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने 1 जून 2026 को पौड़ी गढ़वाल में प्रशासनिक उपेक्षा और बढ़ते पलायन पर राज्य सरकार को घेरा।
आरोप: शिक्षा, उद्यान, राजस्व विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मंडल मुख्यालय पौड़ी की बजाय देहरादून में बैठकर काम कर रहे हैं।
रावत ने गैरसैंण को राजधानी बनाने की संभावना पर सवाल उठाया — यदि पौड़ी में अधिकारी नहीं बैठ रहे तो वहाँ कैसे बैठेंगे।
कांग्रेस ने राहुल गांधी के कार्यक्रम के बाद बड़ी रैली और मंडल मुख्यालय घेराव की योजना बनाई है।
स्थानीय प्रशासन की कमज़ोरी को पहाड़ों से पलायन का प्रमुख कारण बताया गया।

पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने 1 जून 2026 को पौड़ी गढ़वाल में बढ़ते पलायन और प्रशासनिक उपेक्षा के मुद्दे पर उत्तराखंड की राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उनका आरोप है कि उत्तराखंड आंदोलन की धुरी रहे इस जिले के साथ राज्य गठन के बाद से सबसे ज़्यादा भेदभाव हुआ है, और मंडल मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी देहरादून में बैठकर काम कर रहे हैं।

मंडल मुख्यालय की खोखली होती भूमिका

रावत ने कहा कि पौड़ी मंडल मुख्यालय होने के बावजूद शिक्षा, उद्यान, राजस्व और अन्य विभागों के अधिकांश वरिष्ठ अधिकारी देहरादून से काम चला रहे हैं। उनके अनुसार, जब संबंधित अधिकारी स्थानीय स्तर पर उपस्थित ही नहीं होंगे, तो मंडल मुख्यालय की संवैधानिक और प्रशासनिक प्रासंगिकता स्वतः समाप्त हो जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में पहाड़ के विकास की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

पलायन की जड़ में प्रशासनिक विफलता

रावत के अनुसार, पहाड़ों से लगातार बढ़ते पलायन की एक बड़ी वजह यह है कि स्थानीय निवासियों को छोटी-छोटी प्रशासनिक ज़रूरतों के लिए भी देहरादून की यात्रा करनी पड़ती है। इससे समय और संसाधनों दोनों की भारी बर्बादी होती है। उनका तर्क है कि जब तक स्थानीय स्तर पर प्रशासन सशक्त नहीं होगा, तब तक रोज़गार, बुनियादी सुविधाएँ और बेहतर जीवनस्तर सुनिश्चित नहीं किया जा सकता।

गैरसैंण राजधानी पर तीखा सवाल

रावत ने एक तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि यदि आज पौड़ी जैसे मंडल मुख्यालय में अधिकारी नहीं बैठ रहे, तो भविष्य में गैरसैंण को राजधानी बनाए जाने की स्थिति में वहाँ प्रशासनिक उपस्थिति की उम्मीद कैसे की जाएगी। यह टिप्पणी उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच आई है।

कांग्रेस की आंदोलन की तैयारी

रावत ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) इस मुद्दे पर संगठित विरोध की तैयारी कर रही है। राहुल गांधी के कार्यक्रम के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ एक बड़ी रैली और मंडल मुख्यालय का घेराव किए जाने की योजना है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पौड़ी की उपेक्षा जारी रही, तो कांग्रेस इस लड़ाई को और अधिक मज़बूती से उठाएगी। गौरतलब है कि यह वही क्षेत्र है जिसने उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई थी।

आगे क्या

राज्य सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। कांग्रेस की प्रस्तावित रैली और घेराव की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन पार्टी का कहना है कि यह कदम राहुल गांधी के उत्तराखंड दौरे के बाद उठाया जाएगा। पलायन की समस्या उत्तराखंड में एक दीर्घकालिक संकट बनी हुई है और यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप से और अधिक तीखा होता दिख रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए उनकी आलोचना को केवल विपक्षी राजनीति के चश्मे से देखना भी उचित होगा। गैरसैंण पर उनका सवाल तीखा ज़रूर है, लेकिन पलायन की समस्या का समाधान रैली और घेराव से नहीं, बल्कि नीतिगत जवाबदेही से आएगा।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरक सिंह रावत ने पौड़ी को लेकर क्या आरोप लगाए हैं?
हरक सिंह रावत ने आरोप लगाया है कि पौड़ी मंडल मुख्यालय होने के बावजूद शिक्षा, उद्यान और राजस्व विभागों के वरिष्ठ अधिकारी देहरादून में बैठकर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे स्थानीय प्रशासन कमज़ोर हो रहा है और पलायन बढ़ रहा है।
पौड़ी गढ़वाल में पलायन क्यों बढ़ रहा है?
रावत के अनुसार, स्थानीय प्रशासनिक सुविधाओं की कमी के कारण लोगों को छोटी-छोटी ज़रूरतों के लिए देहरादून जाना पड़ता है, जिससे समय और संसाधन दोनों बर्बाद होते हैं। रोज़गार और बुनियादी सेवाओं की अनुपलब्धता भी पलायन को बढ़ावा दे रही है।
गैरसैंण राजधानी पर हरक सिंह रावत ने क्या कहा?
रावत ने सवाल उठाया कि यदि आज पौड़ी जैसे मंडल मुख्यालय में अधिकारी नहीं बैठ रहे, तो भविष्य में गैरसैंण को राजधानी बनाने पर वहाँ प्रशासनिक उपस्थिति की उम्मीद कैसे की जाएगी। यह टिप्पणी उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी को लेकर जारी बहस के संदर्भ में आई है।
कांग्रेस पौड़ी मुद्दे पर क्या कदम उठाने वाली है?
कांग्रेस राहुल गांधी के उत्तराखंड कार्यक्रम के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ एक बड़ी रैली और पौड़ी मंडल मुख्यालय का घेराव करने की योजना बना रही है। रावत ने चेतावनी दी है कि उपेक्षा जारी रही तो यह आंदोलन और तेज़ होगा।
पौड़ी गढ़वाल का उत्तराखंड आंदोलन में क्या महत्व रहा है?
पौड़ी गढ़वाल को उत्तराखंड राज्य आंदोलन का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। रावत के अनुसार, राज्य गठन में इस क्षेत्र की भूमिका अग्रणी रही, लेकिन राज्य बनने के बाद इसी जिले को सबसे ज़्यादा प्रशासनिक उपेक्षा झेलनी पड़ी है।
राष्ट्र प्रेस
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