पुणे 'छात्रों की गूंज': राहुल गांधी लगातार छात्रों से जुड़ रहे हैं — पृथ्वीराज चव्हाण
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने 21 अगस्त को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का पुणे में आयोजित होने वाला 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम कोई नई पहल नहीं है — वे पहले भी कई बार छात्रों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी समस्याएँ समझ चुके हैं। चव्हाण के अनुसार, यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।
जंतर-मंतर से शुरू हुई छात्र-संवाद की पृष्ठभूमि
चव्हाण ने बताया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ पुलिस प्रशासन ने जो कथित दमनकारी व्यवहार किया, उसके बाद से राहुल गांधी लगातार छात्रों के मुद्दों को आवाज़ दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मसले को संसद में भी उठाया गया, लेकिन प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री सदन में अनुपस्थित रहे, जिससे छात्र-केंद्रित चर्चा नहीं हो पाई।
सरकार पर असंवेदनशीलता का आरोप
चव्हाण ने केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों के मुद्दों पर सत्तापक्ष ने असंवेदनशील रुख अपनाया है। उनके शब्दों में, 'विपक्ष का काम है जनता से जुड़े मुद्दे बुलंदी से उठाना, और इस दिशा में हम किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं करेंगे।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कांग्रेस की बैठकों का निर्धारण नहीं करेंगे — पार्टी अपनी रणनीति स्वयं तय करेगी।
पंजाब में बस यात्रा और जनसंपर्क अभियान
चव्हाण ने राहुल गांधी की प्रस्तावित बस यात्रा पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पंजाब में हर संभव तरीके से जनता से जुड़ेगी — चाहे बस यात्रा हो या पद यात्रा। यह टिप्पणी पंजाब में पार्टी की चुनावी तैयारियों के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है।
RSS और देशभक्ति पर तीखी टिप्पणी
बातचीत के अंत में चव्हाण ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग कथित तौर पर अंग्रेज़ों से माफी माँगकर जेल से बाहर आए और जिनके कार्यालय में वर्षों तक तिरंगा नहीं फहराया गया, वे आज देशभक्ति और वंदे मातरम का पाठ पढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। यह टिप्पणी सत्तारूढ़ खेमे की ओर स्पष्ट राजनीतिक संकेत है।
आगे क्या
पुणे का 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम कांग्रेस की व्यापक युवा-संपर्क रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष छात्र आंदोलनों और बेरोज़गारी के मुद्दों को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले हफ्तों में राहुल गांधी के और भी छात्र-संवाद कार्यक्रम होने की संभावना जताई जा रही है।