पीएमजीएसवाई: वित्त वर्ष 2027 में 26,474 किमी ग्रामीण सड़कें बनाने का लक्ष्य, ₹18,907 करोड़ का बजट आवंटित
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) और अन्य ग्रामीण संपर्क परियोजनाओं के अंतर्गत 26,474 किलोमीटर नई ग्रामीण सड़कों के निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके लिए ₹18,907 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया है। इस महत्वाकांक्षी पहल का मुख्य उद्देश्य देश के दूरदराज और अब तक सड़क संपर्क से वंचित क्षेत्रों को हर मौसम में सुलभ सड़क सुविधा से जोड़ना है।
उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 18 जून को पीएमजीएसवाई और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क परियोजना (आरसीपीएलडब्ल्यूईए) की प्रगति की समीक्षा हेतु एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता ग्रामीण विकास विभाग के सचिव रोहित कंसल ने की। इसमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, राजस्थान और तेलंगाना सहित कई राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में वित्त वर्ष 2026-27 के लक्ष्यों और राज्यों में जारी निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। विशेष रूप से उन गाँवों और बस्तियों पर ध्यान केंद्रित किया गया जो अब तक सड़क नेटवर्क से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं।
पीवीटीजी और वंचित बस्तियों पर विशेष जोर
केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया कि पीएमजीएसवाई और पीएम-जनमन योजना के अंतर्गत शेष असंबद्ध बस्तियों को प्राथमिकता के आधार पर जोड़ा जाए। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) की बस्तियों तक सड़क पहुँच सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार आदिवासी कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
राज्यों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी लाने, निर्माण बाधाओं को दूर करने और लंबित परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए।
वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सड़क विकास
बैठक में वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) प्रभावित क्षेत्रों में जारी सड़क संपर्क परियोजनाओं की भी विस्तृत समीक्षा की गई। सरकार के अनुसार, इन क्षेत्रों में सड़क बुनियादी ढाँचे का विकास सुरक्षा, प्रशासनिक पहुँच और समावेशी विकास तीनों दृष्टिकोणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्यों को संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाकर स्वीकृत परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए गए।
गुणवत्ता और डिजिटल निगरानी पर बल
सचिव रोहित कंसल ने बैठक में स्पष्ट किया कि ग्रामीण सड़कों की मजबूती और दीर्घकालिक रखरखाव उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उनका निर्माण। उन्होंने राज्यों से गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन करने, फील्ड निरीक्षण बढ़ाने और निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ बनाने का आह्वान किया।
बैठक में ई-मार्ग (इलेक्ट्रॉनिक मेंटेनेंस ऑफ रूरल रोड्स अंडर पीएमजीएसवाई) डिजिटल प्लेटफॉर्म के व्यापक उपयोग पर भी जोर दिया गया। यह प्रणाली ग्रामीण सड़कों के रखरखाव, प्रदर्शन मूल्यांकन और भुगतान की रियल-टाइम निगरानी सक्षम करती है। सरकार का मानना है कि इसके प्रभावी उपयोग से पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
राज्यों की प्रतिबद्धता और आगे की राह
सभी भाग लेने वाले राज्यों ने मंत्रालय को आश्वस्त किया कि लंबित परियोजनाओं और वार्षिक निर्माण लक्ष्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाएगा। गौरतलब है कि पीएमजीएसवाई वर्ष 2000 से लागू है और अब तक लाखों किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण में इसकी निर्णायक भूमिका रही है। वित्त वर्ष 2026-27 के लक्ष्य इस योजना की गति और महत्वाकांक्षा दोनों को नई ऊँचाई देते हैं।