रक्षाबंधन पर PM मोदी ने स्कूली बच्चों संग किया हाई-फाइव, 7 LKM में मनाया खास जश्न
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 अगस्त को अपने आधिकारिक आवास 7, लोक कल्याण मार्ग, नई दिल्ली में स्कूली बच्चों के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया। इस दौरान उन्होंने बच्चों के साथ हाई-फाइव किया, हँसी-ठिठोली की और गर्मजोशी से बातचीत की। यह समारोह प्रधानमंत्री की उस परंपरा का हिस्सा है जिसमें वे पिछले कई वर्षों से रक्षाबंधन के अवसर पर बच्चों के साथ समय बिताते आए हैं।
समारोह की मुख्य झलकियाँ
प्रधानमंत्री मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया जिसमें वे छात्राओं के साथ हाथ मिलाते और हाई-फाइव करते नज़र आए। उन्होंने लिखा, 'आज 7, लोक कल्याण मार्ग (प्रधानमंत्री आवास) में रक्षाबंधन समारोह के दौरान हाई-फाइव, मुस्कानें और भी बहुत कुछ।' वीडियो में बच्चों के साथ उनकी सहज और आत्मीय बातचीत स्पष्ट रूप से दिखती है।
बच्ची का सवाल और PM का जवाब
समारोह के दौरान एक छात्रा ने प्रधानमंत्री से उनके बचपन के सपने के बारे में पूछा। बच्ची ने पूछा, 'आपका बचपन का सपना क्या था?' इस पर मोदी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, 'आप लोगों से मिलने का।' यह सुनकर वहाँ मौजूद सभी छात्राएँ हँस पड़ीं। यह पल समारोह का सबसे चर्चित क्षण बन गया।
रक्षाबंधन की शुभकामनाएँ और संस्कृत श्लोक
इससे पूर्व प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर देशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने लिखा, 'रक्षाबंधन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। यह पावन पर्व आप सभी के जीवन में खुशहाली, समृद्धि और सफलता लेकर आए। स्नेह, अपनत्व और आपसी विश्वास की डोर सदैव अटूट बनी रहे, यही कामना है।'
इसके साथ ही उन्होंने एक संस्कृत सुभाषितम् भी साझा किया — 'एष प्रभावो रक्षायाः कथितस्ते युधिष्ठिर। जयदः सुखदश्चैव पुत्रारोग्यधनप्रदः।' — जिसका भाव है कि रक्षा सूत्र जय, सुख, संतति, आरोग्य और ऐश्वर्य प्रदान करने वाला है।
परंपरा और पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी पिछले कई वर्षों से रक्षाबंधन पर बच्चों के साथ यह विशेष आयोजन करते आए हैं। पिछले वर्ष भी बच्चों ने 7, लोक कल्याण मार्ग पर उन्हें राखी बाँधी थी और उनके साथ पर्व का आनंद उठाया था। उस अवसर पर मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए नारी शक्ति को उनके निरंतर स्नेह और विश्वास के लिए धन्यवाद भी दिया था।
यह आयोजन प्रधानमंत्री के उस प्रयास का प्रतीक है जिसमें वे राष्ट्रीय पर्वों को सामाजिक जुड़ाव के अवसर के रूप में देखते हैं — आने वाले वर्षों में भी यह परंपरा जारी रहने की उम्मीद है।