नीट विवाद: प्रियंका गांधी ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को बताया 'शर्मनाक', मोदी से सीधे सुनने की अपील
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने 21 जुलाई को केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि 20 जुलाई को नई दिल्ली में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) विवाद के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ पुलिस का व्यवहार 'बेहद शर्मनाक' था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे अपील की कि वे स्वयं छात्रों से मिलें और उनकी समस्याएं सुनें।
मुख्य घटनाक्रम
पत्रकारों से बात करते हुए प्रियंका गांधी ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन कर रहे युवा किसी राजनीतिक एजेंडे से नहीं, बल्कि अपने भविष्य की चिंता से सड़कों पर उतरे हैं। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों और उनके परिवारों की कठिनाइयाँ किसी से छिपी नहीं हैं — पूरा देश इससे परिचित है। 20 जुलाई को दिल्ली में सीजेपी के बैनर तले हुए इस विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई विवाद का केंद्र बन गई।
परीक्षा प्रणाली पर सवाल
प्रियंका गांधी ने कहा कि अनेक परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई और कोचिंग के लिए कर्ज तक लेने को मजबूर हैं। ऐसे में बार-बार परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियाँ और कथित पेपर लीक की घटनाएं इन परिवारों के सपनों पर गंभीर चोट करती हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि वहाँ पेपर लीक मामलों में केवल निचले स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई हुई, जबकि बड़े जिम्मेदारों को बख्श दिया गया — यही कारण है कि ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहती हैं।
मंत्री के इस्तीफे की मांग
छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा माँग रहे हैं। प्रियंका गांधी ने इस माँग को उचित ठहराते हुए कहा कि एक समय था जब प्रशासनिक विफलता की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मंत्री पद छोड़ देते थे, लेकिन अब यह परंपरा लुप्त हो गई है। उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था में व्यापक और प्रभावी सुधार की माँग की।
युवाओं की निराशा और आगे की राह
कांग्रेस सांसद ने कहा कि आज देश का युवा वर्ग गहरी निराशा और आक्रोश में है क्योंकि उसे अपने भविष्य की सुरक्षा को लेकर असुरक्षा का भाव सता रहा है। यह मुद्दा केवल छात्रों तक सीमित नहीं — यह उन लाखों परिवारों का संकट है जो आर्थिक और मानसिक संघर्ष के बीच अपने बच्चों को बेहतर भविष्य दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सरकार पर 'युवा-विरोधी, गरीब-विरोधी और किसान-विरोधी' नीतियाँ अपनाने का आरोप लगाया और माँग की कि सरकार जिम्मेदारी तय करे तथा ऐसे प्रभावी कदम उठाए जिससे भविष्य में इस तरह की परिस्थितियाँ दोबारा न उत्पन्न हों।