राज ठाकरे का नवी मुंबई में शहरी नियोजन और ट्रैफिक संकट पर प्रहार, बोले- 'महाराष्ट्र की जनता सत्ता सौंपे तो अनुशासन लाएंगे'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को नवी मुंबई में आयोजित वाणिज्यिक वाहन परिवहन सम्मेलन और ट्रांसपोर्टरों की रैली को संबोधित करते हुए राज्य के बिगड़ते शहरी बुनियादी ढाँचे और यातायात प्रबंधन पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महाराष्ट्र में अनुशासन लाने के लिए केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति की ज़रूरत है, और वे उस दिन का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं जब जनता उन्हें सत्ता सौंपेगी।
मुख्य आरोप और शहरी नियोजन पर प्रहार
ठाकरे ने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि विकास योजनाएँ विशेषज्ञों की राय या उचित नगर नियोजन के आधार पर नहीं, बल्कि 'बिल्डरों से दोस्ती' के आधार पर तैयार की जाती हैं। उन्होंने कहा कि आदर्श रूप से किसी भी क्षेत्र का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा सड़कों के लिए होना चाहिए, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिन इलाकों की क्षमता मूलतः 50 लोगों के लिए बनाई गई थी, वहाँ आज पर्याप्त पार्किंग सुविधा के बिना 500 लोग रह रहे हैं। ठाकरे ने यह भी दावा किया कि पुल और सड़कें अक्सर जान-बूझकर दो साल के भीतर खराब होने के लिए बनाई जाती हैं, ताकि मरम्मत के ठेके लगातार जारी होते रहें।
ई-चालान प्रणाली पर आपत्ति
राज ठाकरे ने स्पष्ट किया कि वे ई-चालान प्रणाली के सिद्धांत के विरोधी नहीं हैं, लेकिन जुर्माने लगाने के मनमाने तरीके पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि ई-चालान की निगरानी कैमरों द्वारा सख्ती से होनी चाहिए, न कि कर्मचारियों द्वारा मौके पर मैन्युअल रूप से जारी किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा, 'इस देश के यातायात को देखकर मुझे इसके वर्तमान और भविष्य की झलक मिलती है। हमें न तो वाहन चलाना आता है और न ही उन्हें पार्क करना।' आधुनिक यातायात प्रबंधन की विडंबना पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि शहरों में स्वचालित यातायात सिग्नल तो हैं, लेकिन उनके ठीक बगल में मानव यातायात कांस्टेबल तैनात रहते हैं — क्योंकि किसी को वाहन चालकों पर नियमों का पालन करने का भरोसा ही नहीं है।
व्यावहारिक सुझाव जो अनसुने रहे
ठाकरे ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के आयुक्त को फुटपाथों के लिए रंग-कोडिंग का प्रस्ताव दिया था — जिसमें लाल और काला रंग सख्त 'नो पार्किंग' ज़ोन के लिए और पीला और काला रंग निर्धारित पार्किंग क्षेत्रों के लिए रखा जाए। उन्होंने अफसोस जताया कि सार्वजनिक क्रियान्वयन की इच्छाशक्ति के अभाव में ऐसे व्यावहारिक सुझाव निष्प्रभावी हो जाते हैं।
ठाकरे ने चेतावनी दी कि यदि उपनगरीय रेलवे प्रणाली कभी ठप हो जाती है, तो निजी वाहनों की अचानक बाढ़ से पूरा शहर जाम हो जाएगा और निवासी अपने घरों में ही बंद होकर रह जाएंगे — यह एक ऐसा परिदृश्य है जिसके लिए महाराष्ट्र के शहर बिल्कुल तैयार नहीं हैं।
बेतरतीब शहरीकरण पर सवाल
उन्होंने खेल के मैदानों, बगीचों या टिकाऊ जल आपूर्ति जैसी बुनियादी सार्वजनिक सुविधाओं के बिना बन रही बेतरतीब इमारतों और कॉलोनियों की भी तीखी आलोचना की। ठाकरे ने सवाल उठाया कि क्या इस अव्यवस्थित शहरीकरण को वास्तव में 'विकास' कहा जा सकता है।
राजनीतिक संदेश और आगे की राह
अपने भाषण का समापन एक स्पष्ट राजनीतिक घोषणा के साथ करते हुए ठाकरे ने कहा, 'मैं वास्तव में उस पल का इंतज़ार कर रहा हूँ जब महाराष्ट्र की जनता मुझे सत्ता सौंपेगी। इस तरह की चीज़ों में अनुशासन लाना कोई रॉकेट साइंस नहीं है — इसके लिए बस इसे करने की इच्छाशक्ति चाहिए।' उनके इस बयान पर ट्रांसपोर्टरों और MNS कार्यकर्ताओं से भरी सभा ने जोरदार तालियाँ बजाईं।
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में शहरी अवसंरचना की खामियाँ और ट्रैफिक कुप्रबंधन विपक्षी दलों के लिए एक सुलगता मुद्दा बन रहे हैं। MNS की यह रैली आने वाले चुनावी समीकरणों में ट्रांसपोर्ट सेक्टर को एक अहम मतदाता वर्ग के रूप में स्थापित करने की कोशिश मानी जा रही है।