पृथ्वीराज चव्हाण का केंद्र पर हमला: 'अमित शाह संसद में आएं, माफी मांगें, तानाशाही नहीं चलेगी'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने 9 अगस्त को मुंबई में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र में संसद की कार्यवाही बाधित होने की जिम्मेदारी सरकार की है, क्योंकि गृह मंत्री सदन में जवाब देने से बच रहे हैं। चव्हाण ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युवाओं और विपक्ष की आवाज़ सुनना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है और देश में तानाशाही नहीं चल सकती।
पुलिस कार्रवाई पर सवाल
चव्हाण ने दिल्ली में संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सीधे घेरा। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्री के अधीन काम करती है, इसलिए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई किसके आदेश पर हुई, इसका जवाब शाह को देना होगा।
चव्हाण ने पैलेट गन के इस्तेमाल पर विशेष आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार भीड़ नियंत्रण में पैलेट गन का उपयोग केवल विशेष परिस्थितियों में और उचित स्तर के आदेश पर ही किया जा सकता है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी यही मांग कर रहे हैं कि सरकार सदन में आकर इस विषय पर जवाब दे।
भागवत और शाह की तुलना
चव्हाण ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के छात्रों से संवाद का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि भागवत जेन-ज़ी की भाषा में युवाओं से जुड़ने का प्रयास कर सकते हैं, तो गृह मंत्री को भी छात्रों और विपक्ष के सवालों का सदन में जवाब देना चाहिए। उन्होंने भागवत से सीधी अपील करते हुए कहा कि वे अमित शाह को संसद में जाकर माफी माँगने के लिए कहें।
चव्हाण ने यह भी सवाल उठाया कि जिन नेताओं ने छात्रों को कथित तौर पर 'राष्ट्रविरोधी' बताया, क्या भागवत उनके बारे में भी कुछ कहेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रात में वीडियो जारी कर छात्रों से संवाद का प्रयास किया, लेकिन संसद में जवाबदेही से बचा जा रहा है।
छात्र आंदोलन की विशेषता
चव्हाण ने मौजूदा छात्र आंदोलन को पहले के आंदोलनों से अलग बताया। उनके अनुसार यह आंदोलन किसी जाति, राज्य, आयु वर्ग या आर्थिक हित से नहीं जुड़ा, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की व्यापक माँग पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन की व्यापकता की उम्मीद भारतीय जनता पार्टी (BJP) और संघ को भी नहीं थी, और इसीलिए भाजपा 'पैनिक मोड' में आ गई।
गौरतलब है कि किसान आंदोलन सहित पिछले कई आंदोलनों को सरकार ने किसी न किसी रूप में नियंत्रित करने में सफलता पाई थी। चव्हाण के अनुसार छात्रों का यह आंदोलन उन सबसे भिन्न है क्योंकि इसका आधार सार्वभौमिक है।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर आरोप
चव्हाण ने महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इस पूरी कवायद के पीछे असली मकसद संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत हासिल करना है, ताकि संविधान में बड़े बदलाव किए जा सकें। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार महिला आरक्षण का बहाना बनाकर परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
चव्हाण ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण की अवधारणा कांग्रेस लेकर आई थी और 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया था। जब वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे, तब राज्य में महिलाओं के लिए आरक्षण बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया गया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सरकार के महिला आरक्षण विधेयक का स्वागत किया था, लेकिन इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
विपक्ष के अधिकार और लोकतंत्र की रक्षा
चव्हाण ने कहा कि विपक्ष को अपनी राजनीतिक गतिविधियाँ चलाने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। यदि सत्ताधारी पार्टी अपनी शक्ति और धन का दुरुपयोग कर विपक्ष को डराने-धमकाने या बाहुबल से खत्म करने की कोशिश करती है, तो ऐसे व्यवहार को स्वीकार नहीं किया जा सकता। पश्चिम बंगाल में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काफिले पर हुए कथित हमले के बारे में उन्होंने कहा कि उनके पास इस विषय में सीधी जानकारी नहीं है।
चव्हाण ने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि सरकार जनता के सवालों से भाग नहीं सकती — लोकतंत्र में जनता और विपक्ष की आवाज़ सुनी जानी चाहिए, और तानाशाही की सरकार इस देश में नहीं चलेगी।