प्रवीण चक्रवर्ती तमिलनाडु से राज्यसभा में निर्विरोध निर्वाचित होने की राह पर, 11 जून को होगी घोषणा
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता प्रवीण चक्रवर्ती तमिलनाडु से राज्यसभा की रिक्त सीट पर निर्विरोध निर्वाचित होने की स्थिति में हैं। चुनाव आयोग द्वारा 18 जून को उपचुनाव की घोषणा के बाद नामांकन प्रक्रिया में कुल 14 उम्मीदवार सामने आए, लेकिन केवल चक्रवर्ती को सत्तारूढ़ गठबंधन का समर्थन प्राप्त है।
नामांकन प्रक्रिया और स्थिति
नामांकन प्रक्रिया 1 जून को शुरू हुई और सोमवार को समाप्त हुई। चक्रवर्ती के अलावा शेष 13 उम्मीदवारों ने स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में पर्चे दाखिल किए। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, इन स्वतंत्र उम्मीदवारों के नामांकन की जांच में पास होने की संभावना नहीं है, क्योंकि उनमें से किसी का भी नाम तमिलनाडु विधानसभा के किसी सदस्य द्वारा प्रस्तावित नहीं किया गया था — जो राज्यसभा चुनाव के लिए अनिवार्य शर्त है।
नामांकन पत्रों की जांच मंगलवार को होनी है। 11 जून को नामांकन वापसी की अंतिम तिथि के बाद चक्रवर्ती को औपचारिक रूप से निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जाने की उम्मीद है।
तमिलनाडु में नई राजनीतिक व्यवस्था
यह घटनाक्रम तमिलनाडु की बदली हुई राजनीतिक तस्वीर का परिणाम है। हालिया विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के साथ दशकों पुराना गठबंधन समाप्त कर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की तमिलगा वेट्री कज़गम (TVK) के नेतृत्व वाली सरकार के साथ नया गठबंधन किया। इस नई व्यवस्था के तहत कांग्रेस को विजय मंत्रिमंडल में दो मंत्री पद प्राप्त हुए।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता एस. राजेश कुमार और पी. विश्वनाथन को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया, जिससे पार्टी को राज्य प्रशासन में प्रत्यक्ष भागीदारी मिली।
TVK का कांग्रेस को समर्थन — गठबंधन को मजबूती का संकेत
गौरतलब है कि राज्यसभा की यह सीट तब रिक्त हुई जब TVK को उम्मीदवार नामित करने का अधिकार होने के बावजूद उसने कांग्रेस का समर्थन करने का निर्णय लिया। इस कदम को व्यापक रूप से मुख्यमंत्री विजय द्वारा राष्ट्रीय पार्टी के साथ सहयोग को और गहरा करने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस के लिए क्या मायने रखता है यह निर्वाचन
चक्रवर्ती के निर्विरोध निर्वाचन के साथ कांग्रेस को तमिलनाडु में तीन मोर्चों पर उपस्थिति मिलेगी — दो कैबिनेट मंत्री, राज्यसभा में एक सांसद, और TVK के साथ सुदृढ़ गठबंधन। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी दक्षिण भारत में अपनी स्थिति पुनः मजबूत करने की कोशिश में है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्रीय संसदीय मंच पर चक्रवर्ती तमिलनाडु की नई सरकार के एजेंडे को किस रूप में आगे बढ़ाते हैं।