4 सितंबर 2026
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पीएमओ अधिकारी बनकर एम्स में मरीज भर्ती कराने का मामला, सीबीआई ने रवि कांत शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की

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पीएमओ अधिकारी बनकर एम्स में मरीज भर्ती कराने का मामला, सीबीआई ने रवि कांत शर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की

सारांश

दिल्ली के रवि कांत शर्मा ने पीएमओ का ओएसडी बनकर एम्स के प्रोटोकॉल अधिकारी पर दबाव डाला और मरीजों को प्राथमिकता से भर्ती कराया। पीएमओ ने उसके दावे को सिरे से नकारा। सीबीआई ने 31 अगस्त को एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।

मुख्य बातें

सीबीआई ने रवि कांत शर्मा के खिलाफ 31 अगस्त 2026 को धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं में एफआईआर दर्ज की।
शर्मा ने खुद को प्रधानमंत्री का ओएसडी बताकर एम्स, नई दिल्ली के प्रोटोकॉल ऑफिसर बी.एन.
आचार्य पर दबाव डाला।
मरीज मोहम्मद इमरान को एम्स इमरजेंसी में प्राथमिकता से भर्ती कराया गया; कविता और अर्चना के मामलों में भी हस्तक्षेप का आरोप।
पीएमओ ने स्पष्ट किया कि शर्मा कभी भी पीएमओ में ओएसडी के पद पर नहीं था।
शिकायत मई 2026 में पीएमओ के असिस्टेंट डायरेक्टर द्वारा दर्ज कराई गई थी।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली के रवि कांत शर्मा के खिलाफ 31 अगस्त 2026 को एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि उसने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का अधिकारी बताकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर भर्ती कराने के लिए दबाव डाला। यह मामला धोखाधड़ी, झूठे साक्ष्य प्रस्तुत करने और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।

मामले का घटनाक्रम

मई 2026 में पीएमओ के एक असिस्टेंट डायरेक्टर ने सीबीआई को लिखित शिकायत दी, जिसमें रवि कांत शर्मा पर पीएमओ के नाम का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया। शिकायत के अनुसार, 26 फरवरी 2026 को शर्मा ने व्हाट्सएप के माध्यम से एम्स के प्रोटोकॉल ऑफिसर बी.एन. आचार्य से संपर्क किया और खुद को प्रधानमंत्री का 'ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी' (ओएसडी) बताया।

अपना प्रभाव जमाने के लिए शर्मा ने एम्स अधिकारियों को अपना ईमेल पता और पीएमओ पोर्टल का विवरण भी साझा किया, जिससे अधिकारियों को यह विश्वास हो गया कि वह वास्तव में पीएमओ से अधिकृत व्यक्ति हैं।

मरीज को प्राथमिकता दिलाने का दबाव

सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, शर्मा ने पीएमओ के कथित आधिकारिक रेफरल का हवाला देकर प्रोटोकॉल ऑफिसर बी.एन. आचार्य पर दबाव डाला कि मोहम्मद इमरान नाम के मरीज को एम्स के इमरजेंसी विभाग में प्राथमिकता के आधार पर भर्ती और इलाज दिलाया जाए। एफआईआर में यह भी उल्लेख है कि शर्मा ने कविता और अर्चना सहित अन्य मरीजों के मामलों में भी इसी प्रकार अवैध हस्तक्षेप की कोशिश की थी।

पीएमओ की आधिकारिक पुष्टि

पीएमओ ने स्पष्ट रूप से पुष्टि की है कि रवि कांत शर्मा नाम का कोई भी व्यक्ति प्रधानमंत्री के ओएसडी के रूप में कभी कार्यरत नहीं था। एफआईआर में यह भी दर्ज है कि एम्स में जो विशेष सुविधा दी गई, वह केवल इस भ्रम में दी गई थी कि आरोपी पीएमओ का अधिकृत प्रतिनिधि है।

सीबीआई की जांच और आगे की कार्रवाई

शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने प्रारंभिक जांच की और 31 अगस्त 2026 को औपचारिक एफआईआर दर्ज की। यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि इसमें एक प्रतिष्ठित सरकारी संस्थान की साख और संवेदनशील चिकित्सा सेवाओं का दुरुपयोग किया गया। गौरतलब है कि एम्स जैसे संस्थानों में बेड की कमी के बीच प्राथमिकता प्रवेश की व्यवस्था का इस तरह फर्जी तरीके से इस्तेमाल आम नागरिकों के अधिकारों पर सीधा असर डालता है। अब देखना होगा कि सीबीआई अपनी जांच में शर्मा के और कितने मामलों का पर्दाफाश करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सवाल सिर्फ आरोपी की नीयत पर नहीं, बल्कि एम्स की सत्यापन प्रक्रिया पर भी उठता है। यह पहली बार नहीं है कि सरकारी पहचान का दुरुपयोग कर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं तक अनुचित पहुंच बनाई गई हो — लेकिन पीएमओ जैसे शीर्ष कार्यालय के नाम का इस्तेमाल इसे कहीं अधिक गंभीर बनाता है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रवि कांत शर्मा पर सीबीआई ने क्या आरोप लगाए हैं?
रवि कांत शर्मा पर आरोप है कि उसने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय का ओएसडी बताकर एम्स, नई दिल्ली में मरीजों को प्राथमिकता से भर्ती कराया। सीबीआई ने 31 अगस्त 2026 को उसके खिलाफ धोखाधड़ी, झूठे साक्ष्य और आईटी एक्ट की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।
क्या रवि कांत शर्मा वास्तव में पीएमओ में कार्यरत था?
नहीं। पीएमओ ने स्पष्ट रूप से पुष्टि की है कि रवि कांत शर्मा नाम का कोई भी व्यक्ति प्रधानमंत्री के ओएसडी के रूप में कभी कार्यरत नहीं था। शर्मा का पीएमओ से कोई आधिकारिक संबंध नहीं था।
एम्स में किन मरीजों को इस धोखाधड़ी से फायदा मिला?
एफआईआर के अनुसार, मोहम्मद इमरान नाम के मरीज को एम्स के इमरजेंसी विभाग में प्राथमिकता के आधार पर भर्ती कराया गया। इसके अलावा कविता और अर्चना के मामलों में भी शर्मा ने इसी तरह अवैध हस्तक्षेप की कोशिश की, जैसा कि सीबीआई की जांच में सामने आया।
यह शिकायत सबसे पहले किसने और कब दर्ज कराई?
मई 2026 में पीएमओ के एक असिस्टेंट डायरेक्टर ने रवि कांत शर्मा के खिलाफ लिखित शिकायत दी। इसके बाद सीबीआई ने जांच की और 31 अगस्त 2026 को औपचारिक एफआईआर दर्ज की।
शर्मा ने एम्स अधिकारियों को कैसे प्रभावित किया?
शर्मा ने 26 फरवरी 2026 को व्हाट्सएप के जरिए एम्स के प्रोटोकॉल ऑफिसर बी.एन. आचार्य से संपर्क किया, अपना ईमेल पता और पीएमओ पोर्टल का विवरण साझा किया, और पीएमओ के आधिकारिक रेफरल का बहाना बनाकर दबाव डाला। इस भ्रम में एम्स अधिकारियों ने विशेष सुविधा दी।
राष्ट्र प्रेस
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