25 अगस्त 2026
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पुणे के महात्मा गांधी स्कूल के छात्र-शिक्षक मंत्री दादा भुसे के घर पहुंचे, जमीन विवाद पर माँगा समाधान

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पुणे के महात्मा गांधी स्कूल के छात्र-शिक्षक मंत्री दादा भुसे के घर पहुंचे, जमीन विवाद पर माँगा समाधान

सारांश

पुणे के महात्मा गांधी स्कूल के शिक्षक और छात्र मंत्री दादा भुसे के दरवाज़े तक पहुँचे — मुद्दा है 1,000 वर्ग फुट की कमी, जो अनाथ बच्चों की मुफ्त शिक्षा के रास्ते में रोड़ा बनी है। मंत्री ने सुनने का आश्वासन दिया, पर लिखित जवाब अभी बाकी है।

मुख्य बातें

पुणे के महात्मा गांधी स्कूल के शिक्षक और छात्र 25 अगस्त को मंत्री दादा भुसे के आवास पर पहुँचे।
स्कूल का परिसर 4,000 वर्ग फुट है, जबकि सरकारी मान्यता के लिए 5,000 वर्ग फुट अनिवार्य है।
स्कूल में पढ़ने वाले आधे से अधिक बच्चे अनाथ हैं और उन्हें निःशुल्क शिक्षा मिलती है।
पाँच वर्ष पहले मंत्रालय ने मौखिक रूप से 1,000 वर्ग फुट अतिरिक्त खरीदने का सुझाव दिया था, पर कोई लिखित आश्वासन नहीं मिला।
मंत्री दादा भुसे ने जल्द जानकारी देने का वादा किया; कोई आधिकारिक निर्णय अभी तक नहीं।

पुणे जिले के महात्मा गांधी स्कूल के छात्र और शिक्षक मंगलवार, 25 अगस्त को स्कूल की जमीन से जुड़े विवाद को लेकर महाराष्ट्र के मंत्री दादा भुसे के आवास पर पहुँचे। यह स्कूल अनाथ बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करता है और इसे सरकारी मान्यता के लिए आवश्यक क्षेत्रफल की शर्त पूरी करने में कठिनाई आ रही है। शिक्षकों का आरोप है कि इस मामले में अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

मंत्री से मुलाकात और सकारात्मक संकेत

मुलाकात के बाद स्कूल की एक शिक्षिका ने बताया कि मंत्री दादा भुसे ने उनकी बात ध्यान से सुनी और आश्वासन दिया कि जल्द से जल्द यह जानकारी दी जाएगी कि स्कूल के लिए क्या किया जा सकता है। शिक्षिका ने कहा, 'उनके इतने सकारात्मक रवैये से हम और हमारे विद्यार्थी काफी खुश हैं।'

मुख्य समस्या: क्षेत्रफल की अड़चन

शिक्षिका ने स्पष्ट किया कि स्कूल का परिसर वर्तमान में 4,000 वर्ग फुट में है, जबकि सरकारी नियमों के अनुसार मान्यता के लिए 5,000 वर्ग फुट आवश्यक है। इसी कारण स्कूल को आवश्यक अनुमति नहीं मिल पाई है। स्कूल प्रबंधन का अनुरोध है कि उन्हें विशेष प्रकरण के रूप में विचार किया जाए, क्योंकि स्कूल में पढ़ने वाले आधे से अधिक बच्चे अनाथ हैं।

पाँच साल पुरानी लड़ाई

शिक्षिका ने बताया कि पाँच वर्ष पहले जब वे मंत्रालय गए थे, तब एक अधिकारी ने मौखिक रूप से सुझाव दिया था कि यदि स्कूल कहीं से 1,000 वर्ग फुट अतिरिक्त जगह खरीद ले, तो अनुमति दे दी जाएगी। हालाँकि, यह कोई लिखित आश्वासन नहीं था और मामला वर्षों से अधर में लटका हुआ है।

अनाथ बच्चों के भविष्य का सवाल

शिक्षकों का कहना है कि उनकी कोशिश है कि इन बच्चों को भी वही अवसर मिलें जो एक सामान्य परिवार के बच्चे को मिलते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में शिक्षा के अधिकार और वंचित वर्गों तक इसकी पहुँच को लेकर बहस तेज़ है। गौरतलब है कि सरकारी नियमों की कठोरता अनेक छोटे किंतु सामाजिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण संस्थानों के अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर देती है।

आगे क्या होगा

मंत्री दादा भुसे ने शीघ्र जवाब देने का वादा किया है, लेकिन अभी तक कोई लिखित आश्वासन या समयसीमा सामने नहीं आई है। स्कूल प्रबंधन और शिक्षक अब मंत्री के आधिकारिक निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिससे इन अनाथ बच्चों की शिक्षा का भविष्य तय होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सरकारी नियमों की उस कठोरता का प्रतीक है जो सामाजिक उद्देश्य के लिए चलने वाले छोटे संस्थानों को सबसे अधिक नुकसान पहुँचाती है। जब एक स्कूल के आधे से ज़्यादा बच्चे अनाथ हों और संस्था उन्हें निःशुल्क शिक्षा दे रही हो, तो '1,000 वर्ग फुट कम है' जैसा तकनीकी आधार मान्यता रोकने के लिए पर्याप्त नहीं होना चाहिए। पाँच साल तक मौखिक आश्वासनों के भरोसे भटकते रहना बताता है कि प्रशासनिक तंत्र में जवाबदेही की कितनी कमी है। मंत्री का 'सकारात्मक रवैया' तब तक अर्थहीन है जब तक लिखित निर्णय और स्पष्ट समयसीमा सामने न आए।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे के महात्मा गांधी स्कूल का विवाद क्या है?
पुणे के महात्मा गांधी स्कूल को सरकारी मान्यता नहीं मिल रही क्योंकि उसका परिसर 4,000 वर्ग फुट है, जबकि नियम के अनुसार 5,000 वर्ग फुट होना चाहिए। यह स्कूल अनाथ बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देता है और विशेष प्रकरण के रूप में विचार की माँग कर रहा है।
मंत्री दादा भुसे ने शिक्षकों को क्या आश्वासन दिया?
मंत्री दादा भुसे ने शिक्षकों की बात सुनी और कहा कि जल्द से जल्द यह बताएँगे कि स्कूल के लिए क्या किया जा सकता है। हालाँकि, अभी तक कोई लिखित आश्वासन या निश्चित समयसीमा नहीं दी गई है।
इस स्कूल में कितने अनाथ बच्चे पढ़ते हैं?
शिक्षिका के अनुसार स्कूल में पढ़ने वाले आधे से अधिक बच्चे अनाथ हैं। स्कूल इन बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करता है और चाहता है कि उन्हें भी सामान्य बच्चों जैसे अवसर मिलें।
पाँच साल पहले मंत्रालय ने क्या कहा था?
पाँच वर्ष पहले जब शिक्षक मंत्रालय गए थे, तब एक अधिकारी ने मौखिक रूप से कहा था कि यदि स्कूल कहीं से 1,000 वर्ग फुट अतिरिक्त जगह खरीद ले तो अनुमति दे दी जाएगी। यह कोई लिखित आश्वासन नहीं था और मामला वर्षों से अनसुलझा है।
इस मामले में आगे क्या होने की उम्मीद है?
मंत्री दादा भुसे ने शीघ्र जवाब देने का वादा किया है। स्कूल प्रबंधन अब उनके आधिकारिक निर्णय की प्रतीक्षा कर रहा है, जिससे तय होगा कि इन अनाथ बच्चों की शिक्षा जारी रह सकेगी या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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