नेहरू की पुण्यतिथि पर PM मोदी, राहुल गांधी समेत कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर बुधवार, 27 मई को नई दिल्ली में राजनीतिक दलों के पार श्रद्धांजलि का सिलसिला देखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर कांग्रेस नेताओं तक, सभी ने देश के पहले प्रधानमंत्री को याद किया।
प्रधानमंत्री मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि।' ओडिशा के राज्यपाल ने भी एक्स पर संदेश साझा कर भारत के प्रथम प्रधानमंत्री को नमन किया।
राज्यों के नेताओं की श्रद्धांजलि
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर लिखा, 'प्रथम प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहरलाल नेहरू जी की पुण्यतिथि पर सादर नमन!' महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल ने नेहरू को आधुनिक भारत का शिल्पकार, लोकतांत्रिक मूल्यों का संस्थापक और स्वतंत्र भारत का पहला प्रधानमंत्री बताते हुए श्रद्धांजलि दी।
भुजबल ने कहा कि आज़ादी के बाद के कठिन दौर में नेहरू ने देश को स्थिरता, प्रगति और विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का ऐतिहासिक कार्य किया। उन्होंने यह भी कहा कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, उद्योग, शिक्षा और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मज़बूत करने के लिए नेहरू द्वारा लिए गए निर्णय आज भी देश की प्रगति की नींव बने हुए हैं।
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने एक्स पर नेहरू को 'दूरदर्शी राष्ट्रनिर्माता' बताया। उन्होंने कहा कि नेहरू ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) तथा सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े उद्योगों जैसी संस्थाओं की स्थापना की, जिन्होंने देश के भविष्य को नई दिशा दी।
कांग्रेस नेताओं का शांति वन पर नमन
कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, संस्थाओं के निर्माण और राष्ट्रीय प्रगति के प्रति नेहरू की प्रतिबद्धता आज भी देश को प्रेरित करती है। कांग्रेस के तमाम नेता पंडित नेहरू की समाधि स्थल 'शांति वन' पहुँचकर उन्हें नमन किया, जिनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल रहे।
नेहरू की विरासत
गौरतलब है कि पंडित नेहरू का युवाओं, विद्यार्थियों और बच्चों के प्रति विशेष स्नेह था — यही कारण है कि उनका जन्मदिन 14 नवंबर को 'बाल दिवस' के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में शिक्षा और वैज्ञानिक सोच के महत्व पर बल दिया तथा विविधता में एकता, धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित भारत की परिकल्पना को आकार दिया। 27 मई 1964 को उनका निधन हुआ था।