प्रधानमंत्री मोदी का बयान: महिलाओं के लिए विधायी संस्थाओं में आरक्षण का समय आ गया है
सारांश
Key Takeaways
- महिलाओं के लिए आरक्षण की आवश्यकता अब समय की मांग है।
- इससे लोकतंत्र को मजबूती मिलेगी।
- प्रधानमंत्री मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक के महत्व पर जोर दिया है।
- संसद की ऐतिहासिक बैठक 16 अप्रैल को होगी।
- महिलाओं की भागीदारी को सशक्त बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
नई दिल्ली, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक पर गुरुवार को कहा कि महिलाओं के लिए विधायी संस्थाओं में आरक्षण की आवश्यकता अब समय की मांग बन चुकी है। इस आरक्षण को लागू करने में किसी भी प्रकार की देरी को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण माना जाएगा। इसके साथ ही, पीएम मोदी ने इस विधेयक पर अपने विचार भी साझा किए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "महिलाओं के लिए विधायी संस्थाओं में आरक्षण एक अत्यावश्यक कदम है। इससे हमारे लोकतंत्र को और अधिक जीवंतता और सहभागिता मिलेगी। इस आरक्षण को लागू करने में कोई भी देरी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण होगी। इसी विषय पर मैंने अपने विचार इस लेख में साझा किए हैं।"
पीएम मोदी ने यह लेख अपनी आधिकारिक वेबसाइट 'नरेंद्र मोदी.इन' पर लिखा है। इसमें उन्होंने कहा, "21वीं सदी की विकास यात्रा में हमारा भारत एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण की ओर बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में हम अपने लोकतंत्र को और मजबूत करने वाली एक बड़ी पहल के साक्षी बनने वाले हैं। यह एक ऐसा अवसर है, जब समानता, समावेशन और जनभागीदारी के प्रति हमारी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता एक नए रूप में सामने आएगी। यह हमारे संसद का एक महत्वपूर्ण दायित्व है, जो नारी शक्ति को नई ऊर्जा देगा और विधायिकाओं में महिलाओं का उचित स्थान सुनिश्चित करेगा।"
उन्होंने आगे कहा कि यह क्षण इसलिए भी विशेष है, क्योंकि यह ऐसे समय में आ रहा है जब देश का वातावरण उत्सव, नवीनता और सकारात्मकता से भरा हुआ है। आने वाले दिनों में भारत के विभिन्न हिस्सों में अनेक पर्व मनाए जाएंगे। असम के लोग रोंगाली बिहू मनाने वाले हैं, और ओडिशा में महा बिशुबा पणा संक्रांति का उत्सव मनाया जाएगा। पश्चिम बंगाल में पोइला बैशाख के साथ बंगाली नववर्ष की शुरुआत होगी। केरलम में विषु पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा। तमिलनाडु के लोग उत्सुकता से पुथांडु की प्रतीक्षा कर रहे हैं, तो पंजाब और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में लोग बैसाखी का पर्व मनाने के लिए तैयार हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि हमारे ये पावन पर्व हर किसी में एक नई आशा का संचार करते हैं। उन्होंने भारत के साथ-साथ दुनियाभर में इन त्योहारों को मनाने वाले सभी लोगों को शुभकामनाएं दीं। इसके साथ ही, उन्होंने कामना की कि ये दिव्य और पावन अवसर हम सभी के जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आएं।
अपने लेख में पीएम मोदी ने लिखा, "इसी दौरान 11 अप्रैल से महात्मा फुले की 200वीं जयंती के समारोह भी शुरू होंगे। 14 अप्रैल को हम भारतवासी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती मनाएंगे। ये दोनों तिथियां हमें सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा के उन मूल्यों की याद दिलाती हैं, जिन्होंने आधुनिक भारत की दिशा तय की है। इन्हीं प्रेरणादायी अवसरों के बीच, 16 अप्रैल को संसद की ऐतिहासिक बैठक होगी। महिला आरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के बाद इसे पारित कराने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है। इसे केवल एक विधायी प्रक्रिया कहना इसके महत्व को कम करके आंकना होगा। यह भारत की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।"
नारी शक्ति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारी नारीशक्ति देश की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है। आज देश के हर क्षेत्र में नारीशक्ति मिसाल बन रही है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी से लेकर उद्यमिता तक, खेल के मैदान से लेकर सशस्त्र बलों तक और संगीत से लेकर कला के क्षेत्र में महिलाएं अपनी सशक्त पहचान बना रही हैं। हमारी माताएं-बहनें और बेटियां देश की प्रगति में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।"
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि हमारे पारंपरिक मूल्य बताते हैं कि कोई भी समाज तभी प्रगति करता है, जब माताओं-बहनों को आगे बढ़ने के अधिक से अधिक मौके मिलते हैं। इसी सोच के साथ पिछले 11 वर्षों में महिला सशक्तिकरण के लिए एक अनुकूल माहौल बनाने पर जोर दिया गया है। इसके लिए निरंतर प्रयास किए गए हैं। शिक्षा तक बढ़ती पहुंच, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, वित्तीय समावेशन में बढ़ोतरी और बुनियादी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच ने महिलाओं की भागीदारी को मजबूत किया है।
उन्होंने अपने लेख में आगे कहा, "लेकिन यह भी सच्चाई है कि इन सारे प्रयासों के बावजूद भी राजनीति और विधायी संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व समाज में उनकी भूमिका के अनुरूप नहीं रहा है। इस कमी को अब दूर किया जाना चाहिए, क्योंकि जब महिलाएं प्रशासन चलाने और निर्णय लेने में हिस्सा लेती हैं, तो उनका अनुभव और दृष्टि बहुत काम आती है। इससे चर्चा समृद्ध होती है और गवर्नेंस की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना केवल प्रतिनिधित्व का विषय नहीं है, यह हमारे लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील, संतुलित और उत्तरदायी बनाने का प्रयास है।"
उन्होंने लिखा, "पिछले कई दशकों में लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं को उचित स्थान दिलाने के लिए बार-बार प्रयास हुए हैं। समितियां गठित की गईं, विधेयकों के मसौदे प्रस्तुत किए गए, लेकिन वे कभी पारित नहीं हो सके। फिर भी, इस बात पर व्यापक सहमति रही है कि विधायी निकायों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए। सितंबर 2023 में संसद ने सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था। यह मेरे जीवन के सबसे विशेष अवसरों में से एक रहा है। अब जरूरत है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और आने वाले समय में राज्यों के विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के प्रावधानों के साथ कराए जाएं।"
'नरेंद्र मोदी.इन' वेबसाइट पर लिखे अपने लेख में आरक्षण को लेकर पीएम मोदी ने आगे कहा, "महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने का यह अवसर हमारे संविधान की मूल भावना के साथ गहराई से जुड़ा है। हमारे संविधान निर्माताओं ने एक ऐसे समाज की कल्पना की थी, जहां समानता न केवल संविधान में निहित हो, बल्कि उसे व्यवहार में भी लाया जाए। विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करना, उस परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह एक ऐसे समाज के निर्माण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसमें राष्ट्र का भविष्य तय करने में प्रत्येक नागरिक की समान भूमिका हो।"
प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, "अब इस निर्णय को और टाला नहीं जा सकता। दशकों से इसकी आवश्यकता महसूस की गई है। इस पर चर्चा हुई है, इसे बार-बार दोहराया गया है। अगर अब भी हम इसे आगे टालते हैं, तो इसका अर्थ यही होगा कि हम उस असंतुलन को और लंबा खींच रहे हैं, जिसे हम पहचानते भी हैं और सुधारने की क्षमता भी रखते हैं। आज भारत आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इसलिए यह आवश्यक है कि हमारी संस्थाएं सभी नागरिकों, विशेष रूप से हमारी आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली महिलाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करें। इससे न केवल दशकों पुराना संकल्प पूरा होगा, बल्कि विकास की गति को बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। यह हमारे लोकतंत्र को अधिक उत्तरदायी बनाने और भविष्य के अनुरूप तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।"
उन्होंने कहा कि यह समय सामूहिक संकल्प का है। यह किसी एक सरकार, एक पार्टी या एक व्यक्ति का विषय नहीं है। यह पूरे राष्ट्र का विषय है। हमें मिलकर इस कदम के महत्व को समझना है और मिलकर ही इसे साकार करना है। यही हमारी नारी शक्ति के प्रति हमारा दायित्व भी है, इसलिए महिला आरक्षण बिल को पारित कराने के लिए सहमति बहुत आवश्यक है। इसे बड़े राष्ट्रीय हित के दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। ऐसे अवसर हमें यह याद दिलाते हैं कि कुछ फैसले अपने समय से बड़े होते हैं। वे आने वाली पीढ़ियों की दिशा तय करते हैं। ये हमें याद दिलाते हैं कि लोकतंत्र की असली ताकत समय के साथ खुद को और अधिक न्यायपूर्ण और अधिक समावेशी बनाने की क्षमता में होती है।
अपने लेख के अंत में पीएम मोदी ने लिखा, "संसद का यह ऐतिहासिक सत्र करीब आ चुका है। मैं सभी दलों के सांसदों से हमारी नारीशक्ति के लिए इस महत्वपूर्ण कदम का समर्थन करने का आग्रह करता हूं। हम जिम्मेदारी और दृढ़ संकल्प के साथ इस दायित्व को पूरा करें। आइए, हम अपने लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं के अनुरूप इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।"