26 जून 2026
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सुप्रीम कोर्ट में PIL: स्कूल-अस्पताल समेत सार्वजनिक इमारतों के लिए राष्ट्रीय फायर सेफ्टी फ्रेमवर्क की माँग

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सुप्रीम कोर्ट में PIL: स्कूल-अस्पताल समेत सार्वजनिक इमारतों के लिए राष्ट्रीय फायर सेफ्टी फ्रेमवर्क की माँग

सारांश

देशभर में बार-बार होने वाले अग्निकांडों के बीच सर्वोच्च न्यायालय में PIL दायर हुई है, जिसमें स्कूल, अस्पताल और कोचिंग सेंटर जैसी सार्वजनिक इमारतों के लिए एक समान राष्ट्रीय अग्नि सुरक्षा ढाँचा बनाने की माँग की गई है। याचिका में तक्षशिला, उपहार और मालवीय नगर जैसी त्रासदियों को प्रणालीगत विफलता का प्रमाण बताया गया है।

मुख्य बातें

अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने 26 जून 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की।
याचिका में स्कूल, अस्पताल, कोचिंग सेंटर, होटल और कमर्शियल बिल्डिंग के लिए समान राष्ट्रीय न्यूनतम अग्नि एवं जीवन सुरक्षा ढाँचे की माँग।
मौजूदा नियम राज्यों में असमान हैं — यही विसंगति बार-बार होने वाले अग्निकांडों की जड़ बताई गई है।
उपहार सिनेमा, तक्षशिला कोचिंग सेंटर, राजकोट TRP गेम ज़ोन और दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड सहित कई घटनाओं का हवाला।
याचिका अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा की संवैधानिक ज़िम्मेदारी पर आधारित।
24 जून को केंद्र व राज्य अधिकारियों को आवेदन दिया गया था, पर कोई प्रभावी कार्रवाई न होने पर न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया गया।

सर्वोच्च न्यायालय में 26 जून 2026 को एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें देशभर के उच्च-जोखिम वाले सार्वजनिक स्थलों — जिनमें स्कूल, अस्पताल, कोचिंग सेंटर, होटल और कमर्शियल बिल्डिंग शामिल हैं — के लिए एक समान 'राष्ट्रीय न्यूनतम अग्नि एवं जीवन सुरक्षा ढाँचा' (National Minimum Fire and Life-Safety Framework) बनाने और लागू करने का निर्देश देने की माँग की गई है। यह याचिका अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने स्वयं की ओर से दायर की है।

याचिका की पृष्ठभूमि

याचिका में तर्क दिया गया है कि देश में अग्नि सुरक्षा से जुड़े नियम-कानून अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में असमान और बिखरे हुए हैं। इस विसंगति के चलते मानकों में भारी अंतर बना रहता है और नियमों को लागू करने में गंभीर कमियाँ रह जाती हैं, जिससे आम नागरिकों की सुरक्षा लगातार खतरे में पड़ती है।

याचिकाकर्ता ने बताया कि 24 जून को केंद्र और राज्य अधिकारियों को एक आवेदन भेजकर राष्ट्रीय न्यूनतम ढाँचा बनाने और लागू करने की माँग की गई थी, परंतु उस पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया गया।

किन घटनाओं का हवाला दिया गया

PIL में देश में हुई कई बड़ी अग्निकांड त्रासदियों का उल्लेख किया गया है, जो बार-बार दोहराई जाने वाली प्रणालीगत विफलताओं को रेखांकित करती हैं। इनमें प्रमुख हैं —

उपहार सिनेमा अग्निकांड, एएमआरआई अस्पताल अग्निकांड, सूरत के तक्षशिला आर्केड कोचिंग सेंटर में हुई आग, अनाज मंडी अग्निकांड, राजकोट TRP गेम ज़ोन में आग, हाल ही में दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक गेस्ट हाउस में लगी आग और लखनऊ के अलीगंज कोचिंग सेंटर में हुई दुर्घटना।

याचिका में कहा गया है, 'भयानक आग की घटनाओं का बार-बार होना नियामक विफलता, बिखरे हुए कानूनी मानकों और नियमों को लागू करने के अपर्याप्त तरीकों को उजागर करता है, जिससे लोगों की सुरक्षा को लगातार खतरा बना रहता है।'

प्रस्तावित ढाँचे में क्या माँगा गया

PIL में माँग की गई है कि प्रस्तावित राष्ट्रीय ढाँचे के दायरे में स्कूल, अस्पताल, कोचिंग सेंटर, होटल, गेस्ट हाउस, मनोरंजन स्थल, कमर्शियल बिल्डिंग और भीड़-भाड़ वाले अन्य सार्वजनिक स्थल शामिल किए जाएँ।

इसके अंतर्गत अग्नि सुरक्षा नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करना, नियमित निरीक्षण, आपातकालीन तैयारी, सुरक्षित निकासी योजना और नियमों के उल्लंघन पर संबंधित अधिकारियों तथा भवन मालिकों की जवाबदेही तय करने के लिए प्रभावी तंत्र बनाने की माँग की गई है।

संवैधानिक और कानूनी आधार

याचिका में कहा गया है कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) के तहत मौलिक अधिकारों को लागू करने और सार्वजनिक स्थलों पर उचित सुरक्षा मानक सुनिश्चित करने की सरकारी संवैधानिक ज़िम्मेदारी से जुड़े महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठाता है।

याचिका में सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व निर्णयों का भी संदर्भ दिया गया है — जिनमें स्कूलों में अग्नि सुरक्षा से जुड़ा 'अविनाश मेहरोत्रा बनाम भारत संघ' मामला और अस्पतालों में आग की घटनाओं पर न्यायालय की स्वतः संज्ञान कार्यवाही शामिल हैं। इसके अलावा नेशनल बिल्डिंग कोड, मॉडल बिल्डिंग बाय-लॉज़, NDMA दिशानिर्देश और मॉडल फायर सर्विस बिल, 2019 का भी उल्लेख किया गया है।

आगे क्या होगा

यह याचिका ऐसे समय में दायर की गई है जब देश में सार्वजनिक भवनों में आग से जुड़ी दुर्घटनाओं की आवृत्ति चिंताजनक बनी हुई है और एकीकृत राष्ट्रीय मानकों की माँग लंबे समय से उठती रही है। सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब माँग सकता है। यदि न्यायालय इस PIL को स्वीकार करता है, तो यह अग्नि सुरक्षा नियमन के क्षेत्र में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

हर त्रासदी के बाद आश्वासन मिले, पर ढाँचागत बदलाव नहीं आया। असली सवाल यह है कि नेशनल बिल्डिंग कोड, NDMA दिशानिर्देश और मॉडल फायर सर्विस बिल पहले से मौजूद होने के बावजूद राज्य उन्हें लागू क्यों नहीं करते — और क्या सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप इस बार बाध्यकारी तंत्र बना पाएगा या महज़ एक और निर्देश बनकर रह जाएगा। जब तक जवाबदेही व्यक्तिगत और मापनीय नहीं होगी, नियामक विफलता का यह चक्र नहीं टूटेगा।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट में दायर यह फायर सेफ्टी PIL क्या है?
यह 26 जून 2026 को अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका है, जिसमें देशभर के स्कूल, अस्पताल, कोचिंग सेंटर, होटल और कमर्शियल बिल्डिंग के लिए एक समान राष्ट्रीय न्यूनतम अग्नि एवं जीवन सुरक्षा ढाँचा बनाने और लागू करने का निर्देश देने की माँग की गई है।
याचिका में किन अग्निकांडों का हवाला दिया गया है?
PIL में उपहार सिनेमा अग्निकांड, एएमआरआई अस्पताल अग्निकांड, सूरत के तक्षशिला आर्केड कोचिंग सेंटर में आग, अनाज मंडी अग्निकांड, राजकोट TRP गेम ज़ोन अग्निकांड, दिल्ली के मालवीय नगर गेस्ट हाउस और लखनऊ के अलीगंज कोचिंग सेंटर में हुई आग की घटनाओं का उल्लेख किया गया है। इन्हें प्रणालीगत नियामक विफलता के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
मौजूदा फायर सेफ्टी नियमों में क्या खामी बताई गई है?
याचिका के अनुसार, अग्नि सुरक्षा नियम अलग-अलग राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में असमान और बिखरे हुए हैं। इससे मानकों में भारी अंतर आता है और नियमों को लागू करने में गंभीर कमियाँ रहती हैं, जिससे नागरिकों की सुरक्षा लगातार खतरे में रहती है।
प्रस्तावित राष्ट्रीय ढाँचे में किन माँगों को शामिल किया गया है?
प्रस्तावित ढाँचे में अग्नि सुरक्षा नियमों का अनुपालन, नियमित निरीक्षण, आपातकालीन तैयारी, सुरक्षित निकासी योजना और नियमों के उल्लंघन पर अधिकारियों व भवन मालिकों की जवाबदेही तय करने के लिए प्रभावी तंत्र बनाने की माँग की गई है। इसमें स्कूल, अस्पताल, होटल, मनोरंजन स्थल और भीड़-भाड़ वाले अन्य सार्वजनिक स्थल शामिल होंगे।
यह याचिका किस संवैधानिक आधार पर दायर की गई है?
याचिका संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) पर आधारित है। इसमें तर्क दिया गया है कि सार्वजनिक स्थलों पर उचित सुरक्षा मानक सुनिश्चित करना सरकार की संवैधानिक ज़िम्मेदारी है, जिसे पूरा नहीं किया जा रहा।
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