प्रियंका चतुर्वेदी ने किया निष्पक्ष परिसीमन का आह्वान, राजनीतिक पक्षपात से बचने की आवश्यकता पर जोर

Click to start listening
प्रियंका चतुर्वेदी ने किया निष्पक्ष परिसीमन का आह्वान, राजनीतिक पक्षपात से बचने की आवश्यकता पर जोर

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन की आवश्यकता जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि इस प्रक्रिया में राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। जानिए इस मुद्दे पर उनके विचार क्या हैं।

Key Takeaways

  • प्रियंका चतुर्वेदी ने परिसीमन की मांग की।
  • उन्होंने राजनीतिक हस्तक्षेप से बचने पर ज़ोर दिया।
  • महिला आरक्षण कानून का प्रभाव परिसीमन पर निर्भर करेगा।
  • जनगणना 2026 में शुरू होगी।
  • परिसीमन प्रक्रिया को तेज करने पर चर्चा चल रही है।

नई दिल्ली, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने रविवार को कहा कि प्रभावी प्रतिनिधित्व और विकास को सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन आवश्यक है, परंतु उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस प्रक्रिया से किसी भी प्रकार का अनुचित राजनीतिक लाभ नहीं मिलना चाहिए और इसे पक्षपातपूर्ण विचारों से प्रभावित नहीं होना चाहिए।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में, पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने सांसदों पर बढ़ते बोझ का उल्लेख करते हुए कहा, "परिसीमन की आवश्यकता है। लोकसभा में सांसदों को छह बड़ी आबादी वाले विधानसभा क्षेत्रों में खुद को फैलाना पड़ता है, जिससे विकास कार्यों पर ध्यान भी प्रभावित होता है।" उन्होंने बताया कि परिसीमन के प्रयास पिछले कई वर्षों से बार-बार स्थगित हो रहे हैं और निष्पक्ष प्रक्रिया की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, "परिसीमन लाने के सभी प्रयासों को वर्षों से टलते जाना चाहिए। जब तक हर निर्वाचन क्षेत्र का निष्पक्ष तरीके से सीमांकन नहीं किया जाता (जिससे सत्तारूढ़ पक्ष को असंतुलित लाभ न मिले और न ही इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप हो), तब तक यह प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक है।"

लोकसभा और राज्य विधानसभा सीटों के परिसीमन का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। दरअसल, 1971 की जनगणना के आधार पर लागू की गई संवैधानिक रोक अब खत्म होने की ओर बढ़ रही है।

1 अप्रैल 2026 से जनगणना प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके अपडेट आंकड़े 2027 तक उपलब्ध हो सकते हैं। इसके बाद, कानून के तहत सीमांकन की प्रक्रिया, जिसमें निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण और राज्यों के बीच सीटों का पुनर्वितरण शामिल होता है, आवश्यक हो जाएगी।

परिसीमन पर चल रही बहस का सीधा संबंध महिला आरक्षण कानून से भी है, जिसे औपचारिक रूप से नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 कहा जाता है। यह कानून लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करता है, हालांकि इस कानून का लागू होना अगले जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन की प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने इस कानून का लगातार समर्थन किया है, परंतु उन्होंने यह भी ज़ोर दिया है कि इसे केवल एक दूर के वादे के रूप में न रखा जाए, बल्कि समय पर और प्रभावी तरीके से लागू किया जाए।

वहीं, सरकार के भीतर हालिया चर्चाओं में—जिनमें संशोधन के प्रस्ताव और संसद का विशेष सत्र बुलाने की संभावना भी शामिल है—इस प्रक्रिया के कुछ हिस्सों को परिसीमन से अलग करने या इसे तेज करने के विकल्पों पर विचार किया गया है।

Point of View

लेकिन इसे निष्पक्षता के सिद्धांतों के अनुसार किया जाना चाहिए। यह न केवल राजनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए, बल्कि विकास के लिए भी आवश्यक है।
NationPress
05/04/2026

Frequently Asked Questions

परिसीमन क्या है?
परिसीमन एक प्रक्रिया है जिसके तहत निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को पुनर्निर्धारित किया जाता है।
महिला आरक्षण कानून क्या है?
महिला आरक्षण कानून, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 कहा जाता है, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करता है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने किस विषय पर बात की?
उन्होंने निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन और इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप से बचने की आवश्यकता पर जोर दिया।
परिसीमन कब होगा?
जनगणना के बाद, जो 2026 में शुरू होगी, परिसीमन की प्रक्रिया आवश्यक होगी।
इस विषय पर सरकार की स्थिति क्या है?
सरकार परिसीमन प्रक्रिया को तेज करने और संशोधन के प्रस्तावों पर विचार कर रही है।
Nation Press