दीपावली पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सिक्किम के शेरथांग युद्ध स्मारक पहुँचेंगे, जवानों संग मनाएंगे त्योहार
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस दीपावली सरहद पर तैनात जवानों के साथ बिताएंगे। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर जानकारी दी कि 7 नवंबर 2026 (शनिवार) को दीपावली की पूर्व संध्या पर वे दार्जिलिंग स्थित बागडोगरा एयरफील्ड और सुकना (सिलीगुड़ी) में भारतीय सेना के जवानों से मुलाकात करेंगे। इसके अगले दिन, 8 नवंबर 2026 को दीपावली के अवसर पर, वे सिक्किम के शेरथांग युद्ध स्मारक पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
शेरथांग युद्ध स्मारक का ऐतिहासिक महत्व
शेरथांग युद्ध स्मारक, जिसे 'वाटरशेड शहीद युद्ध स्मारक' के नाम से भी जाना जाता है, पूर्वी सिक्किम में भारत-चीन सीमा पर नाथू ला दर्रे के निकट स्थित है। यह स्मारक वर्ष 1967 में नाथू ला और चो ला में चीनी सेना के विरुद्ध संघर्ष करते हुए वीरगति पाने वाले भारतीय सेना के शहीदों और वीर सैनानियों की स्मृति में स्थापित किया गया है।
यह स्थल राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है और देश की संप्रभुता की रक्षा में दिए गए सर्वोच्च बलिदान की याद दिलाता है। गौरतलब है कि 1967 का नाथू ला संघर्ष उन निर्णायक अध्यायों में से एक है जिसमें भारतीय सेना ने अत्यंत विषम परिस्थितियों में अटूट साहस का प्रदर्शन किया था।
भौगोलिक स्थिति और विशेषताएँ
यह स्मारक लगभग 13,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित है, जो वहाँ तैनात जवानों की असाधारण कठिनाइयों को रेखांकित करता है। गंगटोक से यह स्थान लगभग 52 किलोमीटर दूर है और चांगू झील (त्सोमगो झील) तथा न्यू बाबा मंदिर के समीप नाथू ला मार्ग पर पड़ता है।
सुरक्षा कारणों से इस क्षेत्र में प्रवेश केवल भारतीय नागरिकों को ही दिया जाता है। गंगटोक से एक दिन पूर्व 'प्रोटेक्टेड एरिया परमिट' (PAP) प्राप्त करना अनिवार्य है। विदेशी पर्यटकों को चांगू झील से आगे जाने की अनुमति नहीं होती।
रक्षा मंत्री का जवानों से संवाद
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि वे शेरथांग में केवल श्रद्धांजलि ही नहीं देंगे, बल्कि इस दुर्गम क्षेत्र में तैनात सैनिकों से सीधे संवाद भी करेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-चीन सीमा पर गतिविधियों को लेकर सामरिक सतर्कता बनाए रखी जा रही है।
देश के प्रमुख त्योहार पर सरहद पर जाकर जवानों का उत्साहवर्धन करना, रक्षा मंत्रालय की उस परंपरा का हिस्सा है जो सशस्त्र बलों के मनोबल को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।
आगे की योजना
रक्षा मंत्री के इस दौरे में बागडोगरा एयरफील्ड, सुकना और शेरथांग — तीन अलग-अलग ठिकानों पर तैनात जवानों से मुलाकात शामिल है। उनके इस प्रवास से पूर्वोत्तर सीमा क्षेत्र में तैनात सैनिकों को एक विशेष संदेश मिलेगा कि देश का नेतृत्व उनके साथ खड़ा है।