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पंजाब में पेट्रोल-डीजल पर भारी वैट: भाजपा ने AAP सरकार पर लगाया दोहरे मापदंड का आरोप

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पंजाब में पेट्रोल-डीजल पर भारी वैट: भाजपा ने AAP सरकार पर लगाया दोहरे मापदंड का आरोप

सारांश

पंजाब BJP ने AAP सरकार को घेरा — पेट्रोल पर ₹18-19 और डीजल पर ₹13-14 प्रति लीटर VAT वसूलते हुए केंद्र पर दोष मढ़ना दोहरा मापदंड है। भाजपा ने तत्काल ₹10 प्रति लीटर VAT कटौती की माँग की है।

मुख्य बातें

पंजाब BJP प्रवक्ता प्रीतपाल सिंह बलियावाल ने 25 मई को AAP सरकार पर ईंधन कराधान में दोहरे मापदंड का आरोप लगाया।
पंजाब में पेट्रोल पर 16.58% VAT + 10% अतिरिक्त कर — प्रति लीटर लगभग ₹18-19 का बोझ।
डीजल पर 13.10% VAT + 10% अतिरिक्त कर — प्रति लीटर लगभग ₹13-14 का कर।
केंद्र सरकार ने पहले उत्पाद शुल्क में ₹13 प्रति लीटर तक की कटौती की थी, पर पंजाब ने राहत नहीं दी।
भाजपा ने VAT में ₹10 प्रति लीटर की तत्काल कटौती की माँग की।

पंजाब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता प्रीतपाल सिंह बलियावाल ने सोमवार, 25 मई को चंडीगढ़ में राज्य की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर ईंधन कराधान को लेकर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि सरकार एक ओर केंद्र पर ईंधन महंगाई का ठीकरा फोड़ती है, वहीं दूसरी ओर पेट्रोल-डीजल पर भारी कर लगाकर खुद अच्छी खासी कमाई कर रही है।

कितना कर वसूल रही है पंजाब सरकार

बलियावाल के अनुसार, पंजाब सरकार वर्तमान में पेट्रोल पर 16.58 प्रतिशत मूल्य वर्धित कर (VAT) और 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर लगा रही है, जिससे प्रति लीटर लगभग ₹18-19 का कर बनता है। डीजल पर 13.10 प्रतिशत VAT और 10 प्रतिशत अतिरिक्त कर के साथ प्रति लीटर लगभग ₹13-14 का बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।

भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस राजस्व का सार्वजनिक खुलासा करने से बचती रही है और जनता को राहत देने का कोई प्रयास नहीं किया है।

केंद्र की कटौती बनाम राज्य की चुप्पी

बलियावाल ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने पहले नागरिकों को सीधी राहत देने के लिए उत्पाद शुल्क में ₹13 प्रति लीटर तक की कमी की थी। उनके अनुसार, पंजाब सरकार ने इसी तर्ज पर कोई राहत देने के बजाय अपना राजस्व बढ़ाना जारी रखा और आम जनता पर बोझ डाले रखा।

आम जनता, किसान और व्यापारियों पर असर

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि ट्रांसपोर्टर, किसान और छोटे व्यवसायी महंगाई तथा बढ़ते परिचालन खर्चों के दोहरे दबाव में पिस रहे हैं। उनका कहना था कि ऐसे कठिन आर्थिक दौर में सरकारों को नागरिकों की कीमत पर राजस्व बढ़ाने के बजाय जन कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए।

भाजपा की माँग

बलियावाल ने राज्य सरकार से पेट्रोल और डीजल पर VAT में कम से कम ₹10 प्रति लीटर की तत्काल कटौती की माँग की, ताकि आम उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि यह वक्त राजनीतिक नाटकबाजी का नहीं, बल्कि जनता के साथ खड़े होने का है।

AAP सरकार का पक्ष

इस मामले में राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि ईंधन कराधान को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच जिम्मेदारी का यह विवाद देशभर में एक बारहमासी राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। आने वाले दिनों में AAP सरकार की प्रतिक्रिया और इस माँग पर उसका रुख स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

हर दल के सत्ता में आने पर दोहराया जाता है। असली सवाल यह है कि जब केंद्र ने उत्पाद शुल्क घटाया, तो पंजाब ने VAT में समानांतर कटौती क्यों नहीं की — यह पारदर्शिता का सवाल है, न केवल राजनीति का। किसान और ट्रांसपोर्टर जिन राज्यों में सबसे ज़्यादा ईंधन पर निर्भर हैं, वहाँ यह अंतर सीधे उनकी जेब पर पड़ता है। AAP की 'आम आदमी' छवि और उच्च VAT दर के बीच यह विरोधाभास उसे राजनीतिक रूप से कमज़ोर स्थिति में रखता है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब में पेट्रोल और डीजल पर कितना VAT लगता है?
भाजपा प्रवक्ता के दावे के अनुसार, पंजाब सरकार पेट्रोल पर 16.58% VAT और 10% अतिरिक्त कर लगाती है, जिससे प्रति लीटर लगभग ₹18-19 का कर बनता है। डीजल पर 13.10% VAT और 10% अतिरिक्त कर के साथ प्रति लीटर लगभग ₹13-14 का बोझ पड़ता है।
भाजपा ने पंजाब सरकार से क्या माँग की है?
BJP प्रवक्ता प्रीतपाल सिंह बलियावाल ने पंजाब सरकार से पेट्रोल और डीजल पर VAT में कम से कम ₹10 प्रति लीटर की तत्काल कटौती की माँग की है। उनका कहना है कि इससे आम उपभोक्ताओं, किसानों और ट्रांसपोर्टरों को राहत मिलेगी।
केंद्र सरकार ने ईंधन पर क्या राहत दी थी?
भाजपा के अनुसार, केंद्र सरकार ने पहले नागरिकों को सीधी राहत देने के लिए उत्पाद शुल्क में ₹13 प्रति लीटर तक की कमी की थी। भाजपा का आरोप है कि पंजाब सरकार ने इसी तर्ज पर VAT में कोई कटौती नहीं की।
इस विवाद से आम जनता पर क्या असर पड़ रहा है?
भाजपा का कहना है कि ट्रांसपोर्टर, किसान और छोटे व्यवसायी महंगाई व बढ़ते परिचालन खर्चों के दबाव में हैं। उच्च ईंधन कर से माल ढुलाई लागत बढ़ती है, जिसका असर खाद्य पदार्थों और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ता है।
क्या AAP सरकार ने इन आरोपों पर कोई जवाब दिया है?
25 मई तक राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ईंधन कराधान को लेकर केंद्र-राज्य दोषारोपण का यह विवाद राष्ट्रीय स्तर पर एक चिरपरिचित राजनीतिक मुद्दा है।
राष्ट्र प्रेस
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