राहुल गांधी पर FIR से कांग्रेस आक्रामक, गोहिल बोले — दलित सम्मान की लड़ाई जारी रहेगी
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता एवं पूर्व राज्यसभा सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने 31 अगस्त को शुद्धिकरण विवाद मामले में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह कार्रवाई दलित सम्मान की आवाज उठाने वाले को चुप कराने की कोशिश है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एफआईआर से राहुल गांधी न डरेंगे और न झुकेंगे।
मामले की पृष्ठभूमि
विवाद की जड़ में वह कथित घटना है जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के किसी कार्यक्रम के बाद कथित तौर पर शुद्धिकरण किए जाने की बात सामने आई। खड़गे दलित समुदाय से आते हैं। गोहिल के अनुसार, राहुल गांधी ने इस कथित अपमान के विरुद्ध आवाज उठाई, जिसके बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई।
गोहिल का भाजपा पर हमला
गोहिल ने इस पूरे घटनाक्रम को 'उल्टा चोर कोतवाल को डांटे' जैसी स्थिति करार दिया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर दलित, गरीब और महिला विरोधी मानसिकता रखने का आरोप लगाया। गोहिल ने राजीव गांधी सरकार के कार्यकाल में लाए गए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) कानून की धारा 3 का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह के मामले में उक्त कानून के तहत एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए थी — न कि राहुल गांधी के खिलाफ।
राहुल गांधी की तुलना महात्मा गांधी से
गोहिल ने स्वतंत्रता आंदोलन का संदर्भ देते हुए कहा कि महात्मा गांधी पर ब्रिटिश शासन के दौरान भी कई मामले दर्ज हुए, लेकिन वे अपने रुख से पीछे नहीं हटे। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पहले भी कई कानूनी मामलों का सामना कर चुके हैं और इस बार भी वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का स्वागत
सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश की उस टिप्पणी पर — जिसमें कहा गया कि छात्रों को सवाल पूछने से धमकाया या रोका नहीं जा सकता — गोहिल ने अदालत का आभार जताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद ही यह है कि नागरिक सत्ता से सवाल कर सकें और सरकार को उन सवालों का जवाब देना चाहिए।
छात्रों पर कथित बल प्रयोग पर चिंता
गोहिल ने सवाल पूछने वाले छात्रों के खिलाफ कथित अत्यधिक बल प्रयोग पर भी चिंता जताई। उन्होंने पैलेट गन, बिजली के झटके वाली लाठियों और दुर्व्यवहार जैसे कथित आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएँ लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने माँग की कि हर नागरिक को — छात्रों समेत — बिना भय के सवाल पूछने का अधिकार मिलना चाहिए।