प्रियंका चतुर्वेदी ने केरल में मतदान और परिणामों के बीच के लंबे अंतर पर उठाए सवाल

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प्रियंका चतुर्वेदी ने केरल में मतदान और परिणामों के बीच के लंबे अंतर पर उठाए सवाल

सारांश

प्रियंका चतुर्वेदी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए केरल में मतदान और परिणामों के बीच एक महीने के अंतर की ओर ध्यान दिलाया है। उनका कहना है कि यह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है।

Key Takeaways

  • प्रियंका चतुर्वेदी ने चुनाव प्रक्रिया में समय की देरी पर सवाल उठाए।
  • केरल में मतदान और परिणामों के बीच एक महीने का अंतर।
  • चुनाव आयोग की भूमिका पर ध्यान देने की आवश्यकता।
  • लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा का महत्व।
  • विशेष आदेशों के पीछे की राजनीतिक मंशा पर सवाल।

नई दिल्ली, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली में शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हम 'वन नेशन, वन इलेक्शन' की बात करते हैं, लेकिन केरल में मतदान और परिणाम की तारीखों के बीच लगभग एक महीने का अंतर है।

प्रियंका ने कहा कि जब देश में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' जैसे मुद्दों पर चर्चा होती है, तो यह आवश्यक है कि हम लंबी चुनाव प्रक्रिया को कम करने के लिए भी विचार करें। उनके अनुसार, कई बार चुनाव इतने लंबे समय तक चलते हैं कि नई सरकार बनने में भी काफी देरी हो जाती है।

उन्होंने बताया कि केरल में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि उसके परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। उनकी राय में, इतनी लंबी अवधि यह इंगित करती है कि चुनावी प्रक्रिया की योजना में कहीं न कहीं कमी है। यदि चुनाव को बेहतर तरीके से योजना बनाई जाए तो मतदान और नतीजों के बीच का यह लंबा अंतर कम किया जा सकता है।

प्रियंका ने यह भी कहा कि उन्हें चुनाव आयोग से पूरी उम्मीद है कि वह देश में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराएगा। उन्होंने जोर दिया कि यह महत्वपूर्ण है कि किसी भी मतदाता को उसके लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। हर नागरिक का वोट देने का अधिकार सुरक्षित रहना चाहिए और चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह इस अधिकार की रक्षा करे।

उन्होंने आगे कहा कि हाल ही में 5 राज्यों में चुनाव की घोषणा की गई है, जिनमें एक केंद्रशासित प्रदेश और चार राज्य शामिल हैं। लेकिन विशेष आदेश केवल पश्चिम बंगाल के लिए जारी किए जाने से कई सवाल उठते हैं। उनके अनुसार, ऐसा लगता है कि यह कदम किसी विशेष राजनीतिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है।

प्रियंका ने आरोप लगाया कि इससे यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि सत्तारूढ़ दल भाजपा के एजेंडे के अनुसार चुनाव आयोग कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि चाहे जो भी कहा जाए, सच्चाई यह है कि ममता बनर्जी की सरकार एक बार फिर सत्ता में वापसी करेगी।

Point of View

क्योंकि यह लोकतंत्र की नींव को प्रभावित कर सकता है। चुनाव आयोग की योजना में सुधार आवश्यक है ताकि चुनाव प्रक्रिया अधिक प्रभावी और त्वरित हो सके।
NationPress
16/03/2026

Frequently Asked Questions

प्रियंका चतुर्वेदी ने किन मुद्दों पर सवाल उठाए?
उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में देरी और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
केरल में मतदान की तारीख क्या है?
केरल में मतदान 9 अप्रैल को होगा।
नतीजे कब घोषित किए जाएंगे?
केरल के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
प्रियंका चतुर्वेदी का मुख्य चिंता क्या है?
उनकी चिंता यह है कि लंबे चुनावी अंतराल लोकतंत्र पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
क्या चुनाव आयोग निष्पक्ष चुनाव कराने में सक्षम है?
प्रियंका चतुर्वेदी को उम्मीद है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करेगा।
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