महात्मा अय्यंकाली और श्री नारायण गुरु जयंती: PM मोदी व उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 28 अगस्त 2026 को महान समाज सुधारक महात्मा अय्यंकाली और आध्यात्मिक विभूति श्री नारायण गुरु की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। दोनों नेताओं ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अलग-अलग पोस्ट के माध्यम से इन महापुरुषों के जीवन और विरासत को नमन किया।
PM मोदी की महात्मा अय्यंकाली को श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री मोदी ने महात्मा अय्यंकाली को सामाजिक न्याय का महान अग्रदूत बताते हुए उनके जीवन-संघर्ष को रेखांकित किया। उन्होंने लिखा, 'महात्मा अय्यंकाली को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि! उन्हें सामाजिक न्याय के एक महान अग्रदूत के रूप में याद किया जाता है। हाशिए पर रहने वाले लोगों के लिए शिक्षा के अवसर सुनिश्चित करने, खेतिहर मजदूरों के जीवन को बेहतर बनाने और गरीबों की सेवा करने की उनकी कोशिशें बहुत प्रेरणादायक हैं। उनका जीवन सामाजिक सशक्तीकरण के लिए काम करने वाले सभी लोगों को ताकत देता है।'
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से वंचित वर्गों के लिए शिक्षा के द्वार खोलने, खेतिहर मजदूरों की दशा सुधारने और समाज के सबसे कमज़ोर तबकों की सेवा में अय्यंकाली के अथक प्रयासों को याद किया।
श्री नारायण गुरु को नमन
प्रधानमंत्री मोदी ने श्री नारायण गुरु को एक महान समाज सुधारक, आध्यात्मिक नेता और विचारक के रूप में स्मरण किया। उनके एक्स पोस्ट में लिखा था, 'श्री नारायण गुरु को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि! एक महान समाज सुधारक, आध्यात्मिक नेता और विचारक के तौर पर, उन्होंने अपना जीवन सम्मान और करुणा पर आधारित समाज बनाने में समर्पित कर दिया। उनके विचारों ने अनगिनत लोगों को ताकत दी। शिक्षा और ज्ञान पर उनका ज़ोर भी उतना ही उल्लेखनीय था।'
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन की श्रद्धांजलि
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी एक्स पर दोनों महापुरुषों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। श्री नारायण गुरु के बारे में उन्होंने लिखा, 'श्रद्धेय संत, दार्शनिक और अग्रणी समाज सुधारक श्री नारायण गुरु को उनकी जयंती पर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि। अपनी गहरी आध्यात्मिक समझ और समानता व मानवीय गरिमा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के ज़रिए, उन्होंने पीढ़ियों को भेदभाव से ऊपर उठने और करुणा, ज्ञान व सद्भाव पर आधारित समाज के निर्माण के लिए प्रेरित किया।'
महात्मा अय्यंकाली के संदर्भ में उपराष्ट्रपति ने कहा, 'महात्मा अय्यंकाली को उनकी जयंती पर सादर श्रद्धांजलि। एक अग्रणी समाज सुधारक और दूरदर्शी नेता के तौर पर, उन्होंने अपना जीवन शोषितों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा, शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने और सामाजिक न्याय व समानता को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित कर दिया।'
दोनों महापुरुषों की विरासत का महत्व
गौरतलब है कि महात्मा अय्यंकाली और श्री नारायण गुरु दोनों केरल के सामाजिक-सुधार आंदोलन के स्तंभ रहे हैं। अय्यंकाली ने 19वीं और 20वीं सदी के संधिकाल में दलित समुदायों को संगठित कर उनके लिए शिक्षा और सार्वजनिक स्थानों तक पहुँच की लड़ाई लड़ी, जबकि श्री नारायण गुरु ने जाति-भेद को नकारते हुए 'एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर' का संदेश दिया। यह ऐसे समय में आया है जब देश सामाजिक समरसता और समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ने पर विमर्श कर रहा है।
आगे की दिशा
इन महापुरुषों की जयंती पर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर आसीन नेताओं का इस प्रकार श्रद्धांजलि अर्पित करना, उनकी विरासत को राष्ट्रीय विमर्श में जीवंत रखने की परंपरा को आगे बढ़ाता है। सामाजिक न्याय और समानता के उनके आदर्श आज भी नीति-निर्माण और सामाजिक चेतना को दिशा देते हैं।