पुणे के महात्मा गांधी स्कूल के छात्र-शिक्षक मंत्री दादा भुसे के घर पहुंचे, जमीन विवाद पर माँगा समाधान
सारांश
मुख्य बातें
पुणे जिले के महात्मा गांधी स्कूल के छात्र और शिक्षक मंगलवार, 25 अगस्त को स्कूल की जमीन से जुड़े विवाद को लेकर महाराष्ट्र के मंत्री दादा भुसे के आवास पर पहुँचे। यह स्कूल अनाथ बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करता है और इसे सरकारी मान्यता के लिए आवश्यक क्षेत्रफल की शर्त पूरी करने में कठिनाई आ रही है। शिक्षकों का आरोप है कि इस मामले में अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
मंत्री से मुलाकात और सकारात्मक संकेत
मुलाकात के बाद स्कूल की एक शिक्षिका ने बताया कि मंत्री दादा भुसे ने उनकी बात ध्यान से सुनी और आश्वासन दिया कि जल्द से जल्द यह जानकारी दी जाएगी कि स्कूल के लिए क्या किया जा सकता है। शिक्षिका ने कहा, 'उनके इतने सकारात्मक रवैये से हम और हमारे विद्यार्थी काफी खुश हैं।'
मुख्य समस्या: क्षेत्रफल की अड़चन
शिक्षिका ने स्पष्ट किया कि स्कूल का परिसर वर्तमान में 4,000 वर्ग फुट में है, जबकि सरकारी नियमों के अनुसार मान्यता के लिए 5,000 वर्ग फुट आवश्यक है। इसी कारण स्कूल को आवश्यक अनुमति नहीं मिल पाई है। स्कूल प्रबंधन का अनुरोध है कि उन्हें विशेष प्रकरण के रूप में विचार किया जाए, क्योंकि स्कूल में पढ़ने वाले आधे से अधिक बच्चे अनाथ हैं।
पाँच साल पुरानी लड़ाई
शिक्षिका ने बताया कि पाँच वर्ष पहले जब वे मंत्रालय गए थे, तब एक अधिकारी ने मौखिक रूप से सुझाव दिया था कि यदि स्कूल कहीं से 1,000 वर्ग फुट अतिरिक्त जगह खरीद ले, तो अनुमति दे दी जाएगी। हालाँकि, यह कोई लिखित आश्वासन नहीं था और मामला वर्षों से अधर में लटका हुआ है।
अनाथ बच्चों के भविष्य का सवाल
शिक्षकों का कहना है कि उनकी कोशिश है कि इन बच्चों को भी वही अवसर मिलें जो एक सामान्य परिवार के बच्चे को मिलते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में शिक्षा के अधिकार और वंचित वर्गों तक इसकी पहुँच को लेकर बहस तेज़ है। गौरतलब है कि सरकारी नियमों की कठोरता अनेक छोटे किंतु सामाजिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण संस्थानों के अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर देती है।
आगे क्या होगा
मंत्री दादा भुसे ने शीघ्र जवाब देने का वादा किया है, लेकिन अभी तक कोई लिखित आश्वासन या समयसीमा सामने नहीं आई है। स्कूल प्रबंधन और शिक्षक अब मंत्री के आधिकारिक निर्णय की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जिससे इन अनाथ बच्चों की शिक्षा का भविष्य तय होगा।