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रामलला के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने चंपत राय का किया बचाव, दान चोरी पर माँगी सख्त कार्रवाई

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रामलला के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने चंपत राय का किया बचाव, दान चोरी पर माँगी सख्त कार्रवाई

सारांश

रामलला की प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकार अरुण योगीराज ने मंदिर में दान चोरी की खबरों को करोड़ों भक्तों की आस्था के साथ विश्वासघात बताया — लेकिन चंपत राय पर भरोसा बरकरार रखा और एसआईटी जाँच को सही दिशा में उठाया गया कदम कहा।

मुख्य बातें

मैसूर के मूर्तिकार अरुण योगीराज ने अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी की खबरों को 'बेहद दुखद' बताया।
उन्होंने ट्रस्ट महासचिव चंपत राय को 'सादगी, कड़ी मेहनत और समर्पण का प्रतीक' करार दिया।
चंपत राय ने ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संपर्क कर एसआईटी जाँच शुरू कराई।
योगीराज ने दान चोरी में शामिल सभी दोषियों पर मिसाल कायम करने वाली सख्त कार्रवाई की माँग की।
योगीराज और उनकी टीम ने सात से आठ महीने अयोध्या में रहकर रामलला की प्रतिमा तराशी थी।

मैसूर के प्रख्यात मूर्तिकार अरुण योगीराज — जिन्होंने अयोध्या के भव्य राम मंदिर के लिए रामलला की प्रतिमा तराशी — ने मंदिर में दान की चोरी की खबरों को 'बेहद दुखद' बताया है। साथ ही उन्होंने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का खुलकर बचाव करते हुए उन्हें 'सादगी, कड़ी मेहनत और समर्पण का प्रतीक' करार दिया।

मूर्तिकार की पीड़ा और प्रतिक्रिया

योगीराज ने कहा, 'भगवान राम के एक भक्त के रूप में मुझे यह बहुत दुखद लगता है, क्योंकि दुनियाभर के भक्त अपनी मेहनत की कमाई आस्था, प्रेम और भक्ति के साथ मंदिर को दान करते हैं, यह मानते हुए कि वे रामलला के लिए चढ़ावा चढ़ा रहे हैं।' उन्होंने कहा कि यह चोरी करोड़ों भक्तों के लिए चौंकाने वाली है और इससे ट्रस्टियों पर उनकी आस्था डगमगा सकती है।

उल्लेखनीय है कि अरुण योगीराज और उनकी टीम ने अयोध्या में लगभग सात से आठ महीने रहकर रामलला की मूर्ति बनाई, जिसमें दिव्यता और बच्चों जैसी मासूमियत का अद्वितीय संतुलन है।

चंपत राय के पक्ष में खड़े हुए योगीराज

दान घोटाले की खबरों के बीच जब ट्रस्ट सदस्यों के इस्तीफे की चर्चा चल रही थी, योगीराज ने स्पष्ट किया कि वे आठ से नौ महीनों से ट्रस्ट से जुड़े रहे हैं और उन्होंने सदस्यों को हमेशा ईमानदारी व पारदर्शिता से काम करते देखा है। उन्होंने कहा, 'चंपत राय ने अपने कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही का उच्चतम स्तर बनाए रखा और पिछले कुछ दिनों में जो कुछ हुआ है, उस पर विश्वास करना मुश्किल है।'

योगीराज ने यह भी बताया कि चंपत राय ने ही स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संपर्क करके चढ़ावे की रकम में हुई गड़बड़ी की एसआईटी जाँच शुरू कराई — जिसे उन्होंने नैतिक जवाबदेही का प्रमाण बताया।

दोषियों पर सख्त कार्रवाई की माँग

मूर्तिकार ने मंदिर की संपत्ति की चोरी में शामिल सभी दोषियों के विरुद्ध 'मिसाल कायम करने वाली' कार्रवाई की माँग की। उन्होंने कहा, 'समय के साथ और मंदिर में आने वाले भक्तों की संख्या में भारी बढ़ोतरी के कारण, कुछ शरारती तत्वों ने इस मौके का फायदा उठाया। लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि मंदिर का पैसा चुराने की साजिश में शामिल सभी लोगों पर मामला दर्ज किया जाएगा और उन्हें जल्द ही सजा दिलाई जाएगी।'

जाँच की स्थिति और आगे की राह

ट्रस्ट की सक्रिय भूमिका पर प्रकाश डालते हुए योगीराज ने कहा कि यह विश्वास करना मुश्किल है कि ट्रस्ट की देखरेख में मंदिर में ऐसी अनियमितताएँ हुईं, लेकिन एसआईटी जाँच का आरंभ होना एक सकारात्मक कदम है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अयोध्या का राम मंदिर वैश्विक आस्था का केंद्र बन चुका है और लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन दर्शन के लिए आते हैं। दोषियों पर कार्रवाई और ट्रस्ट की पारदर्शिता ही आगे भक्तों का विश्वास पुनर्स्थापित करने की कुंजी होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो निगरानी तंत्र इतने बड़े पैमाने पर कैसे चूका? एसआईटी जाँच का श्रेय चंपत राय को देना एक रणनीतिक बचाव है, लेकिन जवाबदेही की असली कसौटी यह होगी कि जाँच स्वतंत्र रूप से कितनी गहराई तक जाती है। मंदिर में भक्तों की आस्था और उनके दान की सुरक्षा के लिए केवल एसआईटी नहीं, बल्कि संस्थागत ऑडिट और पारदर्शी वित्तीय प्रकटीकरण की ज़रूरत है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अरुण योगीराज कौन हैं और उनका राम मंदिर से क्या संबंध है?
अरुण योगीराज मैसूर के प्रख्यात मूर्तिकार हैं जिन्होंने अयोध्या के राम मंदिर के लिए रामलला की मुख्य प्रतिमा तराशी। उन्होंने और उनकी टीम ने इस कार्य के लिए अयोध्या में लगभग सात से आठ महीने बिताए।
अयोध्या राम मंदिर में दान चोरी का मामला क्या है?
रिपोर्टों के अनुसार मंदिर के कुछ कर्मचारियों पर देश-विदेश के भक्तों से प्राप्त नगद और गहनों के रूप में दान में गबन का आरोप है। इस मामले में एसआईटी जाँच शुरू की गई है।
चंपत राय ने दान चोरी मामले में क्या भूमिका निभाई?
अरुण योगीराज के अनुसार, चंपत राय ने स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संपर्क कर चढ़ावे की रकम में गड़बड़ी की एसआईटी जाँच शुरू कराई। योगीराज ने इसे उनकी नैतिक जवाबदेही का प्रमाण बताया।
क्या चंपत राय या अन्य ट्रस्टी इस्तीफा दे रहे हैं?
रिपोर्टों के अनुसार ट्रस्ट सदस्यों के इस्तीफे की चर्चा चल रही है। अरुण योगीराज ने इसी संदर्भ में चंपत राय का बचाव किया और उन्हें ईमानदार व पारदर्शी बताया।
दान चोरी मामले में आगे क्या होगा?
एसआईटी जाँच जारी है और अरुण योगीराज ने दोषियों पर शीघ्र व मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई की उम्मीद जताई है। मामले की जाँच का दायरा और परिणाम आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
राष्ट्र प्रेस
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