पीएम स्वनिधि योजना के 6 साल: त्राल से पानीपत तक लाखों रेहड़ी-पटरी वालों की बदली तकदीर
सारांश
मुख्य बातें
पीएम स्वनिधि योजना ने 1 जून 2020 को शुरू होने के बाद से अपने 6 वर्षों में देश भर के लाखों छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों के जीवन में उल्लेखनीय बदलाव लाया है। जम्मू-कश्मीर के त्राल से लेकर मध्य प्रदेश के नीमच और हरियाणा के पानीपत तक, इस योजना की सफलता की ज़मीनी कहानियाँ सामने आ रही हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 अक्टूबर को अपने सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे करने वाले हैं।
जम्मू-कश्मीर: कारोबार का नया भरोसेमंद जरिया
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल क्षेत्र के स्ट्रीट वेंडर्स ने बताया कि पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत मिली आर्थिक सहायता उनके छोटे कारोबार के लिए बेहद लाभकारी साबित हुई है। वेंडर्स ने कश्मीर के युवाओं से अपील की है कि वे इस ऋण सुविधा का लाभ उठाकर अपना कारोबार शुरू करें या मौजूदा व्यवसाय को मज़बूत बनाएँ। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और स्थानीय नगर पालिका कर्मचारियों का आभार जताया, जिन्होंने इस योजना को ज़मीनी स्तर तक पहुँचाया।
नीमच में 11,000 वेंडर्स को मिला लाभ, महिलाएँ बनीं आत्मनिर्भर
मध्य प्रदेश के नीमच नगर पालिका में योजना का क्रियान्वयन विशेष रूप से प्रभावशाली रहा है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) दुर्गा बामनिया ने बताया, 'कोरोना काल में स्ट्रीट वेंडर्स और छोटे फुटकर व्यापारियों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा पीएम स्वनिधि योजना लागू की गई थी। नीमच नगर पालिका में इस योजना के तहत लगभग 15,000 का लक्ष्य था और हमने आज तक 11,000 स्ट्रीट वेंडर्स को इसका लाभ दे दिया है।'
बामनिया के अनुसार, योजना के पहले चरण में ₹15,000, दूसरे चरण में ₹25,000 और तीसरे चरण में ₹50,000 का ऋण दिया जाता है। समय पर ऋण चुकाने के बाद अब क्रेडिट कार्ड का विकल्प भी उपलब्ध है और नगर पालिका अब तक लगभग 40 क्रेडिट कार्ड वितरित कर चुकी है।
महिला लाभार्थी प्रियंका जैन ने बताया, 'मुझे नगर पालिका से ₹10,000 के ऋण की मदद मिली। उस लोन से मैंने अगरबत्ती का कच्चा माल मंगवाकर नया काम शुरू किया।' एक अन्य लाभार्थी रेखा प्रजापति ने बताया, 'मुझे पीएम स्वनिधि के तहत ₹10,000 का लोन मिला, जिससे मैं मिट्टी के बर्तन—करवे, कलश, मटकी, मूर्तियाँ, दीपक—बनाने और बेचने का काम बढ़ा रही हूँ।' उन्होंने जोड़ा कि पहले वह घर पर ही रहती थीं, अब बाहर निकलने और कमाने का अवसर मिला है।
लाभार्थी गोपाल कृष्ण छाबड़ा ने बताया कि उन्होंने पहले ₹10,000 का ऋण समय पर चुकाया और अब ₹25,000 का लोन लेकर अपने खड़ा मसाला व्यवसाय का विस्तार किया है।
पानीपत: रेहड़ी से आत्मनिर्भरता की राह
हरियाणा के पानीपत में सब्ज़ी विक्रेता गोविंद की कहानी प्रेरणादायक है। लॉकडाउन से पहले मज़दूरी करने वाले गोविंद ने लॉकडाउन के बाद सब्ज़ी रेहड़ी शुरू की। उन्हें योजना के तहत पहले ₹10,000, फिर ₹20,000 और बाद में ₹50,000 का ऋण मिला। वह रोज़ दोपहर 3 बजे से रात 10 बजे तक रेहड़ी लगाते हैं और सभी खर्च निकालने के बाद ₹10,000 से ₹15,000 मासिक बचत करते हैं। इसी से ₹3,100 की मासिक किस्त और आठ सदस्यों के परिवार का खर्च चलता है।
गोविंद ने बताया कि उनके काम की सराहना में उन्हें गणतंत्र दिवस पर प्रधानमंत्री से मिलने के लिए दिल्ली बुलाया गया था और तीन बार फोन भी आया, लेकिन काम की व्यस्तता के चलते वह नहीं जा सके।
इसी शहर में सुनीता ने पहले चाय की रेहड़ी शुरू की, फिर दोबारा लोन लेकर चाउमीन की रेहड़ी लगाई। उन्होंने 2024 में ₹50,000 का ऋण लिया और सभी किस्तें समय पर चुका रही हैं। सुनीता के अनुसार, अब रेहड़ी से बच्चों का खर्च और दुकान दोनों निकल जाते हैं।
योजना का ढाँचा और लाभ
पीएम स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) का उद्देश्य उन छोटे व्यापारियों को संस्थागत ऋण सुविधा देना है जो अनौपचारिक क्षेत्र में काम करते हैं और बैंकिंग प्रणाली से बाहर रहते हैं। यह ऐसे समय में आया था जब कोरोना महामारी के कारण इन वर्गों की आजीविका पूरी तरह प्रभावित हो गई थी। योजना विशेष रूप से महिला उद्यमियों के लिए आत्मनिर्भरता का माध्यम बनी है — चूड़ी, मनिहारी, कढ़ाई-बुनाई और फूल-माला जैसे परंपरागत महिला व्यवसायों को इससे नई ऊर्जा मिली है।
आगे क्या
योजना के चरणबद्ध ऋण ढाँचे और अब क्रेडिट कार्ड के विकल्प के साथ, छोटे व्यापारियों की औपचारिक वित्तीय प्रणाली में भागीदारी बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना का विस्तार ग्रामीण क्षेत्रों और कस्बों तक और व्यापक स्तर पर हो, तो यह अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।