प्रतापगढ़ इंस्पेक्टर अनिल कुमार हत्याकांड: सीबीआई कोर्ट ने बोचा उर्फ राजू सोनी को सुनाई 10 साल की सज़ा
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ की विशेष सीबीआई अदालत ने 23 अक्टूबर 2026 को प्रतापगढ़ इंस्पेक्टर अनिल कुमार हत्याकांड में मुख्य आरोपी बोचा उर्फ राजू सोनी को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹9,000 के जुर्माने की सज़ा सुनाई। करीब 11 साल पुराने इस मामले में अब दोनों आरोपियों को अदालत से सज़ा मिल चुकी है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 19 नवंबर 2015 का है, जब प्रतापगढ़ कोतवाली के तत्कालीन स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) इंस्पेक्टर अनिल कुमार की शहर के होटल वैष्णवी की मॉडल शॉप पर हत्या कर दी गई थी। जाँच में यह मामला हत्या की बजाय गैर इरादतन हत्या का पाया गया, जो अपने आप में इस केस का एक महत्त्वपूर्ण कानूनी पहलू रहा।
गौरतलब है कि मामला शुरुआत में कोतवाली सिटी थाना, प्रतापगढ़ में दर्ज था। बाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ के आदेश पर 29 जून 2018 को केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने यह केस अपने हाथ में ले लिया।
मुख्य घटनाक्रम
विस्तृत जाँच के बाद सीबीआई ने जिशान खान और बोचा उर्फ राजू सोनी के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की। अदालत ने 14 दिसंबर 2022 को दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए।
मुकदमे के दौरान सह-आरोपी जिशान खान ने 4 अप्रैल 2026 को अदालत में लिखित रूप से अपना अपराध स्वीकार कर लिया, जिसके बाद उसकी फ़ाइल अलग कर दी गई। स्पेशल सीबीआई कोर्ट, लखनऊ ने 2 मई 2026 को जिशान खान को भी 10 साल की कैद और ₹9,000 जुर्माने की सज़ा सुनाई थी।
अदालत का फैसला
लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद स्पेशल जज, सीबीआई कोर्ट, लखनऊ ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को मुख्य आरोपी बोचा उर्फ राजू सोनी को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कारावास और ₹9,000 के जुर्माने की सज़ा सुनाई। अभियोजन पक्ष ने अदालत में आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए थे।
मामले का महत्त्व
यह ऐसे समय में आया है जब पुलिसकर्मियों पर हमले और उनकी सुरक्षा को लेकर देश भर में बहस छिड़ी हुई है। एक SHO की हत्या के मामले में अंततः सज़ा मिलना कानूनी प्रक्रिया की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, हालाँकि 11 वर्षों का लंबा समय न्याय-वितरण की गति पर सवाल भी उठाता है।
आलोचकों का कहना है कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में जाँच से लेकर फैसले तक का समय कम होना चाहिए ताकि न्याय समयबद्ध तरीके से मिल सके। सीबीआई की जाँच और अभियोजन की सफलता इस मामले में एक सकारात्मक पहलू रही।
आगे क्या
दोनों दोषियों — जिशान खान और बोचा उर्फ राजू सोनी — को अब 10-10 साल की सज़ा सुनाई जा चुकी है। यह देखना अभी बाकी है कि आरोपी पक्ष उच्च न्यायालय में अपील करते हैं या नहीं। मामले की परिणति से प्रतापगढ़ और आसपास के क्षेत्र में न्यायिक प्रक्रिया में जन-विश्वास को बल मिलने की उम्मीद है।