प्रियंका गांधी का तीखा हमला: धर्मेंद्र प्रधान का 'सुपरस्टार जैसा' स्वागत शर्मनाक
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने 28 जुलाई को संसद परिसर में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के भव्य स्वागत पर कड़ी आपत्ति जताई। मॉनसून सत्र के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सांसदों ने प्रधान का जोरदार स्वागत किया, जिस पर प्रियंका गांधी ने कहा कि जिन परिस्थितियों में उन्होंने शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था, उसे देखते हुए यह स्वागत 'बेहद शर्मनाक' है — मानो कोई सुपरस्टार संसद पहुँचा हो।
प्रियंका गांधी की तीखी प्रतिक्रिया
प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि सरकार पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि वह आज भी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखे हुए है और उन्हें दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ इंस्टाग्राम हैंडल पर छात्राओं की तस्वीरें पोस्ट कर उनके खिलाफ दावे किए जा रहे हैं। उनके अनुसार, यदि सरकार वास्तव में संवाद के ज़रिए समस्या सुलझाना चाहती है तो उसे छात्रों को निशाना बनाने की बजाय सकारात्मक कदम उठाने चाहिए।
पेपर लीक विधेयक पर विपक्ष की एकजुटता
कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने प्रस्तावित पेपर लीक विधेयक पर कहा कि सभी विपक्षी दल इस मुद्दे पर एकजुट होकर चर्चा कर रहे हैं और सामूहिक निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2024 के NEET पेपर लीक मामले के बाद गठित राधाकृष्णन समिति की कई महत्वपूर्ण सिफारिशें अब तक पूरी तरह लागू नहीं की गई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले में निर्धारित 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं हुई और कथित मास्टरमाइंड जमानत पर बाहर है, जिससे छात्रों का सरकार पर भरोसा कमज़ोर हुआ है।
NDA की 'मंगल मिलन' बैठक पर विवाद
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने NDA की 'मंगल मिलन' बैठक को गैर-कानूनी और असंवैधानिक बताया। उन्होंने कहा कि अदालतें पहले ही संविधान की दसवीं अनुसूची की व्याख्या कर चुकी हैं, जिसमें स्पष्ट है कि केवल राजनीतिक दलों का विलय मान्य है, दलबदल नहीं। उनके अनुसार सरकार संवैधानिक मूल्यों की अनदेखी कर रही है।
सदन की कार्यवाही और विपक्ष के सवाल
संसद की कार्यवाही लगातार बाधित होने पर कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने लोकसभा अध्यक्ष और सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सदन सुचारू रूप से चलाने की ज़िम्मेदारी विपक्ष की नहीं, बल्कि सरकार, स्पीकर और ट्रेजरी बेंच की है। उनके अनुसार सरकार विपक्ष को बाधक दिखाने की कोशिश कर रही है, जबकि सदन का संचालन प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहा।
आगे की राह
कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि वे सरकार के रुख का आकलन करने के बाद ही पेपर लीक विधेयक पर अपना अंतिम फैसला करेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब मॉनसून सत्र में छात्र आंदोलन, परीक्षा सुधार और संसदीय व्यवधान एक साथ केंद्र में हैं।